बदहाली में बीता बचपन, पेट पालने के लिए किया मजदूरी का काम; फिर ऐसे चमकी सुदेश लहरी की किस्मत
Sudesh Lehri: आज सुदेश लहरी की कॉमेडी देखकर लाखों लोग अपनी हंसी नहीं रोक पाते लेकिन इस हंसमुख चेहरे के पीछे संघर्षों से भरी कहानी छिपी है. एक वक्त ऐसा था, जब परिवार का पेट पालने के लिए उन्हें चाय और कुल्फी बेचनी पड़ती थी. कभी फैक्ट्रियों में काम किया, तो कभी मंच पर अपमान सहा. यहां तक कि आर्थिक तंगी में अपनी ट्रॉफी तक बेचनी पड़ी. आइए जानते हैं, कैसे मुश्किल हालात से निकलकर सुदेश लहरी टीवी के मशहूर कॉमेडियन बने…
कभी नंगे पैर फैक्ट्रियों में पहुंचाते थे चाय
सुदेश लहरी का बचपन आर्थिक तंगी में गुजरा. परिवार की मदद करने के लिए उन्हें छोटी उम्र से ही काम करना पड़ा. वह चाय की दुकानों और फैक्ट्रियों में चाय पहुंचाते थे. कई बार उनके पास पहनने के लिए चप्पल तक नहीं होती थी. आज जिस कलाकार की कॉमिक टाइमिंग लोगों को हंसाती है, उसने जिंदगी के शुरुआती दिनों में काफी मुश्किलें झेली थीं.
चाय और कुल्फी बेचकर चलाया घर
सुदेश लहरी ने अभिनय की कोई औपचारिक ट्रेनिंग नहीं ली लेकिन जिंदगी के अनुभवों ने उन्हें बहुत कुछ सिखाया. उन्होंने चाय बेचने के अलावा कुल्फी और सब्जियां बेचने जैसे काम भी किए. ग्राहकों से बातचीत करना और उन्हें अपने अंदाज में मनाना उनके रोजमर्रा के काम का हिस्सा था. यही अनुभव आगे चलकर उनके अभिनय और कॉमेडी में काम आए.
शादी-ब्याह में गाया और स्टेज पर पड़ा थप्पड़
सुदेश को बचपन से गाने और दूसरों की नकल उतारने का शौक था. उन्होंने ऑर्केस्ट्रा और शादी-ब्याह के कार्यक्रमों में गाकर अपने करियर की शुरुआत की. इसी दौरान एक घटना ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया. मनीष पॉल के पॉडकास्ट में उन्होंने बताया था कि एक बार परफॉर्मेंस के दौरान किसी व्यक्ति ने उन्हें थप्पड़ मार दिया था. इस अपमान के बाद उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाने की ठान ली और आगे बढ़ने के लिए मेहनत जारी रखी.
'लाफ्टर चैलेंज' से मिली पहचान
सुदेश लहरी को साल 2007 में 'द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज' के तीसरे सीजन से देशभर में पहचान मिली. वह इस प्रतियोगिता में तीसरे स्थान पर रहे. वहीं कपिल शर्मा विजेता बने. इसके बाद 'कॉमेडी सर्कस' में उनकी लोकप्रियता बढ़ी. कृष्णा अभिषेक के साथ उनकी जोड़ी दर्शकों को खूब पसंद आई. दोनों के बीच नोकझोंक और थप्पड़ वाले कॉमेडी सीन उनके एक्ट का चर्चित हिस्सा बने.
परिवार के लिए बेचनी पड़ी ट्रॉफी
सुदेश लहरी की जिंदगी का एक भावुक पहलू उनकी आर्थिक तंगी से जुड़ा है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने एक पॉडकास्ट में बताया था कि मुश्किल वक्त में परिवार के खाने का इंतजाम करने के लिए उन्हें अपनी ट्रॉफी बेचनी पड़ी थी. इसके बदले उन्हें करीब 300 से 400 रुपये मिले थे.