Duleep Trophy Final: दलीप ट्रॉफी का फाइनल मुकाबला ईस्ट जोन और साउथ जोन के बीच खेला गया, जो ड्रॉ पर खत्म हुआ. हालांकि, पहली पारी में मिली मजबूत बढ़त के आधार पर ईशान किशन की कप्तानी वाली ईस्ट जोन को विजेता घोषित कर दिया गया. ईस्ट जोन ने 14 साल के लंबे इंतजार के बाद यह ट्रॉफी अपने नाम की है. इससे पहले टीम ने 2012-13 के सीजन में यह खिताब जीता था.
पूरे टूर्नामेंट में दोनों टीमों के कप्तानों का दबदबा देखने को मिला. ईशान किशन को फाइनल मैच में उनके शानदार प्रदर्शन के लिए ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया, जबकि साउथ जोन के कप्तान तिलक वर्मा भले ही टीम के लिए ट्रॉफी नहीं जीत पाए लेकिन पुरे टूर्नामेंट में उनके बेहतरीन खेल के लिए उन्हें ‘प्लेयर ऑफ द सीरीज’ के अवॉर्ड से नवाजा गया.
ईशान किशन बने ‘प्लेयर ऑफ द मैच’
ईस्ट जोन के कप्तान ईशान किशन का घरेलू क्रिकेट में शानदार फॉर्म जारी है. उन्होंने दलीप ट्रॉफी के 3 मैचों की 5 पारियों में 102.25 की बेहतरीन औसत से कुल 409 रन बनाए. इस दौरान उनके बल्ले से एक दोहरा शतक और एक अर्धशतक निकला. वह इस टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज रहे. उनके इस प्रदर्शन के बाद एक बार फिर भारतीय टेस्ट टीम में उनकी वापसी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं.
फाइनल मैच की बात करें तो पहली पारी में ईशान ने जबरदस्त बल्लेबाजी करते हुए 334 गेंदों में 270 रनों की मैराथन पारी खेली, जिसमें 30 चौके और 7 छक्के शामिल थे. इसके बाद दूसरी पारी में भी उन्होंने आक्रामक अंदाज में 98 गेंदों पर 80 रन बनाए, जिसमें 9 चौके और 3 छक्के शामिल रहे.
तिलक वर्मा को मिला ‘प्लेयर ऑफ द सीरीज’ का खिताब
साउथ जोन के कप्तान तिलक वर्मा ने भी टूर्नामेंट में कई यादगार पारियां खेलीं. उन्होंने नॉर्थ जोन के खिलाफ पहली पारी में 116 रन बनाए और दूसरी पारी में 51 रनों का योगदान दिया, खास बात यह रही कि वे दोनों पारियों में नाबाद रहे. इसके बाद ईस्ट जोन के खिलाफ फाइनल मुकाबले में उन्होंने 211 गेंदों पर 99 रनों की बेहद जिम्मेदारीभरी पारी खेली, हालांकि वे महज 1 रन से अपने शतक से चूक गए.
तिलक ने टूर्नामेंट के 2 मैचों की 3 पारियों में कुल 266 रन बनाए और सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों की सूची में दूसरे स्थान पर रहे. इस दौरान उन्होंने एक शतक और दो अर्धशतक लगाए.
ईस्ट जोन का विशाल स्कोर और मैच का नतीजा
ईस्ट जोन ने अपनी दूसरी पारी में 7 विकेट पर 388 रन बनाकर साउथ जोन पर कुल 760 रनों की विशाल बढ़त हासिल कर ली थी, जिसके बाद मैच को ड्रॉ घोषित कर दिया गया. इस पारी में मोहम्मद कोनेन कुरैशी ने अपने फर्स्ट क्लास करियर का पहला शतक जड़ते हुए नाबाद 116 रन बनाए. उनका यह महज दूसरा ही फर्स्ट क्लास मैच था.
हालांकि, ईस्ट जोन ने पहली पारी में ही 708 रनों का विशाल स्कोर बनाकर मैच और खिताब पर अपनी पकड़ काफी हद तक मजबूत कर ली थी. दोपहर 2:10 बजे जब दोनों टीमों के खिलाड़ियों ने हाथ मिलाया, तो मैच औपचारिक रूप से ड्रॉ समाप्त हुआ और ईस्ट जोन ने ट्रॉफी अपने नाम कर ली.