Lala Amarnath Birth Anniversary Special: 11 सितंबर को जन्मे लाला अमरनाथ भारतीय क्रिकेट के वो सितारे हैं, जिन्होंने देश को पहला टेस्ट शतक दिलाया. पाकिस्तान के खिलाफ पहली टेस्ट जीत से लेकर कप्तानी के विवादों तक, जानिए उनके जीवन की पूरी ऐतिहासिक कहानी.
वो धाकड़ खिलाड़ी जिसने ठोका भारत का पहला टेस्ट शतक
11 सितंबर 1911 को पंजाब के कपूरथला में जन्मे लाला अमरनाथ भारद्वाज को भारतीय क्रिकेट का ‘पितामह’ माना जाता है. बचपन में अंग्रेज खिलाड़ियों को क्रिकेट खेलते देखकर उनके मन में भी इस खेल के प्रति गहरा लगाव पैदा हुआ. खेल के प्रति उनकी दीवानगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने अपनी मां से जिद करके अपना पहला बल्ला मांगा था.
लाला अमरनाथ ने 1933 में अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत की. इसी साल इंग्लैंड की टीम भारत के दौरे पर आई थी. मुंबई (तब बॉम्बे) के जिमखाना मैदान पर खेले गए टेस्ट मैच में लाला अमरनाथ ने इंग्लैंड के मजबूत गेंदबाजी आक्रमण के सामने शानदार 118 रन बनाए. यह किसी भी भारतीय बल्लेबाज द्वारा टेस्ट क्रिकेट में बनाया गया पहला शतक था. इस ऐतिहासिक पारी की खबर देश के कोने-कोने में फैल गई और पूरे भारत में जश्न का माहौल बन गया.
1947 में देश की आजादी के बाद लाला अमरनाथ स्वतंत्र भारत की टेस्ट टीम के पहले कप्तान बने. उनकी कप्तानी में भारत ने 1952 में दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान पर पाकिस्तान को हराकर अपनी पहली टेस्ट जीत दर्ज की और सीरीज भी 2-1 से अपने नाम की.
लाला अमरनाथ अपने बेबाक और निडर स्वभाव के लिए भी जाने जाते थे. 1936 के इंग्लैंड दौरे पर कप्तानी को लेकर उठे विवाद के कारण उन्हें दौरे के बीच से ही स्वदेश वापस भेज दिया गया था. उस समय विजयनगरम के महाराजकुमार (‘विजी’) को टीम का कप्तान बनाया गया था, जिस पर काफी राजनीति के आरोप लगे थे. कहा जाता है कि विजी ने लाला अमरनाथ को दिग्गज खिलाड़ी सी.के. नायडू से बात न करने की शर्त पर एक विदेशी दौरे का वादा किया था.
लॉर्ड्स में ‘माइनर काउंटीज’ के खिलाफ मैच के दौरान पीठ में दर्द के बावजूद अमरनाथ को पैड पहनकर लंबा इंतजार करना पड़ा. कप्तान विजी दूसरे बल्लेबाजों को मैदान पर भेजते रहे और जब दिन का खेल खत्म होने वाला था, तब अमरनाथ को बल्लेबाजी के लिए भेजा गया. ड्रेसिंग रूम लौटने के बाद उन्होंने नाराजगी में पंजाबी में कहा था कि वह समझ रहे हैं कि पर्दे के पीछे क्या चल रहा है.
खिलाड़ी के रूप में संन्यास लेने के बाद भी लाला अमरनाथ क्रिकेट से जुड़े रहे. 1954-55 के पाकिस्तान दौरे पर वह भारतीय टीम के मैनेजर बनकर गए. बाद में उन्होंने बीसीसीआई (BCCI) की चयन समिति के अध्यक्ष के रूप में सेवाएं दीं और एक सफल क्रिकेट कमेंटेटर व विशेषज्ञ के रूप में पहचाने गए.
लाला अमरनाथ की क्रिकेट विरासत को उनके बेटों ने आगे बढ़ाया. उनके बेटे मोहिंदर अमरनाथ और सुरिंदर अमरनाथ ने भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट खेला, जबकि तीसरे बेटे राजिंदर अमरनाथ ने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में अपनी छाप छोड़ी. उनके पोते दिग्विजय भी प्रथम श्रेणी क्रिकेटर रहे.
फिल्म ’83’ में मोहिंदर अमरनाथ ने अपने पिता लाला अमरनाथ की भूमिका निभाई थी. 11 सितंबर को उनकी जयंती पर भारतीय क्रिकेट का यह महान नायक हमेशा याद किया जाता है.
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