क्रिकेट की दुनिया बेहद खूबसूरत होने के साथ-साथ काफी अनिश्चितताओं से भरी है. यहां कभी कोई खिलाड़ी रातों-रात स्टार बन जाता है, तो कभी किस्मत की ऐसी मार पड़ती है कि चमकता हुआ करियर अचानक गुमनामी के अंधेरे में खो जाता है. ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम के पूर्व घातक तेज गेंदबाज नाथन ब्रेकन (Nathan Bracken) की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. आज (12 सितंबर) ब्रेकन अपना जन्मदिन मना रहे हैं. एक समय दुनिया के दिग्गजों को अपनी स्विंग से नचाने वाला यह गेंदबाज आज क्रिकेट का चकाचौंध छोड़ सिडनी में 9 से 5 की कॉरपोरेट नौकरी कर रहा है.
सहवाग भी खाते थे खौफ
नाथन ब्रेकन अपने दौर में ऑस्ट्रेलिया के सबसे भरोसेमंद और सटीक गेंदबाजों में गिने जाते थे. उनके पास गेंद को दोनों तरफ स्विंग कराने की अद्भुत कला थी. भारत के विस्फोटक सलामी बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग, जो दुनिया भर के गेंदबाजों के लिए खौफ का दूसरा नाम थे, वे भी ब्रेकन के सामने खुलकर नहीं खेल पाते थे. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 16 पारियों के दौरान ब्रेकन ने सहवाग को 7 बार पवेलियन का रास्ता दिखाया. इस दौरान सहवाग उनके खिलाफ 233 गेंदों में महज 148 रन ही बना सके थे.
दमदार करियर और 100 विकेट का रिकॉर्ड
2001 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखने वाले ब्रेकन ने ऑस्ट्रेलिया के लिए 5 टेस्ट, 116 वनडे और 19 टी-20 मैच खेले. तीनों फॉर्मेट मिलाकर उन्होंने कुल 205 अंतरराष्ट्रीय विकेट चटकाए. वनडे क्रिकेट में तो उनका दबदबा ऐसा था कि उन्होंने महज 60वें वनडे मैच में अपने 100 विकेट पूरे कर लिए थे. एक वक्त ऐसा लग रहा था कि वे ऑस्ट्रेलिया के महानतम गेंदबाजों की फेहरिस्त में शीर्ष पर जगह बनाएंगे.
RCB का ऑफर ठुकराया
साल 2011 में जब ब्रेकन ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा की, तब भी उनकी स्विंग का जादू बरकरार था. यही वजह थी कि आईपीएल (IPL) फ्रेंचाइजी रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) ने उन्हें अपनी टीम में शामिल करने के लिए 1.3 करोड़ रुपये का भारी-भरकम ऑफर दिया था. हालांकि, ब्रेकन ने टी-20 लीग की इस चकाचौंध और पैसों से दूर रहने का फैसला किया और उस ऑफर को ठुकरा दिया.
मैदान से कॉरपोरेट डेस्क तक का सफर
किस्मत का खेल देखिए, जिस खिलाड़ी के इशारों पर कभी क्रिकेट की गेंद घूमती थी, वह आज सिडनी में एक कंपनी में अकाउंट मैनेजर के तौर पर 9 से 5 की आम नौकरी कर रहे हैं. अगर उन्होंने उस वक्त आईपीएल का रुख किया होता, तो शायद वे आज भी किसी न किसी रूप में क्रिकेट की दुनिया से जुड़े होते. 90 के दशक और 2000 के शुरुआती दौर के क्रिकेट फैंस के लिए उन्हें एक आम डेस्क जॉब करते देखना वाकई चौंकाने वाला है. लेकिन यह ब्रेकन का सादगी भरा जीवन और जिंदगी को लेकर उनका व्यावहारिक नज़रिया ही है, जिसने उन्हें इस मोड़ पर भी मजबूती से खड़ा रखा है.