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Virender Sehwag Birthday: खराब शुरुआत से टेस्ट क्रिकेट के दिग्गज ओपनर बनने तक का सफर

Virender Sehwag Birthday: वीरेंद्र सहवाग ने खराब वनडे डेब्यू के बाद शानदार वापसी की. जानिए टेस्ट डेब्यू के शतक, मुल्तान में 309 रन, 319 की ऐतिहासिक पारी और उनके क्रिकेट करियर की पूरी कहानी.

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Last Updated: October 20, 2026 12:40:34 IST

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Virender Sehwag Career: क्रिकेट में वीरेंद्र सहवाग का नाम आते ही तेज बल्लेबाजी, चौकों-छक्कों की बरसात और गेंदबाजों पर दबाव बनाने वाला अंदाज याद आता है. दिल्ली के नजफगढ़ में 20 अक्टूबर 1978 को जन्मे सहवाग ने टेस्ट क्रिकेट में ओपनिंग की पारंपरिक सोच को बदल दिया. उनका अंतरराष्ट्रीय करियर आसान शुरुआत से नहीं चला, लेकिन लगातार बेहतर प्रदर्शन ने उन्हें भारतीय क्रिकेट के सबसे यादगार बल्लेबाजों में शामिल कर दिया.

वनडे डेब्यू में निराशा, टेस्ट में शतक से शानदार वापसी

सहवाग ने 1 अप्रैल 1999 को पाकिस्तान के खिलाफ मोहाली में वनडे क्रिकेट में पदार्पण किया. वह बल्ले से सिर्फ एक रन बना सके और गेंदबाजी में भी कोई विकेट नहीं मिला. हालांकि, यह खराब शुरुआत उनके करियर की पहचान नहीं बनी.

नवंबर 2001 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ ब्लूमफोंटेन टेस्ट में सहवाग ने पदार्पण करते हुए 105 रन बनाए. वह मूल रूप से मध्यक्रम के बल्लेबाज थे, लेकिन टेस्ट डेब्यू पर शतक लगाने के बाद कप्तान सौरव गांगुली ने उन्हें ओपनिंग की जिम्मेदारी दी. यह फैसला भारतीय क्रिकेट के लिए अहम साबित हुआ.

मुल्तान में 309 रन बनाकर रचा इतिहास

सहवाग के करियर की सबसे यादगार उपलब्धियों में मार्च 2004 में पाकिस्तान के खिलाफ मुल्तान टेस्ट की पारी शामिल है. उन्होंने 375 गेंदों पर 309 रन बनाए और टेस्ट क्रिकेट में तिहरा शतक लगाने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज बने. उनकी पारी में 39 चौके और छह छक्के शामिल थे. भारत ने यह मुकाबला पारी और 52 रन से जीता.

इस पारी के बाद सहवाग को ‘मुल्तान का सुल्तान’ कहा जाने लगा.उन्होंने दिखाया कि टेस्ट क्रिकेट में लंबी पारी खेलने के साथ-साथ आक्रामक बल्लेबाजी भी की जा सकती है

चेन्नई में 319 रन की ऐतिहासिक पारी

सहवाग ने 2008 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ चेन्नई टेस्ट में 319 रन बनाकर एक बार फिर इतिहास रचा. उन्होंने केवल 278 गेंदों में तिहरा शतक पूरा किया. यह पारी उनकी बल्लेबाजी की गति और बड़े स्कोर बनाने की क्षमता का शानदार उदाहरण बनी वह टेस्ट क्रिकेट में दो तिहरे शतक लगाने वाले चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल हो गए 

वनडे में भी दिखाया विस्फोटक अंदाज

सहवाग का जलवा सिर्फ टेस्ट तक सीमित नहीं था 2011 विश्व कप में बांग्लादेश के खिलाफ उन्होंने 175 रन बनाए। उसी साल 8 दिसंबर को इंदौर में वेस्टइंडीज के खिलाफ 219 रन की पारी खेली उस समय यह पुरुष वनडे क्रिकेट का सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर था। इस पारी में उन्होंने 25 चौके और सात छक्के लगाए

करियर के आंकड़े और विरासत

सहवाग ने भारत के लिए 104 टेस्ट में 8,586 रन बनाए, जिसमें 23 शतक और 32 अर्धशतक शामिल हैं। वनडे में उनके नाम 251 मैचों में 8,273 रन, 15 शतक और 38 अर्धशतक दर्ज हैं. उन्होंने 19 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच भी खेले 2011 विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम में उनका योगदान महत्वपूर्ण रहा। साल 2023 में उन्हें ICC हॉल ऑफ फेम में शामिल किया गया

सहवाग की खासियत यह थी कि वह गेंदबाज के नाम या प्रतिष्ठा से ज्यादा गेंद पर ध्यान देते थे. उनकी आक्रामक शैली में जोखिम था, लेकिन उसी ने उन्हें अलग पहचान दिलाई। खराब वनडे डेब्यू से लेकर टेस्ट क्रिकेट के दो तिहरे शतकों तक का सफर बताता है कि सहवाग ने भारतीय क्रिकेट को ऐसा बल्लेबाजी अंदाज दिया, जिसे आज भी प्रशंसक याद करते हैं.

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Virender Sehwag Career: क्रिकेट में वीरेंद्र सहवाग का नाम आते ही तेज बल्लेबाजी, चौकों-छक्कों की बरसात और गेंदबाजों पर दबाव बनाने वाला अंदाज याद आता है. दिल्ली के नजफगढ़ में 20 अक्टूबर 1978 को जन्मे सहवाग ने टेस्ट क्रिकेट में ओपनिंग की पारंपरिक सोच को बदल दिया. उनका अंतरराष्ट्रीय करियर आसान शुरुआत से नहीं चला, लेकिन लगातार बेहतर प्रदर्शन ने उन्हें भारतीय क्रिकेट के सबसे यादगार बल्लेबाजों में शामिल कर दिया.

वनडे डेब्यू में निराशा, टेस्ट में शतक से शानदार वापसी

सहवाग ने 1 अप्रैल 1999 को पाकिस्तान के खिलाफ मोहाली में वनडे क्रिकेट में पदार्पण किया. वह बल्ले से सिर्फ एक रन बना सके और गेंदबाजी में भी कोई विकेट नहीं मिला. हालांकि, यह खराब शुरुआत उनके करियर की पहचान नहीं बनी.

नवंबर 2001 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ ब्लूमफोंटेन टेस्ट में सहवाग ने पदार्पण करते हुए 105 रन बनाए. वह मूल रूप से मध्यक्रम के बल्लेबाज थे, लेकिन टेस्ट डेब्यू पर शतक लगाने के बाद कप्तान सौरव गांगुली ने उन्हें ओपनिंग की जिम्मेदारी दी. यह फैसला भारतीय क्रिकेट के लिए अहम साबित हुआ.

मुल्तान में 309 रन बनाकर रचा इतिहास

सहवाग के करियर की सबसे यादगार उपलब्धियों में मार्च 2004 में पाकिस्तान के खिलाफ मुल्तान टेस्ट की पारी शामिल है. उन्होंने 375 गेंदों पर 309 रन बनाए और टेस्ट क्रिकेट में तिहरा शतक लगाने वाले पहले भारतीय बल्लेबाज बने. उनकी पारी में 39 चौके और छह छक्के शामिल थे. भारत ने यह मुकाबला पारी और 52 रन से जीता.

इस पारी के बाद सहवाग को ‘मुल्तान का सुल्तान’ कहा जाने लगा.उन्होंने दिखाया कि टेस्ट क्रिकेट में लंबी पारी खेलने के साथ-साथ आक्रामक बल्लेबाजी भी की जा सकती है

चेन्नई में 319 रन की ऐतिहासिक पारी

सहवाग ने 2008 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ चेन्नई टेस्ट में 319 रन बनाकर एक बार फिर इतिहास रचा. उन्होंने केवल 278 गेंदों में तिहरा शतक पूरा किया. यह पारी उनकी बल्लेबाजी की गति और बड़े स्कोर बनाने की क्षमता का शानदार उदाहरण बनी वह टेस्ट क्रिकेट में दो तिहरे शतक लगाने वाले चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल हो गए 

वनडे में भी दिखाया विस्फोटक अंदाज

सहवाग का जलवा सिर्फ टेस्ट तक सीमित नहीं था 2011 विश्व कप में बांग्लादेश के खिलाफ उन्होंने 175 रन बनाए। उसी साल 8 दिसंबर को इंदौर में वेस्टइंडीज के खिलाफ 219 रन की पारी खेली उस समय यह पुरुष वनडे क्रिकेट का सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर था। इस पारी में उन्होंने 25 चौके और सात छक्के लगाए

करियर के आंकड़े और विरासत

सहवाग ने भारत के लिए 104 टेस्ट में 8,586 रन बनाए, जिसमें 23 शतक और 32 अर्धशतक शामिल हैं। वनडे में उनके नाम 251 मैचों में 8,273 रन, 15 शतक और 38 अर्धशतक दर्ज हैं. उन्होंने 19 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच भी खेले 2011 विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम में उनका योगदान महत्वपूर्ण रहा। साल 2023 में उन्हें ICC हॉल ऑफ फेम में शामिल किया गया

सहवाग की खासियत यह थी कि वह गेंदबाज के नाम या प्रतिष्ठा से ज्यादा गेंद पर ध्यान देते थे. उनकी आक्रामक शैली में जोखिम था, लेकिन उसी ने उन्हें अलग पहचान दिलाई। खराब वनडे डेब्यू से लेकर टेस्ट क्रिकेट के दो तिहरे शतकों तक का सफर बताता है कि सहवाग ने भारतीय क्रिकेट को ऐसा बल्लेबाजी अंदाज दिया, जिसे आज भी प्रशंसक याद करते हैं.

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