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कौन थे बाबा बुल्ले शाह? जिनकी मजार पर असामाजिक तत्वों ने की तोड़फोड़

Mussoorie Bulleh Shah Mazar: उत्तराखंड के मसूरी में बाबा बुल्ले शाह की मजार पर असामाजिक तत्वों द्वारा तोड़फोड़ करने की जानकारी सामने आई है. जिसका वीडियो काफी तेजी से वायरल हो रहा है. मामला सामने आने के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है.

Mussoorie Bulleh Shah Mazar: उत्तराखंड के मसूरी में सूफी कवि बाबा बुल्ले शाह की मजार पर असामाजिक तत्वों ने तोड़फोड़ कर दी है. जिसके बाद इस पूरी घटना का एक वीडियो काफी तेजी से वायरल हो रहा है. जिसमें कुछ लोग धार्मिक नारा लगाते हुए मजार में तोड़फोड़ करते हुए नजर आ रहे हैं. इस पूरे मामले पर उत्तराखंड की धामी सरकार ने कार्रवाई करनी शुरू कर दी है. पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है.

इसके अलावा, वीडियो सबूतों के आधार पर अन्य अज्ञात लोगों की पहचान की जा रही है. घटना के बाद मौके पर पुलिस तैनात की गई और पुलिस और प्रशासन ने मुख्य गेट पर ताला लगा दिया.

क्या है पूरा मामला? (What is the whole story?)

रविवार को मसूरी के स्कूल में बुल्ले शाह की दरगाह को अपवित्र करने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. वायरल हो रहे इस वीडियो में कुछ लोग हथौड़ों और दूसरे हथियारों से दरगाह को तोड़ते हुए “जय श्री राम” के नारे लगाते दिख रहे हैं. इस वीडियो के बाद मुस्लिम समुदाय द्वारा जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया. अब पुलिस की कड़ी कार्रवाई के कारण किसी को भी दरगाह के अंदर जाने की इजाजत नहीं है.

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कौन थे बाबा बुल्ले शाह? (Who was Baba Bulleh Shah?)

बाबा बुल्ले शाह जो पंजाब के 18वीं सदी के एक प्रभावशाली सूफी कवि थे, उन्होंने अपनी गहरी और सार्वभौमिक कविताओं से एक स्थायी प्रभाव छोड़ा. उनकी कविता प्यार, आध्यात्मिकता और इंसानी अनुभव जैसे विषयों को एक्सप्लोर करती है, सामाजिक मान्यताओं को चुनौती देती है और एकता को बढ़ावा देती है. बुल्ले शाह, जिन्हें अक्सर प्यार से बाबा बुल्ले शाह कहा जाता है, 17वीं सदी के एक जाने-माने सूफी कवि, दार्शनिक और आध्यात्मिक गुरु थे. उनका जन्म 1680 के आस-पास मुगल साम्राज्य (आज के पाकिस्तान) की सीमाओं के अंदर, पंजाब के उच में सैयद अब्दुल्ला शाह कादरी के रूप में हुआ था.

पंजाबी साहित्य में बाबा बुल्ले शाह का महत्वपूर्ण स्थान है (Baba Bulleh Shah holds an important place in Punjabi literature)

पंजाबी साहित्य में उनका एक महत्वपूर्ण स्थान है और उन्हें अक्सर “पंजाबी ज्ञानोदय का जनक” कहा जाता है. साहित्यिक दुनिया में उनका योगदान सिर्फ ऐतिहासिक संदर्भ तक ही सीमित नहीं है, यह पूरे दक्षिण एशिया में आज भी गहराई से महसूस किया जाता है. बुल्ले शाह की कविता, जो अपनी आध्यात्मिक समझ और तीखी सामाजिक टिप्पणी के लिए जानी जाती है, स्थायी ज्ञान देती है और मानवीय स्वभाव और आध्यात्मिकता की गहरी समझ को दर्शाती है. 

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Sohail Rahman

सोहेल रहमान, जो पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्हें राजनीति और खेल के मुद्दे पर लिखना काफी पसंद है. इसके अलावा, देश और दुनिया की खबरों को सरल और आम बोलचाल की भाषा में लोगों तक पहुंचाने का माद्दा रखते हैं. ITV Network में 24 अगस्त, 2024 से अपनी सेवा दे रहे हैं. इससे पहले, इंशॉट्स में करीब 5 साल अपनी सेवा दी है.

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