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FAQ Explainer: च्युइंग गम वेज है या नॉनवेज? यह रबर से बनती है या प्लास्टिक से, अगर पेट में चली जाए तो क्या होगा

Chewing Gum: ज्यादातर लोगों में च्युइंग चबाने की आदत होती है. यह चाय-पान की दुकान से लेकर किराने तक की दुकान पर आसानी से मिल जाती है. इसे चबाने से कई स्वास्थ्य लाभ भी होते हैं. लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर च्युइंग गम किस चीज से बनता है? अगर च्युइंग गम गलती से निगल लिया तो क्या हो सकता है? आइए जानते हैं इस बारे में-

Chewing Gum: ज्यादातर लोगों में च्युइंग चबाने की आदत होती है, चाहें वो बच्चे हों या फिर बड़े. कुछ लोग इसको फैशन और स्टाइल के लिए खाते हैं. चाय-पान की दुकान से लेकर किराने तक की दुकान पर च्युइंग गम खूब बिकता है. एक्ट्रेस से लेकर स्पोट्सपर्सन जैसे सेलेब्रिटी अक्सर च्युइंग गम चबाते दिख जाते हैं. लेकिन हकीकत ये हैं कि इससे कई स्वास्थ्य लाभ भी होते हैं. इसको नियमित चबाने से वजन कम होने और मूड ठीक रहने में मदद मिलती है.  लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर च्युइंग गम किस चीज से बनता है? ये इतना लचीला क्यों होता है? अगर च्युइंग गम गलती से निगल लिया तो क्या हो सकता है? आइए जानते हैं इस बारे में-  

च्युइंग गम किस चीज से बनाई जाती है?

कई लोगों का सवाल होता है कि आखिर च्युइंग गम किस चीज से बनकर तैयार होती है? बता दें कि, च्युइंग गम में मुख्य रूप से चार चीजें यूज की जाती हैं. इसमें पहला- गम बेस, दूसरा- स्वीटनर, तीसरा- फ्लेवर और चौथा प्रिजर्वेटिव. पहले बात करते हैं च्युइंग के गम बेस की, जिसमें अमूमन तीन चीजें होती हैं- पॉलिमर, प्लास्टिसाइजर और रेजिन. पॉलिमर में इलास्टोमर्स भी शामिल हैं जिसकी वजह से च्युइंग गम लचीला और चिपचिपा होता है. BBC Science Focus की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकतर च्युइंग गम में वनस्पति तेल और लेसिथिन जैसी चीजें भी मिलाई जाती हैं, ताकि गम को नरम और चबाने योग्य रखा जा सके. इसके बाद बारी आती है स्वीटनर की.

च्युइंग गम में मिठास कहां से आई?

रिपोर्ट के मुताबिक, च्युइंग गम में आर्टिफिशियल मिठास लाने के लिए कई चीजें इस्तेमाल की जाती हैं. जैसे- डेक्सट्रोज, ग्लूकोज या शुगर सिरप. इसके बाद बारी आती है फ्लेवर की. च्युइंग गम को अलग-अलग फ्लेवर देने के लिए इसमें आर्टिफिशियल फ्लेवर पाउडर, फ्लेवरिंग एजेंट्स और इमल्सीफायर्स जैसी चीजें मिलाई जाती हैं. सबसे आखिर में च्युइंग गम को लंबे समय तक इस्तेमाल करने योग्य बनाए रखने के लिए इसमें Butylated hydroxytoluene जैसे प्रिजर्वेटिव्स (संरक्षक तत्व) मिलाए जाते हैं. च्युइंग गम एक तरीके वेज (Veg) की कैटेगरी में आता है.

कहां से आया च्युइंग गम

च्युइंग गम का इतिहास 9000 साल से भी पुराना है. history.com की एक रिपोर्ट के मुताबिक कई ऐसे सबूत हैं जिनसे पता लगता है कि लगभग 9,000 साल पहले उत्तरी यूरोप के लोग बर्च के पेड़ की छाल से निकलने वाला एक तरह का चिपचिता तार चबाया करते थे. कई बार इसका इस्तेमाल दांत दर्द जैसी समस्याओं से बचने के लिए करते थे और कई बार आनंद के लिए. इसी तरह अमेरिका के प्राचीन माया लोग भी एक पदार्थ चबाते थे, जिसे चिकल कहा जाता था और यह सपोडिला पेड़ से निकाला जाता था. मनोवविज्ञानी और “चिकल: द च्यूइंग गम ऑफ द अमेरिका” की लेखिका जेनिफर पी. मैथ्यूज के मुताबिक उत्तरी मेक्सिको के एज़्टेक कबीले के लोग भी चिकल का उपयोग करते थे. इस कबीले में सिर्फ बच्चे और अविवाहित महिलाएं इसे सार्वजनिक रूप से चबा सकती थीं. आधुनिक च्युइंग गम को इसी का परिष्कृत रूप माना जाता है.

च्युइंग गम फायदेमंद कैसे?

कई डॉक्टर च्युइंग गमको दवा की तरह रिकमेंड भी करते हैं. डॉक्टरों का मानना है कि च्युइंग गम दांत दर्द से लेकर मुंह की एक्सरसाइज के लिए सबसे बेहतरीन साधन है. इसके अलावाच्युइंग गम स्ट्रेस यानी तनाव दूर करने में भी मदद करता है और जबड़े को मजबूत बनाता है.

च्युइंग गम निगलने से क्या हो सकता है?

च्युइंग गम ऐसा पदार्थ है जो पच नहीं सकता. हेल्थ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि अगर आपने गलती से एकाध बार च्युइंग गम निगल लिया तो चिंता करने की ज़रूरत नहीं है. यह आमतौर पर आपके पाचन तंत्र से होकर मल के जरिये 40 घंटे में शरीर से निकल जाता है. हालांकि अगर कई बार च्युइंग निगल लिया है तो परेशानी भी हो सकती है. पेट से जुड़ी कई समस्याएं हो सकती हैं.

एक्सपर्ट्स कहते हैं कि च्युइंग गम निगलने से पेट में दर्द, उल्टी, जी मिचलाना जैसी समस्याएं हो सकती हैं. इसके अलावा आंतों में ब्लॉकेज का खतरा भी रहता है. अगर बहुत ज़्यादा च्युइंग गम निगल ली जाए, तो बच्चों में दम घुटने का खतरा भी हो सकता है. डॉक्टर्स कहते हैं कि अगर आपने गलती से च्युइंग गम निगल लिया है तो खूब पानी पीएं और फाइबर युक्त खाना खाएं. ताकि पेट साफ रहे और च्युइंग गम मल के रास्ते आपके शरीर से बाहर निकल जाए.

Lalit Kumar

9 साल से ज्यादा के लंबे करियर में ललित कुमार ने दैनिक जागरण, दैनिक भाष्कर, हिन्दुस्तान और नेटवर्क 18 जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, समाज, कला व संस्कृति के अलावा जटिल स्वास्थ्य विषयों और जीवनशैली से जुड़ी समस्याओं का विश्लेषण उनकी विशेषता है। खबरों का डीप एनालिसिस उनकी पहचान है। हर खबर को आसान भाषा में पाठक तक पहुंचाना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। वर्तमान में वे देश के सबसे बड़े मीडिया संस्थानों में एक इंडिया न्यूज (डिजिटल) में लाइफस्टाइल, हेल्थ, धर्म और एस्ट्रो टीम का हिस्सा हैं।

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