Bihar Sugar Price Hike: चीनी की बढ़ती कीमत ने इन दिनों आम लोगों के घरेलू बजट पर असर डालना शुरू कर दिया है. बताया जा रहा है कि करीब 15 दिन पहले जहां बाजार में चीनी 48 से 50 रुपये किलो के आसपास मिल रही थी, वहीं अब कई जगह इसकी कीमत 65 रुपये प्रति किलो से ऊपर पहुंच गई है. रोजमर्रा की जरूरत वाली चीज की कीमत में अचानक आए इस उछाल के बीच बिहार के मंत्री श्रवण कुमार का एक बयान सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है. चीनी के दाम बढ़ने को लेकर जब मीडिया ने उनसे सवाल किया तो मंत्री ने इसे लेकर ज्यादा चिंता नहीं जताई. उन्होंने कहा कि लोग वैसे भी चीनी कम खा रहे हैं और आजकल कई लोग डायबिटीज से परेशान हैं. उनके इसी बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसके बाद विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है.
15 दिन में 48-50 से 65 रुपये के पार पहुंची चीनी
चीनी की कीमतों में तेजी का असर सीधे तौर पर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जिनके महीने के राशन में चीनी नियमित रूप से शामिल होती है. दावा किया जा रहा है कि करीब दो सप्ताह पहले तक चीनी 48 से 50 रुपये किलो के आसपास उपलब्ध थी, लेकिन अब इसकी कीमत 65 रुपये प्रति किलो से भी ज्यादा बताई जा रही है. कीमत में इस तरह की बढ़ोतरी से चाय से लेकर मिठाई और घर में इस्तेमाल होने वाली दूसरी चीजों की लागत पर भी असर पड़ सकता है. ऐसे में लोगों की नजर इस बात पर है कि चीनी के दामों में यह तेजी कितने समय तक बनी रहती है.
लोग वैसे भी कम खा रहे
पटना में गुरुवार को मीडिया ने बिहार के मंत्री श्रवण कुमार से चीनी की बढ़ती कीमत को लेकर सवाल किया. इस पर उन्होंने कहा कि चीनी की कीमत को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है. मंत्री ने अपने जवाब में कहा कि लोग वैसे भी चीनी कम खा रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि आजकल लोग मिठाई कम खाते हैं और कई लोग स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं. इसी दौरान उन्होंने डायबिटीज का भी जिक्र किया. उनका यह बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसको लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं.
बयान पर मचा बवाल
वायरल वीडियो में श्रवण कुमार कहते नजर आ रहे हैं कि आजकल लोग डायबिटीज के शिकार हो रहे हैं और ऐसे में चीनी के दाम बढ़ने से ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा. उनका कहना था कि लोग चीनी का इस्तेमाल पहले की तुलना में कम कर रहे हैं. मंत्री के इस बयान को लेकर राजनीतिक बहस भी शुरू हो गई है. जहां उनके समर्थक इसे सामान्य टिप्पणी बता रहे हैं, वहीं विपक्षी नेताओं ने इसे महंगाई से जुड़े सवाल को हल्के में लेने वाला बयान बताया है.