Chhattisgarh High Court: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रेप के मामले में एक चौंकाने वाली सजा सुनाई है. जिसमें अपीलकर्ता को मिली रेप की सजा को रेप की कोशिश की सजा में तब्दील कर दी है. इस मामले में कोर्ट ने जो टिप्पणी की है. वो पूरे देश में चिंता का विषय बना हुआ है.
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने रेप की सजा को बदला
Chhattisgarh Rape Case: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सोमवार (16 फरवरी, 2026) को फैसला सुनाया कि वजाइना पर मेल ऑर्गन रखना और फिर बिना पेनिट्रेशन के इजैक्युलेट करना इंडियन पीनल कोड (IPC) के सेक्शन 375 के तहत ‘रेप’ नहीं कहा जा सकता, बल्कि ‘रेप की कोशिश’ माना जाएगा और यह IPC की धारा 376/ 511 के तहत सजा होगी. रेप की सजा को रेप की कोशिश में बदलते हुए जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की बेंच ने कहा कि अश्लील हमले को अक्सर रेप की कोशिश में बदल दिया जाता है. यह नतीजा निकालने के लिए कि आरोपी के व्यवहार से पता चलता है कि वह सभी विरोध के बावजूद अपनी इच्छा पूरी करने का पक्का इरादा रखता है, सबूत होना चाहिए.
जैसा कि ऊपर कहा गया है कि रेप के जुर्म के लिए इजैक्युलेट नहीं, बल्कि पेनिट्रेशन एक जरूरी शर्त है. बिना पेनिट्रेशन के इजैक्युलेट करना रेप की कोशिश है, न कि रेप.
सरकारी वकील के बयान के मुताबिक, 21 मई, 2004 को अपील करने वाला पीड़ित को जबरदस्ती अपने घर ले गया, जहां उसने उसके कपड़े उतार दिए और उसकी मर्जी के खिलाफ उसके साथ सेक्स किया. फिर उसने उसे अपने घर के एक कमरे में बंद कर दिया, उसके हाथ-पैर बांध दिए और उसके मुंह में कपड़ा ठूंस दिया. पूरा मामला सामने आने के बाद FIR दर्ज की गई और जांच के बाद अपील करने वाले के खिलाफ चार्जशीट फाइल की गई. धमतरी के एडिशनल सेशन्स जज ने उसे इंडियन पेनल कोड की धारा 376(1) और 342 के तहत दोषी पाया. सजा के आदेश और उसके तहत दी गई सजा को चुनौती देते हुए अपील करने वाले ने हाई कोर्ट में अपील की.
ट्रायल के दौरान पीड़िता ने दूसरी बातों के साथ-साथ यह भी कहा कि अपील करने वाले ने अपना प्राइवेट पार्ट उसकी वजाइना में डाला. हालांकि, उसने आगे स्पष्ट करते हुए कहा कि अपील करने वाले ने अपना प्राइवेट पार्ट लगभग 10 मिनट तक उसकी वजाइना पर रखा, लेकिन डाला नहीं. इस बात की पुष्टि उसकी मां और दादा की गवाही से हुई. इसके अलावा, पीड़िता की मेडिकल जांच करने वाले डॉक्टर ने पाया कि उसका हाइमन सही सलामत है और वह रेप के जुर्म पर कोई पक्की राय नहीं दे सका.
हालांकि, क्रॉस-एग्जामिनेशन के दौरान उसने पार्शियल पेनिट्रेशन की संभावना दोहराई. उसने वुल्वा में लालिमा और सफेद लिक्विड निकलने की बात कही, जिससे पार्शियल पेनिट्रेशन का संकेत मिलता है. इसके अलावा, पीड़िता के अंडरगारमेंट से ह्यूमन स्पर्म मिला.
दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने पीड़िता के अलग-अलग बयानों पर जोर दिया. एक हिस्से में उसने पेनिट्रेशन की बात कही, लेकिन अपनी गवाही के दूसरे हिस्से में उसने कहा कि अपील करने वाले ने बिना पेनिट्रेशन के सिर्फ 10 मिनट के लिए अपना प्राइवेट पार्ट उसकी वजाइना पर रखा.इसके अलावा, कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि पीड़िता के सबूत का यह वर्शन मेडिकल रिपोर्ट Ex. P/12 से मेल खाता है, जिसमें डॉक्टर (PW 11) ने अपनी राय दी कि हाइमन नहीं फटी और वजाइना में सिर्फ 1 उंगली का सिरा ही डाला जा सकता है, इसलिए थोड़ा पेनिट्रेशन होने की संभावना है.
डॉक्टर ने अपने सबूत में यह भी कहा कि पीड़िता ने अपने प्राइवेट पार्ट में दर्द की शिकायत की. वुल्वा में लाली थी और उसमें सफ़ेद लिक्विड था, जिससे बिना किसी शक के यह साबित हो गया कि अपील करने वाले ने पीड़िता के साथ रेप किया.
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