<

जब बस कंडक्टर की वजह से गिर गई बिहार की सरकार, 11 विधायकों ने ले लिया समर्थन वापस; कौन थे सीएम?

Daroga Prasad Rai: बिहार में 1970 में एक दलित बस कंडक्टर का निलंबन वापस नहीं लेने की वजह से दारोगा प्रसाद यादव की सरकार गिर गई थी. आइए जानते हैं कि पूरा मामला क्या है?

Daroga Prasad Rai: बिहार में विधानसभा चुनाव भले ही खत्म हो गया हो, लेकिन बिहार में राजनीति कभी खत्म नहीं होती है. बिहार में नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है. बिहार की राजनीति (Bihar Politics) की बात करें इसका इतिहास दिलचस्प किस्सों से भरा हुआ है. इसी कड़ी में आज हम आपको बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री दारोगा प्रसाद राय का एक अनोखा किस्सा सुनाएंगे.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दारोगा प्रसाद राय के लिए एक सरकारी बस कंडक्टर का निलंबन रद्द करने से इनकार करना एक भारी भूल साबित हुई. जो एक ऐसी भूल साबित हुई. जिसकी वजह से आखिरकार उनकी सरकार गिर गई.

दारोगा प्रसाद राय का कार्यकाल

दारोगा प्रसाद राय ने साल 1970 में महज 10 महीने के लिए मुख्यमंत्री का कार्यभार संभाला, जो एक बेहद कम बहुमत वाली सरकार का नेतृत्व कर रहे थे. ऐसी सरकार जहां हर एक विधायक की राय का बहुत ज़्यादा महत्व था. इस नाज़ुक राजनीतिक माहौल के बीच बिहार राज्य परिवहन निगम में कार्यरत एक आदिवासी (जनजातीय) बस कंडक्टर को निलंबित कर दिया गया. यह मामला ऊपरी तौर पर तो मामूली लग रहा था, लेकिन इसके राजनीतिक परिणाम बहुत गहरे निकले.

बागुन सुम्ब्रुई ने लिया कंडक्टर का पक्ष

जब इस मामले ने तूल पकड़ा तो झारखंड पार्टी के एक प्रमुख और प्रभावशाली नेता बागुन बागुन सुम्ब्रुई ने उस कंडक्टर का पक्ष लिया और उसके निलंबन को तत्काल रद्द करने की मांग की. जब सरकार ने इस मांग को मानने में इन्कार कर दिया तो बागुन सुम्ब्रुई नाराज हो गए. दारोगा प्रसाद राय के इस फैसले के बाद उन्होंने अपने साथ जुड़े 11 विधायकों का समर्थन वापस ले लिया. इस कदम के साथ ही विधानसभा में दारोगा प्रसाद राय की सरकार की संख्या बल में भारी गिरावट आ गई और कांग्रेस पार्टी अपना बहुमत साबित करने में नाकाम रही.

अस्थिर राजनीति का प्रतीक है यह घटना

यह पूरी घटना उस दौर की अस्थिर राजनीति का प्रतीक बन गई. एक ऐसा समय जब सरकारें अक्सर देखने में मामूली लगने वाले मुद्दों पर भी गिर जाया करती थीं. 1970 में कांग्रेस की इस हार के बाद कर्पूरी ठाकुर सत्ता में आए, जिसने बिहार के राजनीतिक इतिहास में एक नए अध्याय की शुरुआत की.

इस घटना से एक बात तो साफ होती है कि राजनीति के लिए कोई भी मुद्दा छोटा नहीं होता है. सत्ता पर बैठे लोगों को जो मुद्दा छोटा लगता है. अक्सर वो मुद्दा सरकार के लिए नासूर बन जाती है.

Sohail Rahman

सोहेल रहमान, जो पिछले 6 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्हें राजनीति और खेल के मुद्दे पर लिखना काफी पसंद है. इसके अलावा, देश और दुनिया की खबरों को सरल और आम बोलचाल की भाषा में लोगों तक पहुंचाने का माद्दा रखते हैं. ITV Network में 24 अगस्त, 2024 से अपनी सेवा दे रहे हैं. इससे पहले, इंशॉट्स में करीब 5 साल अपनी सेवा दी है.

Share
Published by
Sohail Rahman

Recent Posts

370 रुपये की बिरयानी विवाद पर माफी मांगकर भी नहीं बच पाए प्रणित मोरे, कुणाल कामरा के तंज ने बटोरी सुर्खियां

Pranit More Controversy: हाल ही में स्टैंडअप कॉमेडियन प्रणित मोरे ने अपने शो में 370…

Last Updated: June 14, 2026 17:35:59 IST

IND vs PAK: भारत-पाकिस्तान के बीच फिर नहीं होगा हैंडशेक? हरमनप्रीत कौर बोलीं- हमारा ध्यान…

India W vs Pakistan W: महिला टी20 विश्व कप 2026 में पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले…

Last Updated: June 14, 2026 13:52:04 IST

Shot Of The Day: केएल राहुल ने खेला ऐसा जादुई शॉट, गौतम गंभीर की खुली रह गई आंखें, रिएक्शन वायरल

Shot Of The Day: भारत बनाम अफगानिस्तान के पहले वनडे में केएल राहुल ने नाबाद…

Last Updated: June 14, 2026 12:40:49 IST

पीएम मोदी के 12 साल: स्वामित्व योजना के दूसरे चरण में गुजरात नंबर 1, देश के आधे से अधिक प्रॉपर्टी कार्ड गुजरात में बने

पीएम मोदी के 12 साल: स्वामित्व योजना के दूसरे चरण में गुजरात नंबर 1, देश…

Last Updated: June 13, 2026 18:32:54 IST

370 की बिरयानी विवाद के बीच प्रणित मोरे के बचाव में आईं कुनिका सदानंद, बोलीं- उम्मीद है लोग उन्हें माफ कर देंगे

Pranit More: स्टैंडअप कॉमेडियन प्रणित मोरे इन दिनों 370 रुपये की बिरयानी को लेकर विवादों…

Last Updated: June 13, 2026 17:30:40 IST

विश्व पर्यावरण दिवस पर पी. जे. सखिया चैरिटेबल ट्रस्ट ने सरथाणा नेचर पार्क में लगाए पौधे

सूरत (गुजरात) [भारत], 4 जून: विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर सखिया स्किन क्लिनिक द्वारा…

Last Updated: June 13, 2026 16:52:14 IST