DDCA News: डीडीसीए के एपेक्स काउंसिल से जुड़े 'कॉन्फ्लिक्ट ऑफ़ इंटरेस्ट' (हितों के टकराव) को लेकर नए सवाल उठ रहे हैं. आंतरिक सूत्रों के अनुसार 'कॉन्फ्लिक्ट ऑफ़ इंटरेस्ट' के नियमों को लागू करने को लेकर असहज सवाल उठाए हैं. हालांकि, indianews इसकी पुष्टि नहीं करता है.
डीडीसीए विवाद
DDCA: आईपीएल मैच के कॉम्प्लिमेंट्री पास की ब्लैक मार्केटिंग का विवाद अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि दिल्ली और डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन (डीडीसीए) एक और विवाद में फंसता हुआ नजर आ रहा है. अब एपेक्स काउंसिल के डायरेक्टर नवदीप मल्होत्रा से जुड़े ‘कॉन्फ्लिक्ट ऑफ़ इंटरेस्ट’ (हितों के टकराव) के कथित आरोपों को लेकर नए सवाल उठ रहे हैं. आंतरिक सूत्रों के अनुसार रिकॉर्ड में मौजूद दस्तावेज बताते हैं कि अक्टूबर 2021 में डीडीसीए एपेक्स काउंसिल के लिए चुने जाने से पहले नवदीप मल्होत्रा डीडीसीए से जुड़े ‘रघबीर विलोअर्स क्रिकेट क्लब’ के सेक्रेटरी के तौर पर काम कर रहे थे. हालांकि, indianews इसकी पुष्टि नहीं करता है.
दावा है कि मल्होत्रा के चुने जाने से पहले 2019-20 और 2021-22 सीजन के क्लब रिकॉर्ड में सेक्रेटरी के तौर पर उनका नाम और हस्ताक्षर मौजूद हैं. हालांकि, अक्टूबर 2021 में DDCA चुनाव के तुरंत बाद क्लब के पदाधिकारियों की आधिकारिक सूची में मल्होत्रा का नाम नहीं था. कागजों पर वह अब क्लब के मैनेजमेंट से नहीं जुड़े थे. लेकिन, दिल्ली क्रिकेट जगत के कई सदस्यों का दावा है कि यह बदलाव सिर्फ कागजों पर था और क्लब पर अब भी उनका प्रभाव बना हुआ है.
इस मामले ने एक बार फिर DDCA के गवर्नेंस स्टैंडर्ड्स पर सवाल खड़े कर दिए हैं और एसोसिएशन के भीतर ‘कॉन्फ्लिक्ट ऑफ़ इंटरेस्ट’ के नियमों को लागू करने को लेकर असहज सवाल उठाए हैं. क्लब और ‘नवटेक एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड’ के बीच करीबी संबंधों पर भी सवाल उठ रहे हैं. दावा है कि यह कंपनी नवदीप मल्होत्रा की है.
सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रिकॉर्ड से कंपनी की कॉन्टैक्ट डिटेल्स और क्लब द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली डिटेल्स के बीच समानताएं दिखती हैं. यहां तक कि आरोप है कि मौजूदा सदस्य मल्होत्रा की कंपनियों के कर्मचारी हैं, जिससे कुछ सदस्यों को यह शक हो रहा है कि अधिकारी और उससे जुड़े क्लब के बीच का अलगाव सिर्फ नाममात्र का है. इस विवाद ने इसलिए भी ज्यादा ध्यान खींचा है क्योंकि कुछ महीने पहले DDCA के व्हाट्सएप ग्रुप्स में एक ऑडियो क्लिप खूब वायरल हुई थी.

हालांकि, इन आरोपों पर कोई औपचारिक नतीजा नहीं निकला है, लेकिन इस रिकॉर्डिंग ने दिल्ली क्रिकेट में काफी बहस छेड़ दी और क्रिकेट एडमिनिस्ट्रेशन में पारदर्शिता को लेकर लोगों के मन में शंका पैदा हो गई हैं. इसको लेकर जो भी सवाल उठाए जा रहे हैं, उसे नजरअंदाज करना मुश्किल है, खासकर इसलिए क्योंकि नवदीप मल्होत्रा DDCA लीग कमेटी के कन्वीनर हैं. यह कमेटी दिल्ली की लीग क्रिकेट और जल्द ही शुरू होने वाली दिल्ली प्रीमियर लीग के आयोजन में अहम भूमिका निभाती है. अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो सदस्य यह सवाल उठा सकते हैं कि वे इतने अहम पद पर क्यों बने हुए हैं.
मौजूदा विवाद की तुलना DDCA ओम्बड्समैन के सामने पूर्व वाइस-प्रेसिडेंट शशि खन्ना और पूर्व सेक्रेटरी सिद्धार्थ साहिब सिंह के खिलाफ ‘हितों के टकराव’ (conflict-of-interest) के मामलों से की जा रही है. उन मामलों में कार्यवाही के दौरान अधिकारियों पर रोक लगाने वाले अंतरिम आदेश जारी किए गए थे. सदस्य अब यह पूछ रहे हैं कि क्या मौजूदा मामले में भी वैसे ही नियम और जांच प्रक्रिया अपनाई जाएगी.
DDCA के अंदर जिस सवाल पर बहस हो रही है, वह सिर्फ़ एक व्यक्ति के बारे में नहीं है, बल्कि इस बारे में है कि क्या एसोसिएशन अपने ‘हितों के टकराव’ वाले नियमों को बिना किसी अपवाद के और समान रूप से लागू करने को तैयार है. जैसे-जैसे यह विवाद बढ़ रहा है, कई लोगों को डर है कि लगातार अनिश्चितता और चुनिंदा तरीके से नियम लागू करने के आरोपों से DDCA की छवि और इसके प्रशासन पर भरोसे को और नुकसान पहुंच सकता है. दिल्ली क्रिकेट पहले से ही कई सालों से प्रशासन से जुड़े विवादों से जूझ रहा है, इसलिए सदस्य स्पष्टता, पारदर्शिता और उठाए जा रहे मुद्दों की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं.
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