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जनकपुरी के बाद अब रोहिणी में दुखद घटना, खुला मेनहोल एक गरीब परिवार के लिए बना काल!

दिल्ली के रोहिणी सेक्टर-32 में एक खुले मेनहोल (Open Man Hole) में गिरने से 32 साल के प्रवासी मजदूर (Migrant Laborer) दर्दनाक मौत हो गई. इस घटना के बाद से उनके परिवार में मातम (Mourning in the family) छा गया है.

Delhi Manhole Case: हाल ही में देश की राजधानी दिल्ली के जनकपुरी इलाके में हुई गड्ढे वाली घटना ने हर किसी को पूरी तरह से हैरान किया था. हांलाकि, इस हादसे को हुए ज्यादा दिन हुए नहीं कि अब एक और ताजा मामला सामने देखने को मिल रहा है.  दिल्ली के बेगमपुर इलाके में डीडीए (DDA) की खाली जमीन पर बना एक खुला मेनहोल एक गरीब परिवार के लिए काल बन गया इसके बारे में उन्होंने कभी सोचा नहीं होगा. आखिर क्या है पूरा मामला जानने के लिए पूरी खबर पढ़िए.

क्या है चौंकाने वाली घटना?

राजधानी दिल्ली के बेगमपुर इलाके में डीडीए (DDA) की खाली जमीन पर बना एक खुला मेनहोल ने गरीब परिवार की खुशियों को हमेशा के लिए छीन लिया. दरअसल, समस्तीपुर जिले के वारिसनगर थाना क्षेत्र के रहने वाले बिरजू राय सोमवार रात जब अपने साथी के साथ लौट रहे थे, तभी संतुलन बिगड़ने की वजह से खुले गटर में गिर गए. इस घटना के बाद सूचना पर पहुंची पुलिस ने मृतक के शव को बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया. 

संघर्षों से भरा था मृतक का जीवन

मृतक बिरजू की कहानी गरीबी और कड़े संघर्ष की दास्तां को बयां करती है. जहां, केवल 10 साल की उम्र में ही उन्होंने अपने पिता को खो दिया था. इसके अलावा घर की खराब हालत होने की वजह से उन्होंने अपनी पढ़ाई को पूरी तरह से छोड़ ही दिया था. 

तो वहीं, पिछले कुछ 8 सालों से वह दिल्ली में मजदूरी के सहारे ही अपनी बूढ़ी मां, पत्नी और तीन छोटे बच्चों का पेट पाल रहे थे. इस दौरान मृतक की पत्नी ने जानकारी देते हुए बताया कि बिरजू ने घटना वाले दिन ही 5 हजार रुपये मजदूरी मिलने की बात कही थी, लेकिन किसे पता था कि वही उनकी आखिरी बातचीत होगी.

एक झटके में उजड़ गया पूरा परिवार

तो वहीं, उनके के निधन की खबर मिलते ही समस्तीपुर के शादीपुर बथनाहा गांव में पूरी तरह से मातम छा गया है. जहां, परिवार के पास खेती के लिए जमीन भी नहीं है, जिसकी वजह से बिरजू का दिल्ली में कमाना ही उनके अस्तित्व का आधार था, तो वहीं, दूसरी तरफ उनकी बूढ़ी मां, जिन्होंने पति की मौत के बाद मेहनत-मजदूरी कर बेटे को बड़ा किया था, आज पूरी तरह बेसहारा हो गई हैं, और तीन छोटे बच्चों के सिर से पिता का साया उठने के बाद भविष्य पर अंधकार छा गया है. 

प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल

फिलहाल, इस घटना के बाद से लोगों में जमकर आक्रोश देखने को मिल रहा है. खाली इलाकों में खुले मेनहोल मौत के जाल तेजी से बनते जा रहे हैं. ग्रामीणों और परिजनों ने अब सरकार से मुआवजे और बच्चों के पालन-पोषण के लिए सहायता की सख्त से सख्त मांग की है. 

Darshna Deep

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Darshna Deep

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