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लाठीचार्ज से पैलेट गन तक… जंतर-मंतर प्रोटेस्ट मामले में SC का बड़ा कदम, 5 सदस्यीय कमेटी खोलेगी किसका राज़?

SC on Jantar Mantar Protest: जंतर मंतर पर छात्र प्रदर्शन और पुलिस एक्शन की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी की अगुवाई में 5 सदस्यीय कमेटी गठित की, अगली सुनवाई 10 सितंबर को.

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Last Updated: 2026-08-20 17:56:36

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सुप्रीम कोर्ट ने 20 जुलाई को जंतर मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन और उसके बाद हुई पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच के लिए 5 सदस्यीय समिति का गठन किया है. इस समिति की अगुवाई सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी करेंगे. यह कमेटी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस, पैरामिलिट्री फोर्स और अन्य सुरक्षा बलों द्वारा कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए अत्यधिक बल की जांच करेगी. मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर 2026 को तय की गई है.

समिति में कौन-कौन शामिल हैं?

  • जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी (रिटायर्ड): समिति के अध्यक्ष
  • जस्टिस रवि शंकर झा: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश
  • जस्टिस शालिंदर कौर: दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश
  • ऋषि कुमार शुक्ला: पूर्व सीबीआई निदेशक
  • डॉ. एल.आर. बिश्नोई: मेघालय के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी)

क्या-क्या काम करेगी यह जांच कमेटी?

  • बिना किसी चेतावनी के पेलेट गन, इलेक्ट्रिक लाठी, लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के आरोपों की पड़ताल करना.
  • प्रदर्शनकारियों की जासूसी और उनके निजता के अधिकार (प्राइवेसी) के हनन के आरोपों की जांच.
  • महिला प्रदर्शनकारियों के साथ हुई हिंसा, उत्पीड़न और छेड़छाड़ के मामलों की जांच.
  • घायलों को तुरंत मेडिकल सुविधा देने और अंतरिम आर्थिक मदद पहुंचाने पर विचार करना.
  • प्रदर्शनकारियों और असामाजिक तत्वों द्वारा पुलिसकर्मियों पर किए गए हमलों की जांच.
  • सार्वजनिक और निजी संपत्ति व गाड़ियों को पहुंचे नुकसान का हिसाब लगाना.
  • ड्यूटी के दौरान घायल हुए पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों की शिकायतों को दर्ज करना.
  • कमेटी सबसे पहले महिलाओं के साथ हुई हिंसा, गंभीर चोटों और पुलिस कार्रवाई की जवाबदेही पर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी.
  • घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन फुटेज, बॉडी-वर्न कैमरा रिकॉर्डिंग और वायरलेस लॉग कमेटी को सौंपे जाएंगे.
  • पीड़ितों और गवाहों को अपनी पहचान छिपाकर शिकायत दर्ज कराने की सुविधा मिलेगी.

पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?

18 अगस्त 2026 (मंगलवार) को सुप्रीम कोर्ट ने इस उच्चस्तरीय तथ्य-अन्वेषण (फैक्टर-फाइंडिंग) समिति के गठन का फैसला लिया था.

इससे पहले हुई सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा था कि देश में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का अधिकार सभी को है. केवल प्रदर्शन होने के आधार पर लाठीचार्ज को सही नहीं ठहराया जा सकता. अदालत ने साफ कहा, “जो भी इसके लिए जिम्मेदार है, उसके लिए कोई बहाना या तर्क स्वीकार नहीं किया जाएगा. इस मामले को गंभीरता से लेते हुए इसके अंजाम तक पहुंचाया जाएगा.”

हालांकि, चीफ जस्टिस ने यह भी स्पष्ट किया कि फेस रिकग्निशन टेक्नोलॉजी (चेहरा पहचानने वाली तकनीक), निगरानी और निजता से जुड़े बड़े संवैधानिक सवालों पर फैसला अदालत खुद करेगी, न कि यह जांच समिति.

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सुप्रीम कोर्ट ने 20 जुलाई को जंतर मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन और उसके बाद हुई पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच के लिए 5 सदस्यीय समिति का गठन किया है. इस समिति की अगुवाई सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी करेंगे. यह कमेटी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस, पैरामिलिट्री फोर्स और अन्य सुरक्षा बलों द्वारा कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए अत्यधिक बल की जांच करेगी. मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर 2026 को तय की गई है.

समिति में कौन-कौन शामिल हैं?

  • जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी (रिटायर्ड): समिति के अध्यक्ष
  • जस्टिस रवि शंकर झा: पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश
  • जस्टिस शालिंदर कौर: दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश
  • ऋषि कुमार शुक्ला: पूर्व सीबीआई निदेशक
  • डॉ. एल.आर. बिश्नोई: मेघालय के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी)

क्या-क्या काम करेगी यह जांच कमेटी?

  • बिना किसी चेतावनी के पेलेट गन, इलेक्ट्रिक लाठी, लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल के आरोपों की पड़ताल करना.
  • प्रदर्शनकारियों की जासूसी और उनके निजता के अधिकार (प्राइवेसी) के हनन के आरोपों की जांच.
  • महिला प्रदर्शनकारियों के साथ हुई हिंसा, उत्पीड़न और छेड़छाड़ के मामलों की जांच.
  • घायलों को तुरंत मेडिकल सुविधा देने और अंतरिम आर्थिक मदद पहुंचाने पर विचार करना.
  • प्रदर्शनकारियों और असामाजिक तत्वों द्वारा पुलिसकर्मियों पर किए गए हमलों की जांच.
  • सार्वजनिक और निजी संपत्ति व गाड़ियों को पहुंचे नुकसान का हिसाब लगाना.
  • ड्यूटी के दौरान घायल हुए पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों की शिकायतों को दर्ज करना.
  • कमेटी सबसे पहले महिलाओं के साथ हुई हिंसा, गंभीर चोटों और पुलिस कार्रवाई की जवाबदेही पर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी.
  • घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन फुटेज, बॉडी-वर्न कैमरा रिकॉर्डिंग और वायरलेस लॉग कमेटी को सौंपे जाएंगे.
  • पीड़ितों और गवाहों को अपनी पहचान छिपाकर शिकायत दर्ज कराने की सुविधा मिलेगी.

पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?

18 अगस्त 2026 (मंगलवार) को सुप्रीम कोर्ट ने इस उच्चस्तरीय तथ्य-अन्वेषण (फैक्टर-फाइंडिंग) समिति के गठन का फैसला लिया था.

इससे पहले हुई सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा था कि देश में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का अधिकार सभी को है. केवल प्रदर्शन होने के आधार पर लाठीचार्ज को सही नहीं ठहराया जा सकता. अदालत ने साफ कहा, “जो भी इसके लिए जिम्मेदार है, उसके लिए कोई बहाना या तर्क स्वीकार नहीं किया जाएगा. इस मामले को गंभीरता से लेते हुए इसके अंजाम तक पहुंचाया जाएगा.”

हालांकि, चीफ जस्टिस ने यह भी स्पष्ट किया कि फेस रिकग्निशन टेक्नोलॉजी (चेहरा पहचानने वाली तकनीक), निगरानी और निजता से जुड़े बड़े संवैधानिक सवालों पर फैसला अदालत खुद करेगी, न कि यह जांच समिति.

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