Live TV
Search
Home > राज्य > छत्तीसगढ़ > 9 साल से बेघर मंजू की गुहार- ’76 को मिला प्लॉट, तो मेरे साथ भेदभाव क्यों?’ बिना नोटिस उजाड़ा घर, सामान भी गायब!

9 साल से बेघर मंजू की गुहार- ’76 को मिला प्लॉट, तो मेरे साथ भेदभाव क्यों?’ बिना नोटिस उजाड़ा घर, सामान भी गायब!

9 साल से बेघर मंजू का आरोप है कि जिन लोगों के पास अस्थाई कब्जा था, उन्हें भी घर अलॉट किए गए, जबकि उनके घर को पहले बिना नोटिस दिए तोड़ा गया, सामान भी पार हो गया, लेकिन भुगतान देने के बाद भी छत नहीं मिल पाई.

Written By:
Last Updated: May 4, 2026 15:32:37 IST

Mobile Ads 1x1

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के नगर पंचायत भखारा से एक ऐसा मामला सामने आया है, जो प्रशासनिक संवेदनशीलता और न्याय व्यवस्था दोनों पर सवाल खड़े करता है. वर्ष 2017 में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान 77 परिवारों के मकान तोड़े गए थे. प्रशासन ने 76 परिवारों को पुनर्वास के तहत जमीन आवंटित कर दी, लेकिन मंजू बांधे का परिवार आज भी अपने अधिकार के लिए दर-दर भटक रहा है.

बिना नोटिस ढ़हाया घर

पीड़िता मंजू बांधे (पति रामनारायण बांधे) के अनुसार, 5 मई 2017 को जब नगर पंचायत ने उनका मकान तोड़ा, उस समय वे शहर से बाहर थीं. उनका आरोप है कि बिना किसी पूर्व नोटिस के घर ढहा दिया गया. घर में रखा पूरा सामान जब्त कर नए बस स्टैंड पर रखा गया, जहां से बाद में सामान चोरी हो गया. इस घटना ने परिवार को न केवल बेघर किया, बल्कि आर्थिक रूप से भी पूरी तरह तोड़ दिया.

भुगतान के बावजूद पात्रता नहीं

मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि पुनर्वास प्रक्रिया पर ही सवाल उठ रहे हैं. मंजू का दावा है कि कई ऐसे लोगों को भी प्लॉट आवंटित कर दिए गए, जिनके पास सिर्फ अस्थायी कब्जा था. कुछ मामलों में एक ही परिवार को एक से अधिक प्लॉट दिए गए. उनका नाम 2011 की जनगणना सूची में दर्ज होने और नियमित कर भुगतान के बावजूद उन्हें पात्र नहीं माना गया.

गरीबों को नहीं मिला हक

पीड़िता मंजू बांधे ने बताया कि मैं अपने छोटे बच्चों के साथ पिछले 9 साल से कलेक्टर, तहसील और नगर पंचायत के चक्कर काट रही हूं. जिस जमीन पर मेरा घर था, वहां अब कॉम्प्लेक्स बन रहा है. जब तक मुझे मेरा हक नहीं मिलेगा, मैं लड़ाई जारी रखूंगी.

प्रशासन की चुप्पी से जनता परेशान

पीड़िता का कहना है कि उन्होंने सभी जरूरी दस्तावेज कई बार संबंधित कार्यालयों में जमा किए, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. इस पूरे मामले पर न तो नगर पंचायत के अधिकारी खुलकर कुछ कह रहे हैं और न ही जनप्रतिनिधियों की कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने आई है.

ये भी पढ़ें:- पुआल के ढेर में ‘जहर’ की खेती: कचहरी के पास मिनी शराब फैक्ट्री का भंडाफोड़, सामान देख पुलिस भी दंग!

Disclaimer: The article is a part of a syndicated feed. Except for the headline, the content is not edited. Liability lies with the syndication partner for the accuracy of the facts. 

MORE NEWS

Home > राज्य > छत्तीसगढ़ > 9 साल से बेघर मंजू की गुहार- ’76 को मिला प्लॉट, तो मेरे साथ भेदभाव क्यों?’ बिना नोटिस उजाड़ा घर, सामान भी गायब!

Written By:
Last Updated: May 4, 2026 15:32:37 IST

Mobile Ads 1x1

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के नगर पंचायत भखारा से एक ऐसा मामला सामने आया है, जो प्रशासनिक संवेदनशीलता और न्याय व्यवस्था दोनों पर सवाल खड़े करता है. वर्ष 2017 में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान 77 परिवारों के मकान तोड़े गए थे. प्रशासन ने 76 परिवारों को पुनर्वास के तहत जमीन आवंटित कर दी, लेकिन मंजू बांधे का परिवार आज भी अपने अधिकार के लिए दर-दर भटक रहा है.

बिना नोटिस ढ़हाया घर

पीड़िता मंजू बांधे (पति रामनारायण बांधे) के अनुसार, 5 मई 2017 को जब नगर पंचायत ने उनका मकान तोड़ा, उस समय वे शहर से बाहर थीं. उनका आरोप है कि बिना किसी पूर्व नोटिस के घर ढहा दिया गया. घर में रखा पूरा सामान जब्त कर नए बस स्टैंड पर रखा गया, जहां से बाद में सामान चोरी हो गया. इस घटना ने परिवार को न केवल बेघर किया, बल्कि आर्थिक रूप से भी पूरी तरह तोड़ दिया.

भुगतान के बावजूद पात्रता नहीं

मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि पुनर्वास प्रक्रिया पर ही सवाल उठ रहे हैं. मंजू का दावा है कि कई ऐसे लोगों को भी प्लॉट आवंटित कर दिए गए, जिनके पास सिर्फ अस्थायी कब्जा था. कुछ मामलों में एक ही परिवार को एक से अधिक प्लॉट दिए गए. उनका नाम 2011 की जनगणना सूची में दर्ज होने और नियमित कर भुगतान के बावजूद उन्हें पात्र नहीं माना गया.

गरीबों को नहीं मिला हक

पीड़िता मंजू बांधे ने बताया कि मैं अपने छोटे बच्चों के साथ पिछले 9 साल से कलेक्टर, तहसील और नगर पंचायत के चक्कर काट रही हूं. जिस जमीन पर मेरा घर था, वहां अब कॉम्प्लेक्स बन रहा है. जब तक मुझे मेरा हक नहीं मिलेगा, मैं लड़ाई जारी रखूंगी.

प्रशासन की चुप्पी से जनता परेशान

पीड़िता का कहना है कि उन्होंने सभी जरूरी दस्तावेज कई बार संबंधित कार्यालयों में जमा किए, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. इस पूरे मामले पर न तो नगर पंचायत के अधिकारी खुलकर कुछ कह रहे हैं और न ही जनप्रतिनिधियों की कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने आई है.

ये भी पढ़ें:- पुआल के ढेर में ‘जहर’ की खेती: कचहरी के पास मिनी शराब फैक्ट्री का भंडाफोड़, सामान देख पुलिस भी दंग!

Disclaimer: The article is a part of a syndicated feed. Except for the headline, the content is not edited. Liability lies with the syndication partner for the accuracy of the facts. 

MORE NEWS