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क्रीमी लेयर की श्रेणी में आती है जिला न्यायाधीश की बेटी, ग्वालियर उच्च न्यायालय ने सुनाया फैसला,  मामला एसडीएम को वापस भेज दिया

हाईकोर्ट ग्वालियर बेंच ने OBC क्रीमी लेयर पर एक अहम फैसला सुनाया है. सिविल जज की बेटी रागिनी राठौर की याचिका पर फैसला सुनाते हुए उच्च न्यायालय ने कहा कि केवल वेतन के आधार पर क्रीमी लेयर तय नहीं की जा सकती

ग्वालियर उच्च न्यायालय ने जिला न्यायाधीश की बेटी को ओबीसी प्रमाणपत्र जारी करने से संबंधित मामले को एसएमडी, ईसागढ़, अशोकनगर जिले या सक्षम प्राधिकारी को वापस भेज दिया है ताकि क्रीमी लेयर विवाद के मद्देनजर याचिकाकर्ता के आवेदन पर नए सिरे से विचार किया जा सके.

उच्च न्यायालय ने अशोकनगर कलेक्टर और ईसागढ़ के एसडीएम के उन आदेशों को पहले ही रद्द कर दिया है, जिनमें ओबीसी प्रमाणपत्र देने से इनकार किया गया था. उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि विवाद का समाधान केवल वेतन के आधार पर नहीं किया जा सकता; पिता की रोजगार स्थिति, उनकी पदोन्नति की तिथि और आय के स्रोत की भी जांच आवश्यक है.

क्या है पूरा मामला

याचिकाकर्ता रागिनी राठौर ने ओबीसी प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया था. उनके पिता न्यायिक सेवा में जिला न्यायाधीश के पद पर कार्यरत हैं; परिणामस्वरूप, उनका मामला ‘क्रीमी लेयर’ नियमों में उलझ गया. अधिकारियों ने उनके पिता की आय के आधार पर उनका आवेदन खारिज कर दिया था.

अधिकारियों ने उनके पिता की आय 16,99,282 रुपये बताते हुए आवेदन खारिज कर दिया. उन्होंने इस फैसले के खिलाफ अपील की, लेकिन अतिरिक्त कलेक्टर ने भी उनकी बात नहीं मानी. रागिनी ने दोनों आदेशों को उच्च न्यायालय में चुनौती दी.

ग्वालियर हाईकोर्ट का फैसला

उच्च न्यायालय ने सक्षम प्राधिकारी को लागू सरकारी परिपत्रों और निर्देशों, याचिकाकर्ता के पिता की सेवा स्थिति और पदोन्नति की तिथि, उनकी आय की प्रकृति और रिकॉर्ड पर रखे गए अन्य सभी प्रासंगिक सामग्रियों के साथ-साथ सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय द्वारा उपर्युक्त निर्णयों में निर्धारित कानून को भी ध्यान में रखने का निर्देश दिया है. सक्षम प्राधिकारी याचिकाकर्ता को  अधिमानतः आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने की तिथि से छह सप्ताह के भीतर सुनवाई का उचित अवसर प्रदान करेगा और कानून के अनुसार, तर्कसंगत और स्पष्ट आदेश पारित करेगा.

याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए नामित वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य सांघी ने कहा, “उच्च न्यायालय ने 11 मार्च, 2026 को यूनियन ऑफ इंडिया बनाम रोहित नाथन मामले में दिए गए सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का भी हवाला दिया. उस फैसले में, सर्वोच्च न्यायालय ने क्रीमी लेयर नियमों से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदुओं को स्पष्ट किया, यह स्थापित करते हुए कि निर्णय केवल आय के आधार पर नहीं लिए जा सकते.”

Shivangi Shukla

वर्तमान में शिवांगी शुक्ला इंडिया न्यूज़ के साथ कार्यरत हैं. हेल्थ, बॉलीवुड और लाइफ़स्टाइल विषयों पर लेखन में उन्हें विशेष रुचि और अनुभव है. इसके अलावा रिसर्च बेस्ड आर्टिकल और पॉलिटिकल कवरेज से जुड़े मुद्दों पर भी वे नियमित रूप से लेखन करती हैं. तथ्यपरक, सरल और पाठकों को जागरूक करने वाला कंटेंट तैयार करना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है. डिजिटल मीडिया में विश्वसनीय और प्रभावी पत्रकारिता को लेकर वे निरंतर अभ्यासरत हैं.

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Shivangi Shukla

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