Azam Khan Into ED Custody: जमानत मिलने के बाद रामपुर जेल से रिहा होते ही आजम खान को ED ने हिरासत में ले लिया. फर्जी पासपोर्ट और दो पैन कार्ड मामले में बेटे अब्दुल्ला को भी जमानत मिली थी.
azam khan release
Azam Khan Into ED Custody: उत्तर प्रदेश की राजनीति के चर्चित नेता और समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान की जेल से रिहाई के कुछ ही देर बाद नया घटनाक्रम सामने आया. रामपुर जेल से बाहर निकलते ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने उन्हें अपनी हिरासत में ले लिया. इलाहाबाद हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद आजम खान की रिहाई हुई थी, लेकिन जेल से बाहर आते ही ED की कार्रवाई ने उनके लिए नई कानूनी मुश्किलें खड़ी कर दीं.
दरअसल, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने शुक्रवार को फर्जी पासपोर्ट और दो पैन कार्ड रखने से जुड़े मामले में आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को जमानत दी थी. इसके बाद शनिवार को आजम खान को रामपुर जेल से रिहा किया गया. हालांकि, उनकी रिहाई के तुरंत बाद ED की टीम ने उन्हें हिरासत में ले लिया.
#WATCH | Uttar Pradesh | SP leader Azam Khan released from Rampur jail. After his release, an ED team has reportedly taken him into custody in connection with a case registered with the agency The Allahabad High Court has granted relief to former Cabinet Minister Mohammad Azam Khan and his son, former MLA Abdullah Azam Khan, in the two PAN card case. The Court had previously reserved its order after hearing applications seeking a stay on their conviction, suspension of their sentences, and the grant of interim bail.
— ANI (@ANI) October 31, 2026
आजम खान को ED (प्रवर्तन निदेशालय) ने जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े मामले में हिरासत में लिया है. ED ने इस मामले में 13 अक्टूबर को केस दर्ज किया था. यह केस रामपुर के अजीमनगर थाने में दर्ज 26 FIR के आधार पर बनाया गया था. इन FIR में आरोप लगाया गया था कि किसानों की जमीन जबरन ली गई और उसका इस्तेमाल जौहर यूनिवर्सिटी बनाने के लिए किया गया. इसके अलावा, आजम खान पर साल 2016 में कई मकानों को गिराने का भी आरोप है. उन पर यह भी आरोप है कि सरकारी परियोजनाओं के लिए खरीदे गए सामान और मशीनों का इस्तेमाल यूनिवर्सिटी परिसर में किया गया.
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ED का आरोप है कि इन कथित अवैध गतिविधियों से जो पैसा मिला, उसका इस्तेमाल जौहर यूनिवर्सिटी और उससे जुड़ी संपत्तियों को खरीदने और उनके निर्माण में किया गया. ED के मुताबिक, जौहर यूनिवर्सिटी को बनाने में कुल 499.09 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है. वहीं, जौहर ट्रस्ट के इनकम टैक्स रिटर्न में साल 2013-14 से 2024-25 के बीच सिर्फ 78.32 करोड़ रुपये का पूंजीगत खर्च दिखाया गया है. जांच के दौरान ED ने पाया कि यूनिवर्सिटी बनाने में खर्च हुई कुल रकम में से सिर्फ 72.63 करोड़ रुपये का वैध स्रोत साबित हो पाया. ED का दावा है कि बाकी 426.46 करोड़ रुपये का कोई वैध स्रोत नहीं मिला. एजेंसी ने इस रकम को कथित अपराध से हुई कमाई माना है.
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