Azam Khan: एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) की एक टीम मंगलवार सुबह सपा नेता आजम खान से पूछताछ करने रामपुर जेल पहुंची. उनसे उनके बैरक में पूछताछ की जा रही है. यह पूछताछ जौहर यूनिवर्सिटी और मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट में धोखाधड़ी के आरोपों की जांच के सिलसिले में की जा रही है. चार ईडी अधिकारी सुबह 9:10 बजे लखनऊ से एक गाड़ी में रामपुर जिला जेल पहुंचे. जेल रजिस्टर में एंट्री करने के बाद, वे सीधे आजम के बैरक में गए. वे उनसे जौहर यूनिवर्सिटी और ट्रस्ट को मिले करोड़ों रुपये के डोनेशन और कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स पर खर्च किए गए फंड के बारे में पूछताछ कर रहे हैं.
इससे पहले, जांच एजेंसी आजम खान से जुड़े कई लोगों से फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन और फंड के आपस में जुड़े होने के बारे में पूछताछ कर चुकी है. इनमें उनके चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) दीपक गोयल, जौहर यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रो. जहीरुद्दीन, सपा विधायक नसीर अहमद खान और कॉन्ट्रैक्टर सलीम शामिल हैं. एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ट्रस्ट को करोड़ों रुपये का फंड कहां से मिला और उसे यूनिवर्सिटी में कैसे ट्रांसफर किया गया. जांच के दौरान कंपनियों, फर्मों, कॉन्ट्रैक्टरों और ट्रस्ट के बीच लेन-देन से जुड़े डॉक्यूमेंट्स की भी जांच की जा रही है.
अक्टूबर में SP MLA से पूछताछ
6 अक्टूबर को, ईडी ने रामपुर के चमरौआ विधानसभा क्षेत्र से सपा विधायक नसीर अहमद खान से सात घंटे तक पूछताछ की. नसीर जौहर ट्रस्ट के जॉइंट सेक्रेटरी रह चुके हैं. ईडी ने सपा विधायक को पूछताछ के लिए लखनऊ बुलाया था. पूछताछ के दौरान ट्रस्ट के अंदर लिए गए फैसलों, डोनेशन और जौहर यूनिवर्सिटी के कंस्ट्रक्शन में उनकी भूमिका के बारे में सवाल किए गए.
अगस्त में 10 जगहों पर छापे मारे गए
19 अगस्त को, ईडी ने रामपुर, सहारनपुर और दिल्ली में जौहर ट्रस्ट, यूनिवर्सिटी और आजम खान से जुड़ी 10 जगहों पर छापे मारे. फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन, डोनेशन और कंस्ट्रक्शन काम से जुड़े डॉक्यूमेंट्स की जांच की गई. इसके बाद, एजेंसी ने मामले में शामिल लोगों से पूछताछ करके जांच को आगे बढ़ाया.
जौहर यूनिवर्सिटी कब बनी?
जौहर यूनिवर्सिटी आजम खान ने शुरू की थी. इसका नाम फ्रीडम फाइटर मौलाना मोहम्मद अली जौहर के नाम पर रखा गया है. उन्होंने ब्रिटिश राज के खिलाफ कई मूवमेंट किए और मुस्लिम लीग और कांग्रेस दोनों के प्रेसिडेंट रहे. 2005 में, जब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (SP) की सरकार थी, तो आजम खान अर्बन डेवलपमेंट मिनिस्टर थे. उस दौरान, 15 अप्रैल, 2005 को रामपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी बनाई गई थी. शुरू में, अथॉरिटी के अधिकार क्षेत्र में रामपुर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के साथ 23 गांव शामिल थे.
18 सितंबर, 2006 को आजम ने सिंगनखेड़ा गांव में जौहर यूनिवर्सिटी की नींव रखी. उस समय, सिंगनखेड़ा गांव अथॉरिटी के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता था. जुलाई 2004 में, अथॉरिटी ने अपनी सीमाएं बढ़ाईं और आसपास के 39 गांवों को शामिल किया.
इसमें सिंगनखेड़ा गांव भी शामिल था. यहीं से पूरा विवाद शुरू हुआ. SP सरकार के हटने के बाद, अथॉरिटी ने यूनिवर्सिटी की बिल्डिंग्स का इंस्पेक्शन किया. पता चला कि 40 बिल्डिंग्स में से सिर्फ मेडिकल कॉलेज और एडमिनिस्ट्रेटिव बिल्डिंग्स के ही प्लान अप्रूव हुए थे. बाकी 38 बिल्डिंग्स के मैप्स अप्रूव नहीं हुए थे. इसके आधार पर यूनिवर्सिटी को नोटिस भेजा गया. अथॉरिटी ने ऑर्डर दिया कि इन 38 बिल्डिंग्स को 30 जुलाई तक गिरा दिया जाए, नहीं तो एडमिनिस्ट्रेशन गिराने की कार्रवाई शुरू करेगा. हालांकि, मामला अब कोर्ट में है.