हाथरस का अनूठा रेल नेटवर्क, एक शहर और पांच रेलवे स्टेशन का क्या है चौंकाने वाला रहस्य?

हाथरस (Hathras) में पांच स्टेशनों का होना तकनीकी मजबूरी और ऐतिहासिक विकास (Historical Development) का परिणाम है. अलग-अलग रेल कंपनियों (Different Rail Companies) द्वारा अलग-अलग समय पर बिछाई गई पटरियों और मीटर गेज और शहर की व्यापारिक जरूरतों ने इस शहर को भारतीय रेलवे का एक अनोखा 'रेलवे हब' बनाया हुआ है.

Hathras five mysterious railway stations: उत्तर प्रदेश का एक छोटा सा शहर हाथरस भारतीय रेलवे केलिए खास तौर से पूरे देशभर में जाना जाता है. यहाँ, एक ही शहर की सेवा के लिए पांच अलग-अलग रेलवे स्टेशन मिलकर कर रहे हैं. हाथरस जंक्शन, हाथरस सिटी, हाथरस रोड, हाथरस किला और न्यू हाथरस.

पाँच स्टेशनों के पीछे का ऐतिहासिक रहस्य

उत्तर प्रदेश के हाथरस के इस जटिल रेल नेटवर्क के पीछे का मुख्य वजह औपनिवेशिक काल (British Era) की अलग-अलग रेल कंपनियों के बीच की प्रतिस्पर्धा और अलग-अलग रेलवे गेज (Gauge) का होना है. 

हाथरस जंक्शन (Hathras Junction)

दरअसल, यह सबसे पुराना और मुख्य स्टेशन में से एक है, जो दिल्ली-हावड़ा मुख्य मार्ग पर स्थित है. जानकारी के मुताबिक, इसे साल 1860 के दशक में ‘ईस्ट इंडियन रेलवे’ द्वारा बनाया गया था और यह शहर से लगभग 9 किमी दूर है.

हाथरस सिटी (Hathras City)

यह शहर के निवासियों को मुख्य लाइन से जोड़ने के लिए ‘बॉम्बे, बड़ौदा एंड सेंट्रल इंडिया रेलवे’ (BB&CI) ने एक मीटर गेज लाइन बिछाई, जिससे इस स्टेशन का जन्म हुआ.

हाथरस रोड (Hathras Road)

यह स्टेशन उत्तर-पूर्व रेलवे पर स्थित है और मुख्य रूप से बरेली-कासगंज-मथुरा लाइन को सेवा देने का काम करता है.

हाथरस किला (Hathras Killa)

शहर के व्यापारियों की सुविधा के लिए हाथरस जंक्शन से शहर के अंदरूनी हिस्से (किले के पास) तक एक छोटी ब्रांच लाइन बिछाई गई थी, जिसे ‘हाथरस किला’ स्टेशन नाम दिया गया है. 

न्यू हाथरस (New Hathras)

और यह नवीनतम स्टेशन है, जिसे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) के हिस्से के रूप में बनाया गया है. दरअसल, यह खास रूप से मालगाड़ियों के सुचारू संचालन के लिए बनाया गया है. 

अनूठा इतिहास और भौगोलिक कारण

हाथरस ऐतिहासिक रूप से हींग, कपास और चीनी के व्यापार का भारत का सबसे बड़ा केंद्र रहा है. जानकारी के मुताबिक, ब्रिटिश काल में अलग-अलग दिशाओं (मथुरा, कासगंज, दिल्ली और कोलकाता) से आने वाली ट्रेनों को जोड़ने के लिए अलग-अलग स्टेशनों की सबसे ज्यादा ज़रूरत पड़ी थी. लेकिन, उस समय मीटर गेज और ब्रॉड गेज की लाइनें एक-दूसरे को काटती थीं, लेकिन तकनीकी रूप से आपस में जुड़ी नहीं थीं, जिससे यात्रियों को एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन तक तांगे या रिक्शा से जाना पड़ता था.


Darshna Deep

Recent Posts

‘बॉर्डर 2’ के सेट पर भावुक पल: परमवीर चक्र विजेता मेजर होशियार सिंह की पत्नी ने वरुण धवन को दिया आशीर्वाद, वीडियो वायरल

'बॉर्डर 2' के सेट पर मेजर होशियार सिंह की पत्नी धनो देवी ने वरुण धवन…

Last Updated: January 11, 2026 09:38:40 IST

JEE Success Story: जेईई में रैंक 16, 10वीं की रहीं स्टेट टॉपर, बनाई ऐसी रणनीति, मिला पहला स्थान

JEE Success Story: कुछ करने की चाहत और सही स्ट्रेटजी हो, तो किसी भी चीज…

Last Updated: January 11, 2026 09:32:23 IST

India Vs New Zealand 1st ODI: क्या बारिश बिगाड़ेगी सीजन के पहले मुकाबले का खेल, जानें कब और कहां देखें मुकाबले

India Vs New Zealand: जसप्रीत बुमराह को उनके वर्कलोड की वजह से न्यूजीलैंड के खिलाफ…

Last Updated: January 11, 2026 09:30:50 IST

दिल्ली में संडे को टूटा ठंड का रिकॉर्ड, राजस्थान के चुरू के बराबर पहुंच न्यूनतम तापमान; जानें कब मिलेगी राहत

Delhi Ncr Weather Today 11 January 2026 : दिल्ली-हरियाण और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भीषण…

Last Updated: January 11, 2026 09:34:52 IST

मेरठ हाईवे बना अखाड़ा; चंद्रशेखर को रोकने के लिए भारी पुलिस बल तैनात, नेता ने घेराबंदी को किया धुआं-धुआं!

Meerut Girl Kidnapping Chandrashekhar Azad: मेरठ में दलित युवती के अपहरण मामले को लेकर प्रशासन…

Last Updated: January 11, 2026 00:30:33 IST