Varanasi Ganga flood: वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से घाटों पर बाढ़ का असर दिखाई देने लगा है. अस्सी घाट पर गंगा आरती के सातों मंच, हवन कुंड और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का मंच पानी में डूब चुका है. केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक गंगा करीब 2 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रही हैं.
बनारस के घाटों पर चढ़ा गंगा का पानी
Varanasi Ganga flood: वाराणसी की पहचान गंगा के घाटों, गंगा आरती और घाटों पर होने वाली रौनक से जुड़ी है, लेकिन इन दिनों यही घाट बढ़ते जलस्तर की वजह से बाढ़ की चपेट में हैं. गंगा नदी के लगातार बढ़ते पानी ने घाटों की सीढ़ियों को अपने आगोश में ले लिया है. कई घाटों का आपसी संपर्क भी टूट गया है. पूर्वी उत्तर प्रदेश में गंगा किनारे बसे कई गांवों में बाढ़ का असर पहले ही दिखाई देने लगा था और अब इसका प्रभाव वाराणसी के घाटों तक पहुंच गया है. सबसे ज्यादा असर उन जगहों पर दिखाई दे रहा है, जहां आम दिनों में श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय लोगों की भारी भीड़ रहती है. अस्सी घाट, जिसे वाराणसी की चौपाटी के तौर पर भी जाना जाता है, इन दिनों बाढ़ के पानी से घिरा नजर आ रहा है. घाट की सामान्य चहल-पहल की जगह चारों तरफ पानी और बाढ़ का असर दिखाई दे रहा है.
गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर अस्सी घाट पर साफ नजर आ रहा है. यहां गंगा आरती के लिए बनाए गए सभी सात मंच पानी में डूब चुके हैं. आरती के लिए इस्तेमाल होने वाले हवन कुंड तक बाढ़ के पानी की चपेट में आ गए हैं. घाट पर होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए बनाया गया ‘सुबह बनारस’ का मंच भी पानी से घिर चुका है. ऐसे में घाट पर होने वाले नियमित धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर भी असर पड़ा है. आम दिनों में जहां अस्सी घाट पर सुबह से लेकर देर रात तक लोगों की आवाजाही रहती है, वहीं अब बढ़ते पानी ने घाट की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है.
गंगा के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी के कारण घाटों की सीढ़ियां पानी में डूब गई हैं. नदी का पानी ऊपर आने के साथ घाटों के बीच पैदल आने-जाने का रास्ता भी प्रभावित हुआ है. कई जगहों पर घाट एक-दूसरे से कटे हुए नजर आ रहे हैं. घाटों पर रोजी-रोटी कमाने वाले पुरोहितों और अन्य लोगों के सामने भी परेशानी बढ़ गई है. उन्हें डर है कि अगर जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो अपनी चौकियां और सामान सुरक्षित रखने के लिए उन्हें एक बार फिर ऊंचे स्थानों पर जाना पड़ सकता है. पुरोहितों का कहना है कि आने वाले दिनों में गंगा का पानी और ऊपर पहुंच सकता है, जिससे घाटों पर कामकाज और ज्यादा प्रभावित होने की आशंका है.
केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक गंगा के जलस्तर में करीब 2 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है. फिलहाल नदी चेतावनी बिंदु से करीब डेढ़ मीटर और खतरे के निशान से लगभग ढाई मीटर नीचे बह रही है. हालांकि, अगर जलस्तर इसी रफ्तार से बढ़ता रहा तो आने वाले एक से दो दिनों में गंगा चेतावनी बिंदु को पार कर सकती हैं, जबकि करीब तीन दिनों में खतरे के निशान तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है. यही वजह है कि आने वाले कुछ दिन वाराणसी के तटीय इलाकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं. जलस्तर में बढ़ोतरी जारी रहने पर घाटों के साथ-साथ निचले इलाकों में भी बाढ़ का असर और गंभीर हो सकता है.
गंगा के बढ़ते जलस्तर के बीच वाराणसी के पुलिस कमिश्नर ने एक दिन पहले ही तटीय इलाकों का जलीय निरीक्षण किया था. इसके बावजूद घाटों पर पुलिस, जल पुलिस या एनडीआरएफ के जवानों की पर्याप्त मौजूदगी को लेकर सवाल उठ रहे हैं. बढ़ते पानी और तेज बहाव के बीच घाटों पर लोगों की आवाजाही को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था महत्वपूर्ण हो जाती है. खासकर ऐसे समय में जब कुछ लोग खतरे के बावजूद नदी में स्नान करते नजर आ रहे हैं.
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