वृंदावन के निधिवन को एक रहस्यमयी जगह माना जाता है. यहां श्रीकृष्ण लीला, वहां की मिट्टी और तमाम चीजों को लेकर रहस्य बना हुआ है.
Nidhivan Mystery: वैसे तो वृंदावन की हर गली में रहस्य छिपा हुआ है, लेकिन सबसे ज्यादा रहस्यमयी है वृंदावन का निधिवन. निधिवन को लेकर लोगों की अपनी मान्यताएं और परंपराएं हैं. कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण आज भी आधी रात में निधिवन आकर श्री राधा और गोपियों के साथ रासलीला करते हैं. वहीं वृंदावन के लोगों का दावा है कि निधिवन में अगर कोई व्यक्ति छुप कर रात में रुक जाता है, तो या तो वो मर जाता है या पागल हो जाता है.
निधिवन के अंदर एक 'रंग महल' है. जिसे श्रीकृष्ण का प्राकट्य स्थल भी कहा जाता है. यहां पर शाम की आरती के बाद मंदिर को बंद कर दिया जाता है. मंदिर को बंद करने से पहले यहां पर भोग के लिए माखन, मिश्री, पान और दातुन रखा जाता है. साथ ही लड्डू, पेड़े और श्रंगार आदि का सामान भी रखा जाता है, जो सुबह के समय बिखरा पड़ा रहता है. सुबह के समय ये सब बिखरा और इस्तेमाल किया हुआ मिलता है. मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण गोपियों के साथ निधिवन में आकर नृत्य करते हैं और रासलीला रचाते हैं.
स्थानीय लोगों का दावा है कि उन्होंने आधी रात में निधिवन के जंगलों में श्रीकृष्ण और राधा के साथ ही गोपियों को नृत्य करते देखा है. वहीं इसके विपरीत ये भी कहा जाता है कि जो भी निधिवन में छिपकर श्रीकृष्ण को नृत्य करते देखता है, वो पागल या अंधा हो जाता है, या तो उसकी मृत्यु हो जाती है. इतना ही नहीं शाम के बाद निधिवन में कोई जानवर या पक्षी तक पर नहीं मारता. हालांकि इनमें कितना सच है, ये तो कह पाना मुश्किल है. वहीं बहुत से लोग इसे अंधविश्वास भी मानते हैं.
मान्यता है कि निधिवन में मौजूद तुलसी के पेड़ जोड़ों में हैं. यही पेड़ रात के समय गोपियों का रूप धारण करते हैं और सुबह होते ही पेड़ बन जाते हैं. ये भी मान्यता है कि इन वृक्षों की शाखाएं नीचे की तरफ बढ़ती हैं. लोगों का कहना है कि यहां से तुलसी का पत्ता चुराने वालों को बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.
वहीं निधिवन की मिट्टी को लेकर भी लोगों में असमंजस है. बहुत से लोगों का कहना है कि निधिवन से मिट्टी लानी चाहिए क्योंकि ये भगवान कृष्ण और राधा रानी के चरणों की धूल मानी जाती है. इसके कारण उसे अत्यंत पवित्र माना जाता है. लोग इसे दैनिक पूजा, तिलक और अनुष्ठानों में शुभ फलदायी मानी जाती है.
हालांकि संत संत प्रेमानंद जी महाराज जैसे कुछ धर्माचार्यों का मानना है कि निधिवन ही नहीं बल्कि वृंदावन की कोई भी चीज जैसे मिट्टी, पौधे और तुलसी आदि वृंदावन से बाहर नहीं ले जाना चाहिए. क्योंकि ये दिव्य स्थान है.
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