Yadav Ji Ki Love Story Row: ‘घूसखोर पंडत' के बाद अब 'यादव जी की लव स्टोरी' को लेकर यूपी के अलग-अलग जगहों पर विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं. सिनेमा हॉल संचालकों को चेतावनी दी गई कि अगर फिल्म की स्क्रीनिंग की गई तो विरोध और तेज किया जाएगा. साथ ही फिल्म के रिलीज पर रोक लगाने की भी मांग की जा रही है.
'यादव जी की लव स्टोरी' फिल्म का पोस्टर
Yadav Ji Ki Love Story Controversy: देश में आए दिन किसी-न-किसी फिल्म को लेकर विवाद हो जाता है. कभी किसी फिल्म के नाम को लेकर तो कभी फिल्म के कैरेक्टर तो कभी किसी सीन को लेकर विवाद होते हैं और फिर हंगामा होने लगता है. अब ऐसा ही एक नया विवाद फिल्म ‘यादव जी की लव स्टोरी’ को लेकर शुरू हो गई है. इसके खिलाफ लोगों को गुस्सा भी देखने को मिल रहा है. बुधवार को उत्तर प्रदेश के संभल में यादव समुदाय के लोगों ने फिल्म के खिलाफ जोरदार विरोध-प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने फिल्म के पोस्टर जलाए और उन्हें पैरों से रौंदकर अपना विरोध दर्ज कराया.
यही नहीं प्रदर्शनकारियों ने फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की भी मांग की. उनका आरोप है कि फिल्म का नाम और उसकी कहानी उनके समाज को गलत तरीके से पेश करती है, जिसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि फिल्म की कहानी और शीर्षक यादव समाज को निशाना बनाने के लिए तैयार किए गए हैं. इससे समाज की गलत छवि बनाई जा रही है.
‘यादव जी की लव स्टोरी’ को लेकर यूपी के अलग-अलग जगहों पर विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं. सिनेमा हॉल संचालकों को चेतावनी दी गई कि अगर फिल्म की स्क्रीनिंग की गई तो विरोध और तेज किया जाएगा. कुछ जगहों पर प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग भी की गई है.
बता दें कि ‘यादव जी की लव स्टोरी’ फिल्म का निर्देशन अंकित भड़ाना ने किया है. यह एक रोमांटिक थ्रिलर कहानी है. इसमें लीड रोल में एक्ट्रेस प्रगति तिवारी और विशाल मोहन हैं. प्रगति ने ‘सिंपल यादव’ का किरदार निभाया है, जो एक शांत, घरेलू लड़की है. फिल्म में उनके और वसीम अख्तर नामक युवक की लव स्टोरी दिखाई गई है. यह फिल्म 27 फरवरी 2026 को रिलीज होने वाली है.
गौरतलब कि इससे पहले फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ के नाम को लेकर विवाद हुआ. मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया. सुप्रीम कोर्ट ने भी फिल्म के नाम पर कड़ी आपत्ति जताई. कोर्ट ने संकेत दिया कि यदि फिल्म का नाम नहीं बदला गया तो इसकी रिलीज की अनुमति नहीं दी जाएगी. कोर्ट ने फिल्म निर्माताओं से कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर समाज के किसी वर्ग को अपमानित या बदनाम करने की इजाजत नहीं दी जा सकती.
कोर्ट ने फिल्म के निर्माताओं-निर्देशकों और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी करते हुए उनसे जवाब मांगा है कि आपत्तिजनक शीर्षक के बावजूद फिल्म की रिलीज क्यों न रोकी जाए. इस मामले की 19 फरवरी को अगली सुनवाई है.
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