Arun Gawli: मुंबई के अंडरवर्ल्ड से निकलकर विधानसभा तक का सफर तय करने वाले अरुण गवली उर्फ डैडी एक जाना-माना चेहरा हैं. उनके राजनीतिक सफर को भारतीय राजनीति के सबसे विवादित अध्यायों में गिना जाता है. 1990 के दशक की गैंगवार के बाद गवली की छवि बदली और वो मराठी मतदाताओं के बीच रक्षक बन गए. साल 2004 में गवली की जिंदगी ने अनोखा मोड़ लिया. उन्होंने अखिल भारतीय सेना के नाम से अपनी पार्टी बनाई और मिल मजदूरों, स्थानीय युवाओं को रोजगार और झुग्गी पुनर्विकास जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दी.
2004 में मिली जीत
2004 में ही अरुण गवली को महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में मुंबई की भायखला सीट से जीत दर्ज की. वे महाराष्ट्र विधानसभा के सदस्य बने. उस समय उन्हें डॉन से विधायक बने नेता के रूप में जाना जाता है. वे 2004 से 2009 तक वे भायखला से विधायक रहे. इस दौरान उनके समर्थक उन्हें मसीहा और परेशानियां सुलझाने वाला बताते रहे. वहीं उनके विरोधी उन्हें डॉन बताते हुए उनका आपराधिक इतिहास उठाते रहे.
2009 में हुई हार
2009 विधानसभा चुनाव में गवली ने एक बार फिर भायखला से चुनाव लड़ा. हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा. शिव सेना के उम्मीदवार को वहां से जीत मिली. 2 मार्च 2007 को घाटकोपर में शिवसेना पार्षद कमलाकर जमसंदेकर की गोली मारकर हत्या कर दी गई. गवली पर हत्या की साजिश रचने का आरोप लगा. 2012 में मुंबई सत्र न्यायालय ने उन्हें दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई. सजा के बाद से वे नागपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं. उन्हें समय-समय पर पैरोल और फरलो मिलती है.
दाऊद के साथ दुश्मनी
मुंबई के अंडरवर्ल्ड में 1980–90 के दशक में अरुण गवली और दाऊद इब्राहिम के बीच दुश्मनी के कारण शहर में क्राइम वर्ल्ड दो गुटों में बदल गया. बता दें कि 1980 के दशक में कई गिरोह सक्रिय थे. उस समय दाऊद इब्राहिम की डी-कंपनी तेजी से उभर रही थी. वहीं अरुण गावली भायखला में अपनी पकड़ मजबूत कर रहे थे.
भाई से मिले अरुण गवली
बता दें कि हाल ही में अरुण गवली ने अपने भाई जयेंद्र विष्णु ठाकुर से मुलाकात की थी. उनके भाई ने मित्रता और सम्मान के प्रतीक के रूप में भगवान गणेश की फोटो शेयर की. हालांकि एक समय पर दोनों भाइयों में कोई हस्तक्षेप नहीं था. ऐसे में दोनों की मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है.