Car Sale Tips: अक्सर लोग कार को कुछ साल चलाते हैं उसके बाद उसे बेच देते हैं. हममें से ज्यादातर लोग कार को बेच देने के बाद नई कार ले आते हैं और अपनी जिम्मेदारी को खत्म समझ लेते हैं. लेकिन, आपकी जिम्मेदारी यहीं खत्म नहीं होती है. कई बार कार बेचते समय की गई छोटी सी लापरवाही या गलती से पुराने कार मालिक पर ई-चालान आ सकता है. अक्सर ऐसे मामले सुनने को मिलते हैं, जहां कार बेचने के बाद भी मालिक के नाम पर चालान आते रहते हैं.
केवल यही नहीं, बल्कि सड़क हादसे, ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन या किसी कानूनी मामले में भी सबसे पहले वाहन के रजिस्टर्ड मालिक से संपर्क किया जाता है. ऐसी स्थिति अक्सर तब आती है, जब कार की ओनरशिप आधिकारिक रूप से ट्रांसफर नहीं कराई जाती है.
कार बेचते समय जरूर रखें ध्यान
अगर आप कार को बेच रहे हैं तो ऐसे में कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है. कार बेचते समय ही आपको गाड़ी की ओनरशिप को आधिकारिक रूप से ट्रांसफर करा देनी चाहिए. इसके साथ ही साथ मोटर व्हीकल एक्ट के तहत यह आपकी भी जिम्मेदारी है कि कार ट्रांसफर होने 14 दिनों के अंदर अपने RTO ऑफिस में बिक्री के कागजात और डिलीवरी नोट और ट्रांसफर फॉर्म की कॉपी जमा करानी होगी इसके साथ ही साथ एक रिसीविंग अपने पास सुरक्षित रख लें. RTO में आपका रिकॉर्ड चला जाने के बाद आप किसी भी कानूनी पचड़े में पड़ने से बचे रहते हैं क्योंकि, सरकार की नजर में आप अपनी ओनरशिप ट्रांसफर कर चुके हैं.
इन गलतियों को बिलकुल न करें नजरअंदाज
अगर आप कार बेच रहे हैं तो ऐसे में कुछ बातों का खासतौर पर ध्यान रखना चाहिए. अगर आप केवल मौखिक समझौते पर ही अपनी कार बेच दे रहे हैं तो ऐसा करना कहीं न कहीं आपके लिए समस्या का सबब बन सकता है. इसलिए हमेशा एग्रीमेंट के साथ ही कार को बेचें. इसके साथ ही RC ट्रांसफर को लेकर देर न करें और दस्तावेज पूरे हुए बिना अपनी कार की डिलीवरी नहीं दें. कार बेचने के बाद आपको जो पैसे मिलें, उसका भी एक रिकॉर्ड या फिर रसीद अपने पास संभालकर रखना जरूरी होता है.