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IIT दिल्ली की नई उपलब्धि, शोधकर्ताओं ने यूनीक AC किया डिजाइन, 1200W से 800W तक कम होगी बिजली की खपत

आईआईटी दिल्ली के शोधकर्ताओं ने पारंपरिक एयर कंडीशनर के लिए एक इनोवेटिव ऐड-ऑन मॉड्यूल विकसित किया है, जो बिजली की खपत को 1200 वाट से घटाकर लगभग 800 वाट कर देता है.

गर्मी आते ही लोग AC चलाना शुरू कर देते हैं, लेकिन इससे बिजली की खपत भी बढ़ जाती है. बिजली की बढ़ी खपत का असर लोगों की जेब पर पड़ता है, पर आने वाले समय में इस समस्या का समाधान हो सकता है. आईआईटी दिल्ली के शोधकर्ताओं ने पारंपरिक एयर कंडीशनर के लिए एक इनोवेटिव ऐड-ऑन मॉड्यूल विकसित किया है, जो बिजली की खपत को 1200 वाट से घटाकर लगभग 800 वाट कर देता है. 

यह तकनीक कूलिंग और डीह्यूमिडिफिकेशन को अलग करके वेस्ट हीट का रिसाइक्लिंग करती है, जिससे घरों के बिजली बिल में 33% तक की कमी आ सकती है. 

समस्या और समाधान

भारत में गर्मियों के दौरान एसी की डिमांड बढ़ने से बिजली की खपत चरम पर पहुंच जाती है. सामान्य वैपर-कंप्रेशन एसी कूलिंग के साथ-साथ नमी हटाने के लिए हवा को जरूरत से ज्यादा ठंडा करता है, जिससे ऊर्जा बर्बाद होती है. प्रोफेसर अनुरग गोयल के नेतृत्व वाली मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग की टीम ने मेम्ब्रेन-लिक्विड डेसिकेंट सिस्टम विकसित किया, जो नमी को सीधे अवशोषित करता है. इससे कंप्रेसर का बोझ कम होता है और बिजली की खपत भी कम होती है. सिस्टम में पॉलीमर मेम्ब्रेन साल्ट सॉल्यूशन (लिक्विड डेसिकेंट) और हवा के बीच बैरियर बनाता है, जो नमक के कणों को इंडोर एयर में आने से रोकता है. 

यह तकनीक कैसे काम करती है

  • आउटडोर हवा से वॉटर वेपर को साल्ट सॉल्यूशन सीधे सोख लिया जाता है.
  • डाइल्यूट हो चुकी सॉल्यूशन को रिजनरेट करने के लिए बिना एक्स्ट्रा हीटर या बर्नर के एसी के कंडेंसर यूनिट से वेस्ट हीट का उपयोग किया जाता है.
  • ऊर्जा ट्रांसफर रेट को वैपर-कंप्रेशन यूनिट के साथ मैच किया गया है, जो भारत के विभिन्न जलवायु में काम करता है.
  • यह हाइब्रिड सिस्टम कॉम्पैक्ट ऐड-ऑन है, जो मौजूदा एसी में आसानी से फिट हो जाता है.

ऊर्जा बचत के आंकड़े

इस तकनीक से टिपिकल कंडीशंस में बिजली खपत 1200 वाट से घटकर 800 वाट हो जाती है, यानी औसतन 33% बचत होने की संभावना है. बहुत नम क्षेत्रों में 28% और शुष्क इलाकों में 41.5% तक बिजली की खपत में कमी संभव है. इससे घरेलू बिल कम होंगे और पीक डिमांड घटेगी. यह जर्नल ऑफ बिल्डिंग इंजीनियरिंग में प्रकाशित ‘Model-based analysis of a novel hybrid membrane-liquid desiccant air conditioner’ अध्ययन पर आधारित है.

यह तकनीक घरों, कमर्शियल बिल्डिंग्स में अपनाई जा सकती है, जहां ह्यूमिडिटी कंट्रोल जरूरी है. इससे कार्बन एमिशन घटेगा, सस्टेनेबिलिटी बढ़ेगी और गर्मी की लहरों में ग्रिड पर बोझ कम होगा. शहरीकरण और तापमान वृद्धि के दौर में यह तकनीक गेम-चेंजर साबित हो सकती है.

Shivangi Shukla

वर्तमान में शिवांगी शुक्ला इंडिया न्यूज़ के साथ कार्यरत हैं. हेल्थ, बॉलीवुड और लाइफ़स्टाइल विषयों पर लेखन में उन्हें विशेष रुचि और अनुभव है. इसके अलावा रिसर्च बेस्ड आर्टिकल और पॉलिटिकल कवरेज से जुड़े मुद्दों पर भी वे नियमित रूप से लेखन करती हैं. तथ्यपरक, सरल और पाठकों को जागरूक करने वाला कंटेंट तैयार करना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है. डिजिटल मीडिया में विश्वसनीय और प्रभावी पत्रकारिता को लेकर वे निरंतर अभ्यासरत हैं.

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