चीन के कई शहरों जैसे झेजियांग और बीजिंग में स्कूलों ने अपनी छतों को पूरी तरह से आधुनिक खेल के मैदानों में बदल दिया है, जहां 200 मीटर के रनिंग ट्रैक, सिंथेटिक फुटबॉल पिच और बास्केटबॉल कोर्ट बनाए गए हैं, भारत में विशेषकर दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में, कई सरकारी और निजी स्कूलों के पास अपना खेल का मैदान नहीं है, यदि भारत सरकार और सीबीएसई (CBSE) अपने इंफ्रास्ट्रक्चर नियमों में 'रूफटॉप ग्राउंड' को जगह देते हैं, तो इससे लाखों बच्चों को खेलने के लिए सुरक्षित और खुली जगह मिल सकती है.
China School Rooftop Playground Model: भारत के लिए यह विचार एक ‘स्मार्ट सॉल्यूशन’ साबित हो सकता है लेकिन इसके क्रियान्वयन में कुछ तकनीकी चुनौतियां भी हैं भारत के शहरों में जमीन की कीमतें आसमान छू रही हैं, छतों का उपयोग करने से स्कूल परिसर की कुल क्षमता (Capacity) बढ़ जाएगी चीन में इन मैदानों के चारों ओर 1.8 से 2.5 मीटर ऊंची मजबूत जाली और सुरक्षा घेरा बनाया जाता है, भारत को भी नेशनल बिल्डिंग कोड (NBC) में इसके लिए विशेष सुरक्षा मानक जोड़ने होंगे, हाल ही में सीबीएसई ने मान्यता के लिए कम से कम 2000-6000 वर्ग मीटर के मैदान को अनिवार्य किया है, रूफटॉप ग्राउंड इस शर्त को पूरा करने में मदद कर सकता है, घनी आबादी में रहने वाले बच्चों के पास पार्क की कमी होती है स्कूल की छत पर खेलने की सुविधा उन्हें ‘स्क्रीन एडिक्शन’ से दूर कर शारीरिक रूप से सक्रिय बनाएगी.
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