प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने असम दौरे के दौरान डिब्रूगढ़ के एक चाय बागान में यादगार समय बिताया, यहां काम करने वाली महिलाओं ने पारंपरिक लाल-सफेद बॉर्डर वाली साड़ियों में उनका स्वागत किया और 'जगत जननी मां' की स्तुति में सुंदर गीत गाए, पीएम मोदी ने भी इन महिलाओं का पूरा साथ दिया, उन्होंने पीठ पर पारंपरिक बांस की टोकरी बांधी और कुशलता से चाय की पत्तियां तोड़ीं, उन्होंने इन महिला श्रमिकों के साथ बैठकर बातचीत की, उनके रहन-सहन और चुनौतियों को समझा और उनके साथ मुस्कुराते हुए सेल्फी भी ली, यह पल आधुनिक भारत के नेतृत्व और उसकी प्राचीन जड़ों के बीच एक गहरे जुड़ाव को दर्शाता है.
PM Modi Dibrugarh Tea Garden Visit 2026: यह यात्रा केवल प्रतीकात्मक नहीं थी, बल्कि असम के सबसे महत्वपूर्ण उद्योग ‘चाय’ और उसके पीछे के असली नायकों को सम्मान देने की एक कोशिश थी, चाय बागान की महिलाएं अपनी कठिन जीवनशैली के बावजूद अपनी कला और लोक संगीत को जीवित रखे हुए हैं, मां जगदंबा की स्तुति में गाया गया उनका गीत उनकी अटूट आस्था का प्रतीक है, पीएम मोदी अक्सर अपने ‘चाय बेचने’ वाले अतीत का जिक्र करते हैं बागान में पहुंचकर उन्होंने खुद को फिर से उसी मिट्टी और चाय की खुशबू से जोड़ा, जिसने उन्हें वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान दी प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ‘चाय असम की आत्मा है’ और इन परिवारों की मेहनत ने ही असम के गौरव को बढ़ाया है उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और वेतन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी उनके साथ चर्चा की, अप्रैल 2026 में होने वाले असम विधानसभा चुनावों से पहले, पीएम का यह कदम चाय श्रमिक समुदाय (Tea Tribes) के प्रति उनकी संवेदनशीलता और समर्थन को दर्शाता है, जो राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं.
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