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Supreme Court: दीया जलाइए, वही आपकी आस्था दिखाने को काफी… हिंदुत्व जीवन पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

Supreme Court on Hinduism: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली नौ जजों की संविधान पीठ ने हिंदुत्व जीवन पर बड़ी बात की है. कोर्ट ने कहा कि हिंदुत्व जीवन जीने का एक तरीका है, और एक हिंदू के लिए हिंदू बने रहने के लिए मंदिर जाना या कोई खास रीति-रिवाज मानना ​​जरूरी नहीं है.

Supreme Court on Temple Visit: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली नौ जजों की संविधान पीठ ने हिंदुत्व जीवन पर बड़ी बात की है. कोर्ट ने कहा कि हिंदुत्व जीवन जीने का एक तरीका है, और एक हिंदू के लिए हिंदू बने रहने के लिए मंदिर जाना या कोई खास रीति-रिवाज मानना ​​जरूरी नहीं है; असल में, अपने घर में बस एक *दीया* (दीपक) जलाना ही अपनी आस्था दिखाने के लिए काफी है.
कोर्ट ने ये बातें उन याचिकाओं की सुनवाई के दौरान कहीं, जिनमें धार्मिक स्थलों, जिनमें केरल का सबरीमाला मंदिर भी शामिल है पर महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव और दाऊदी बोहरा समुदाय जैसे अलग-अलग धर्मों में धार्मिक आज़ादी के दायरे से जुड़े मुद्दे उठाए गए थे.

हस्तक्षेप करने वाले ने क्या दलीलें दीं?

जैसे ही सुनवाई का 15वां दिन शुरू हुआ, हस्तक्षेप करने वाले की ओर से पेश वकील डॉ. जी. मोहन गोपाल ने दलील दी कि सामाजिक न्याय की मांगें खुद धार्मिक समुदायों के भीतर से ही उठ रही हैं. उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म को एक धार्मिक श्रेणी के तौर पर परिभाषित किया गया था. इसके बाद, 1966 में यह माना गया कि हिंदू वह है जो धर्म और दर्शन से जुड़े सभी मामलों में वेदों को सबसे ऊपर मानता है. उन्होंने मुझसे कभी नहीं पूछा; हममें से किसी ने भी कभी ऐसा नहीं कहा. मैं वेदों का बहुत सम्मान करता हूं; लेकिन क्या यह सच है कि आज जो भी व्यक्ति खुद को हिंदू मानता है, वह आध्यात्मिक और दार्शनिक मामलों में वेदों को ही सबसे ऊपर मानता है.

‘हिंदू बने रहने के लिए मंदिर जाना ज़रूरी नहीं’ — सुप्रीम कोर्ट

उनकी दलील का जवाब देते हुए जस्टिस नागरत्ना ने कहा, ठीक इसी वजह से हिंदुत्व को जीवन जीने का एक तरीका बताया गया है. हिंदू बने रहने के लिए, मंदिर जाना या कोई खास रीति-रिवाज मानना ​​ज़रूरी नहीं है. किसी व्यक्ति के लिए रीति-रिवाजों का सख्ती से पालन करना कोई शर्त नहीं है, और जिसकी आस्था है, उसके रास्ते में कोई रुकावट नहीं डाल सकता.  अगर कोई व्यक्ति अपने घर के अंदर बस एक दीपक जला लेता है, तो यह उसकी आस्था दिखाने के लिए काफी है.
कोर्ट ने पहले भी कहा था कि अगर लोग संवैधानिक अदालतों में हर धार्मिक रीति-रिवाज या धर्म से जुड़े मामले को चुनौती देना शुरू कर देंगे, तो सैकड़ों याचिकाएं दायर हो जाएंगी; जिसका नतीजा यह होगा कि हर धर्म कई संप्रदायों में बंट जाएगा. सितंबर 2018 में, पांच जजों की एक संविधान पीठ ने बहुमत से फ़ैसला सुनाते हुए, सबरीमाला अयप्पा मंदिर में 10 से 50 साल की उम्र की महिलाओं के प्रवेश पर लगा प्रतिबंध हटा दिया; अपने फ़ैसले में, पीठ ने यह घोषित किया कि यह सदियों पुरानी हिंदू धार्मिक प्रथा ग़ैर-क़ानूनी और असंवैधानिक थी.
Shristi S

Shristi S has been working in India News as Content Writer since August 2025, She's Working ITV Network Since 1 year first as internship and after completing 3 months intership Shristi Joined Inkhabar Haryana of ITV Group on November 2024. She Worked in Inkhabar Haryana 9 months there she cover full Haryana news. Currently In India News her speciality is hard news, lifestyle, entertainment, Business.

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