सोशल मीडिया पर एक पॉजिटिव एक्टिविटी चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसमें एक गैस सिलेंडर डिलीवरी करने वाला युवक एक मुस्लिम बुजुर्ग चाचा के साथ बेहद अभद्र भाषा में बात कर रहा था, वहां मौजूद लोगों में से कोई कुछ नहीं कह रहा था, तभी सामाजिक कार्यकर्ता शौर्य ने तुरंत हस्तक्षेप किया, उन्होंने युवक को कड़े शब्दों में समझाया कि सामने वाला व्यक्ति चाहे किसी भी धर्म का हो, वह पिता की उम्र के हैं और उनसे बात करने की एक तहजीब होती है, शौर्य की इस समझाइश के बाद युवक को अपनी गलती का अहसास हुआ और वहां मौजूद लोगों ने शौर्य के इस 'हिंदू-मुस्लिम एकता' और 'संस्कार' वाले कदम की सराहना की.
Social Worker Shaurya Hindu Muslim Unity: यह छोटी सी लगने वाली घटना वास्तव में एक बड़े सामाजिक बदलाव का संकेत है, शौर्य ने यह नहीं देखा कि बुजुर्ग का धर्म क्या है, उन्होंने केवल यह देखा कि एक बड़े बुजुर्ग का अपमान हो रहा है, यह “वसुधैव कुटुंबकम” की भावना का असली रूप है आजकल काम के बोझ या तनाव के नाम पर लोग बड़ों का सम्मान भूल जाते हैं, शौर्य ने उस युवक को याद दिलाया कि पेशेवर जिम्मेदारी के साथ-साथ नैतिक जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी है, एक सामाजिक कार्यकर्ता का काम केवल रैलियां करना नहीं, बल्कि जमीन पर खड़े होकर अन्याय या अभद्रता के खिलाफ आवाज उठाना है जो शौर्य ने बखूबी किया, यह घटना उन लोगों के लिए जवाब है जो समाज को बांटने की कोशिश करते हैं अगर हर युवा शौर्य की तरह जागरूक हो जाए, तो किसी भी बुजुर्ग को सार्वजनिक स्थान पर अपमानित नहीं होना पड़ेगा.
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