India News (इंडिया न्यूज), Bihar politics news:बिहार की राजनीति में एक बार फिर ‘जंगलराज’ का जिन्न बाहर आ गया है। इस बार खुलासा किसी विरोधी ने नहीं, बल्कि खुद लालू प्रसाद यादव के साले सुभाष यादव ने किया है। उन्होंने एक पॉडकास्ट में दावा किया कि बिहार में लालू-राबड़ी शासन के दौरान किडनैपिंग का कारोबार सरकार के संरक्षण में चलता था। सुभाष यादव ने कहा, “मुझे लोग किडनैपिंग के मामलों में सौदेबाजी करने वाला कहते थे, लेकिन असल में मुख्यमंत्री आवास से ही आरोपी छूटते थे।”
सुभाष यादव के बयान से मचा राजनीतिक बवाल
सुभाष यादव के इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में बवाल मच गया है। आरजेडी एक बार फिर ‘जंगलराज’ के आरोपों में घिर गई है। वैसे भी, लालू यादव का कार्यकाल कानून-व्यवस्था को लेकर हमेशा विवादों में रहा है, लेकिन इस बार मामला ज्यादा गंभीर इसलिए हो गया क्योंकि आरोप उनके अपने रिश्तेदार ने लगाए हैं।
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RJD की छवि क्यों नहीं बदल पाई?
1.बाहुबलियों से दूरी नहीं बनाई
आरजेडी की छवि हमेशा से बाहुबलियों की पार्टी की रही है। 2020 के विधानसभा चुनाव में आरजेडी के 74 में से 54 विधायक आपराधिक छवि वाले थे। बीजेपी, जेडीयू और कांग्रेस में भी दागी नेता हैं, लेकिन आरजेडी इस मामले में हमेशा आगे रही है।
2.तेजस्वी और तेजप्रताप ने बदलाव की कोशिश नहीं की
कई युवा नेता अपनी पार्टी को नई छवि देने की कोशिश करते हैं। राहुल गांधी ने इमरजेंसी पर सवाल उठाए, अखिलेश यादव ने बाहुबलियों से दूरी बनाई, लेकिन तेजस्वी और तेजप्रताप ने ऐसा कुछ नहीं किया।
3.सत्ता में आते ही ‘परिवारवाद’ हावी
2015 और 2022 में जब भी आरजेडी सत्ता में आई, तो मलाईदार पद सिर्फ लालू परिवार को ही मिले। तेजस्वी यादव दोनों बार उपमुख्यमंत्री बने, जबकि बाहरी नेताओं को हाशिए पर रखा गया।
4.भ्रष्टाचार के दाग नहीं धुले
लालू परिवार पर चारा घोटाला, जमीन के बदले नौकरी घोटाला और आय से अधिक संपत्ति के मामलों में कार्रवाई हुई। कोर्ट ने लालू यादव को दोषी ठहराया, लेकिन तेजस्वी यादव ने अपनी छवि बदलने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए।
जंगलराज’ का ठप्पा क्यों नहीं हटता?
उत्तर प्रदेश में मायावती ने माफियाओं का सहारा लिया, लेकिन मुख्यमंत्री बनने के बाद कानून-व्यवस्था पर सख्ती बरती। आरजेडी ऐसा कोई बदलाव नहीं कर पाई। 2022 में तेजस्वी यादव के पास मौका था, लेकिन कानून-व्यवस्था पर कोई सुधार नहीं हुआ। सुभाष यादव के इस खुलासे से आरजेडी की छवि पर और गहरा दाग लग सकता है। राजनीतिक विरोधी इसे चुनावी मुद्दा बना सकते हैं और इसका फायदा बीजेपी और जेडीयू को मिल सकता है। अब देखना यह होगा कि तेजस्वी यादव इस स्थिति से कैसे निपटते हैं।