Binance Cyberattack: क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज Binance पर 29 अक्टूबर 2026 को एक बड़ा साइबर हमला हुआ. इस घटना में कंपनी के वॉलेट से करीब 6.34 अरब डॉलर ( भारतीय रुपए में करीब 59575 करोड़) की क्रिप्टोकरेंसी हमलावरों के नियंत्रण वाले वॉलेट में ट्रांसफर की गई. Binance की शुरुआती जांच के मुताबिक, हमलावरों ने सीधे किसी वॉलेट को हैक करने के बजाय कंपनी के कर्मचारियों और उसके आंतरिक सिस्टम को निशाना बनाया.
अमेरिका की जांच एजेंसी FBI ने इस साइबर हमले के पीछे उत्तर कोरिया के TraderTraitor ग्रुप का हाथ बताया है. हालांकि, Binance की जांच अभी जारी है. इसलिए कंपनी की ओर से दी गई जानकारी को शुरुआती विवरण के तौर पर ही देखना चाहिए. अभी तक इस घटना की पूरी और स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है.
फर्जी नौकरी के जरिए कर्मचारियों को बनाया निशाना
Binance के मुताबिक, इस साइबर हमले की तैयारी कई महीने पहले शुरू हो गई थी. जून में कंपनी के वॉलेट सिस्टम पर काम करने वाले एक कर्मचारी ने AI कोडिंग टूल इंस्टॉल करने की कोशिश की. इस दौरान उसने एक ऐसा सॉफ्टवेयर डाउनलोड कर लिया, जिसमें पहले से ही खतरनाक कोड मौजूद था.
कंपनी ने इस समस्या का पता लगाया और कर्मचारी का डिवाइस बदल दिया. साथ ही, उससे जुड़े जरूरी एक्सेस पासवर्ड और अन्य सुरक्षा जानकारियां भी बदल दी गईं.लेकिन सितंबर में हमलावरों ने एक बार फिर कंपनी के कर्मचारी को निशाना बनाया. इस बार उन्होंने फर्जी भर्ती प्रक्रिया का सहारा लिया. कर्मचारी को कुछ लोगों ने खुद को रिक्रूटर बताया और एक कोडिंग असाइनमेंट पूरा करने के लिए कहा.
Binance के मुताबिक इस असाइनमेंट के साथ भेजी गई फाइल में खतरनाक सॉफ्टवेयर था. इसे खोलने के बाद कर्मचारी का कंप्यूटर हमलावरों के नियंत्रण में आ गया.इस तरह हमलावरों ने कंपनी के मुख्य सिस्टम पर सीधे हमला करने के बजाय ऐसे कर्मचारी को निशाना बनाया, जिसके पास पहले से ही कंपनी के सिस्टम तक पहुंच थी.
AI टूल के जरिए वॉलेट तक कैसे पहुंचे हमलावर?
Binance की शुरुआती जांच के मुताबिक, 20 अक्टूबर को हमलावरों ने कर्मचारी के कंप्यूटर और कंपनी के एक आंतरिक AI टूल का इस्तेमाल करके दूसरे कर्मचारियों के सिस्टम तक पहुंच बनाई.
इसके बाद उन्होंने सॉफ्टवेयर को सिस्टम में लागू करने से जुड़े एक एक्सेस टोकन को हासिल कर लिया. इस टोकन की मदद से वे उन सिस्टम तक पहुंचने में सफल रहे, जिनका इस्तेमाल क्रिप्टोकरेंसी ट्रांसफर को मंजूरी देने के लिए किया जाता है.
आमतौर पर किसी क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज में डिजिटल संपत्तियों को एक वॉलेट से दूसरे वॉलेट में भेजने के लिए कई सुरक्षा प्रक्रियाएं होती हैं. अगर कोई हमलावर इन प्रक्रियाओं का गलत इस्तेमाल करने में सफल हो जाता है, तो वह ग्राहकों के अलग-अलग अकाउंट में प्रवेश किए बिना भी क्रिप्टोकरेंसी ट्रांसफर कर सकता है.
29 अक्टूबर को Binance के वॉलेट से करीब 6.34 अरब डॉलर की क्रिप्टोकरेंसी हमलावरों के नियंत्रण वाले पते पर भेजी गई. कंपनी ने इसे अपने आंतरिक वॉलेट-साइनिंग सिस्टम के गलत इस्तेमाल का मामला बताया है.
Binance का कहना है कि शुरुआती जांच में वॉलेट की निजी सुरक्षा चाबियों यानी प्राइवेट कीज के लीक होने का कोई सबूत नहीं मिला है. साथ ही, अभी ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि AI टूल को ही हैक किया गया था या उसने अपने आप क्रिप्टोकरेंसी ट्रांसफर की थी.
कितना पैसा वापस मिला?
Binance के मुताबिक, करीब 2.85 अरब डॉलर की क्रिप्टोकरेंसी को फ्रीज या रोक दिया गया है. कंपनी ने यह भी कहा कि वह इस घटना से हुए वित्तीय नुकसान की भरपाई खुद करेगी और प्रभावित संपत्तियों में से 98 प्रतिशत की भरपाई कर चुकी है.
हालांकि, इन आंकड़ों को समझना जरूरी है. 6.34 अरब डॉलर की क्रिप्टोकरेंसी ट्रांसफर होने का मतलब यह नहीं है कि ग्राहकों का पूरा पैसा हमेशा के लिए खो गया.
ब्लॉकचेन एनालिटिक्स कंपनी Bitquery के अनुमान के मुताबिक, 4 नवंबर तक करीब 3.1 अरब डॉलर की क्रिप्टोकरेंसी हमलावरों के पास मौजूद थी. यह उस समय उपलब्ध आंकड़ों पर आधारित अनुमान है, न कि नुकसान का अंतिम हिसाब.
निवेशकों के लिए क्या है सबक?
किसी क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज की सुरक्षा केवल उसके वॉलेट तक सीमित नहीं होती. कर्मचारियों के कंप्यूटर, सॉफ्टवेयर, एक्सेस परमिशन और ट्रांजैक्शन को मंजूरी देने वाले सिस्टम भी सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं. निवेशकों को यह समझना चाहिए कि किसी बड़े एक्सचेंज पर भी साइबर हमला हो सकता है. इसलिए क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करते समय केवल कंपनी की लोकप्रियता नहीं, बल्कि उसकी सुरक्षा व्यवस्था और जोखिमों को भी ध्यान में रखना जरूरी है.
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(डिस्क्लेमर: यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है और इसे वित्तीय, निवेश, कानूनी या कर संबंधी सलाह नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी वित्तीय निर्णय से पहले पाठकों को विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।)