Indian Stock Market: शेयर बाजार में बुधवार, 4 नवंबर को लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में तेजी जारी रही. सेंसेक्स और निफ्टी ने करीब पांच महीने में सबसे लंबे समय तक लगातार बढ़त दर्ज की. विदेशी निवेशकों की वापसी की उम्मीद, घरेलू निवेशकों की खरीदारी और वैश्विक घटनाक्रमों से बाजार का माहौल बेहतर हुआ है.
पिछले पांच कारोबारी सत्रों में निफ्टी 50 में 5.55 फीसदी और सेंसेक्स में 5.53 फीसदी की तेजी आई है. बाजार में खरीदारी केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी अच्छी बढ़त देखने को मिली. मिडकैप इंडेक्स 1.55 फीसदी और स्मॉलकैप इंडेक्स 2 फीसदी चढ़ा.
किन शेयरों में रही सबसे ज्यादा तेजी?
बुधवार को निफ्टी 50 के शेयरों में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL) सबसे ज्यादा 4.7 फीसदी चढ़ा. इसके अलावा अडानी एंटरप्राइजेज में 4.5 फीसदी, टाइटन में 4.2 फीसदी, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज में 3.7 फीसदी और मैक्स हेल्थकेयर में 3.5 फीसदी की तेजी रही.
हालांकि, आईटी शेयरों में दबाव देखने को मिला. टीसीएस 2.5 फीसदी, एचसीएल टेक्नोलॉजीज 2.4 फीसदी और इन्फोसिस 1.8 फीसदी गिर गए. वैश्विक टेक्नोलॉजी मांग को लेकर चिंता और मुनाफावसूली के कारण इस सेक्टर में कमजोरी रही.
सेक्टर के लिहाज से निफ्टी मीडिया इंडेक्स सबसे बड़ा गेनर रहा. इसमें 4.5 फीसदी की तेजी आई और यह अपने 52 हफ्ते के नए उच्च स्तर पर पहुंच गया. वहीं, निफ्टी आईटी इंडेक्स 1.9 फीसदी गिर गया.
अमेरिकी चुनाव और विदेशी निवेशकों पर नजर
बाजार में तेजी की एक बड़ी वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की संभावित वापसी भी है. नवंबर की शुरुआत से विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार में करीब 7,200 करोड़ रुपये का निवेश कर चुके हैं. इससे 2026 में अब तक उनकी कुल बिकवाली घटकर करीब 2.68 लाख करोड़ रुपये रह गई है.
अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के नतीजे भी बाजार के लिए अहम हैं. डेमोक्रेटिक पार्टी की जीत को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के लिए झटका माना जा रहा है. इससे वैश्विक टैरिफ और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर नई उम्मीदें बन सकती हैं.
भारत के लिए यह इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत जारी है. अमेरिकी वीजा नीतियों और भारतीय पेशेवरों पर प्रतिबंधों को लेकर भी निवेशक चिंतित हैं.
कच्चे तेल की कीमतों से मिलेगी बाजार को राहत?
कच्चे तेल की कीमतें भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं. ब्रेंट क्रूड की कीमत 1 फीसदी गिरकर 102.50 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई. कच्चा तेल सस्ता होने से भारत को राहत मिल सकती है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है. इससे महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव कम हो सकता है.
एसबीआई सिक्योरिटीज के मुताबिक, बाजार की आगे की दिशा कंपनियों के तिमाही नतीजों, कच्चे तेल की कीमतों, पश्चिम एशिया के घटनाक्रम, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और विदेशी निवेशकों के रुख पर निर्भर करेगी.
निफ्टी और सेंसेक्स के लिए कौन-से स्तर अहम?
एसबीआई सिक्योरिटीज के मुताबिक, निफ्टी के लिए 23,850 से 23,870 का स्तर अहम सपोर्ट है. इसके नीचे जाने पर 23,700 तक गिरावट आ सकती है. वहीं, 24,050 से 24,070 का स्तर पार करने पर निफ्टी 24,230 तक पहुंच सकता है. चॉइस ब्रोकिंग के मुताबिक, निफ्टी के लिए 24,000 का स्तर महत्वपूर्ण है. इसके ऊपर टिकने पर 24,500 से 24,800 तक तेजी की संभावना बन सकती है. नीचे की तरफ 23,650 से 23,700 का स्तर सपोर्ट देगा. सेंसेक्स के लिए 77,500 का स्तर अहम रेजिस्टेंस है. इसके ऊपर टिकने पर 78,200 तक तेजी संभव है. वहीं, 76,900 से 77,000 का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट रहेगा.