Urea Price Fall In India: रबी फसलों की बुवाई से पहले किसानों के लिए राहत की खबर सामने आई है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की कीमतों में नरमी आने से भारत को अगस्त के मुकाबले करीब 10 फीसदी सस्ती दर पर खाद मिलने की संभावना बनी है. इससे खाद की खरीद लागत घटाने और सरकार के उर्वरक सब्सिडी खर्च पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि किसानों के लिए यूरिया की खुदरा कीमत भी 10 फीसदी कम हो जाएगी.
17 लाख टन यूरिया आयात करने की तैयारी
Goodreturns की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी कंपनी इंडियन पोटाश लिमिटेड (IPL) ने रबी सीजन से पहले 17 लाख टन यूरिया आयात करने के लिए टेंडर जारी किया है. इसमें पश्चिमी तट के लिए 10 लाख टन और पूर्वी तट के लिए 7 लाख टन यूरिया की खरीद शामिल है.
रिपोर्ट के अनुसार, इस टेंडर में पूर्वी तट के लिए सबसे कम बोली 352.10 डॉलर प्रति टन और पश्चिमी तट के लिए 356.25 डॉलर प्रति टन रही. अगस्त में जारी एक अन्य टेंडर में शुरुआती कीमतें करीब 390 से 394 डॉलर प्रति टन थीं. इस तुलना से आयात कीमतों में लगभग 10 फीसदी की नरमी का संकेत मिलता है.
मांग से तीन गुना से ज्यादा आपूर्ति के प्रस्ताव
रिपोर्ट में बताया गया है कि 17 लाख टन यूरिया की खरीद के लिए जारी टेंडर पर अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने करीब 53.5 लाख टन की पेशकश की. इससे संकेत मिलता है कि निर्यातकों के बीच प्रतिस्पर्धा और उपलब्ध आपूर्ति से भारत को बेहतर कीमतों पर खाद खरीदने का अवसर मिल सकता है.
रबी सीजन में गेहूं, सरसों और अन्य सर्दियों की फसलों की बुवाई के दौरान यूरिया की मांग महत्वपूर्ण रहती है. ऐसे में समय पर आयात, परिवहन और राज्यों तक वितरण सुनिश्चित करना जरूरी होगा.
क्या किसानों को सस्ता मिलेगा यूरिया?
भारत में यूरिया की खुदरा कीमत सरकार नियंत्रित करती है. केंद्र सरकार के उपलब्ध आधिकारिक विवरण के अनुसार, 45 किलोग्राम यूरिया बैग का निर्धारित मूल्य 242 रुपये है, जिसमें नीम कोटिंग और लागू करों से संबंधित अतिरिक्त शुल्क अलग हो सकते हैं. सरकार यूरिया की वास्तविक लागत और किसानों से मिलने वाली रकम के बीच का अंतर सब्सिडी के रूप में देती है.
इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें घटने का सीधा फायदा किसानों को खुदरा मूल्य में कटौती के रूप में मिलना जरूरी नहीं है. इससे सरकार की खरीद लागत और सब्सिडी खर्च को राहत मिल सकती है.
रबी सीजन में खाद की उपलब्धता पर नजर
रबी सीजन में किसानों के लिए सबसे अहम बात खाद की समय पर उपलब्धता होगी. आयात की कम कीमतें राहत दे सकती हैं, लेकिन अंतिम स्थिति आपूर्ति, वितरण और स्थानीय मांग पर निर्भर करेगी. किसानों को सलाह है कि वे खाद की खरीद अधिकृत केंद्रों से करें और अपनी फसल की जरूरत के अनुसार ही उर्वरक का इस्तेमाल करें.