Indian Army Story: अनुशासन और मेहनत की मिसाल बनीं कैप्टन हंसजा शर्मा (Captain Hansja Sharma) ने 27 वर्ष की उम्र में रुद्र आर्म्ड हेलीकॉप्टर उड़ाकर भारतीय सेना की पहली महिला पायलट बनकर इतिहास रच दिया.
Indian Army Success Story: अनुशासन, कड़ी मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर सपनों को सच किया जा सकता है, इसका जीवंत उदाहरण कैप्टन हंसजा शर्मा (Captain Hansja Sharma) हैं. उन्होंने एडवांस्ड रुद्र आर्म्ड हेलीकॉप्टर उड़ाने की योग्यता हासिल कर भारतीय सेना की पहली महिला पायलट बनकर इतिहास रच दिया है. सिर्फ 27 साल की उम्र में हासिल की गई यह सफलता न केवल सेना के लिए गौरव का क्षण है, बल्कि देश की अनगिनत युवतियों के लिए आगे बढ़ने की मजबूत प्रेरणा भी है.
कैप्टन हंसजा शर्मा जम्मू की रहने वाली है. उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई सेंट जेवियर्स कॉन्वेंट स्कूल, बरनाई से पूरी की. इसके बाद उन्होंने परेड कॉलेज, जम्मू से ग्रेजुएशन किया. भारतीय सेना में चयन से पहले वे जम्मू विश्वविद्यालय के जूलॉजी विभाग से भी जुड़ी रहीं. हालांकि, सेना में पहुंचने का रास्ता उनके लिए आसान नहीं था.
चयन प्रक्रिया के दौरान कैप्टन हंसजा को अस्थाई रिजेक्शन (TR) का सामना करना पड़ा. लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय अपने सपने को प्राथमिकता दी. केवल 15 दिनों के भीतर उन्होंने मेडिकल आवश्यकताओं को पूरा किया, जिसमें एक लंबी नाक की सर्जरी भी शामिल थी. इसके बाद उन्होंने गर्व के साथ ऑलिव ग्रीन वर्दी पहनकर भारतीय सेना में कदम रखा.
नासिक स्थित कॉम्बैट आर्मी एविएशन ट्रेनिंग स्कूल (CAATS) में उनका प्रशिक्षण सफ़र ऐतिहासिक साबित हुआ. कैप्टन शर्मा ने अपने कोर्स में पहला स्थान हासिल किया और सिल्वर चीता ट्रॉफी जीतने वाली पहली महिला अधिकारी बनीं. यह ट्रॉफी सर्वश्रेष्ठ कॉम्बैट एविएटर को दी जाती है और इसे पाना किसी भी सैन्य पायलट के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है.
आर्मी डे परेड 2026 के दौरान कैप्टन हंसजा शर्मा ने 251 आर्मी एविएशन स्क्वाड्रन का नेतृत्व किया, जिसमें HELINA मिसाइल सिस्टम का प्रभावशाली प्रदर्शन किया गया. यह दृश्य भारतीय सेना में महिलाओं की बढ़ती भूमिका और भरोसे को दर्शाता है.
कैप्टन शर्मा ने एयर फोर्स अकादमी के अंतर्गत आयोजित 107वें एयर ट्रैफिक मैनेजमेंट और एयर लॉज़ (बेसिक) कोर्स में भी ऑर्डर ऑफ मेरिट में पहला स्थान प्राप्त किया. यह उपलब्धि उनके बहुआयामी स्किल और प्रोफेशनल्स एफिशिएंसी को दर्शाती है.
जम्मू की रहने वाली कैप्टन हंसजा शर्मा वरिष्ठ पत्रकार श्रीमती रश्मि शर्मा की पुत्री हैं. उनकी कहानी यह साबित करती है कि सपनों की उड़ान के लिए हौसले पंख बन जाते हैं. वह आज भारतीय रक्षा बलों में महिला सशक्तिकरण, साहस और उत्कृष्टता की सशक्त पहचान बन चुकी हैं.
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