UPSC Success Story: सपने तब सच होते हैं जब इरादे मजबूत हों. केरल की श्रीजा जे एस (Sreeja JS) ने अपने घर की दीवार पर IFS बनने का लक्ष्य लिखा और उसी संकल्प ने उन्हें UPSC में शानदार सफलता दिलाई.
UPSC Success Story: अगर लक्ष्य साफ हो और मेहनत सच्ची हो, तो सबसे कठिन रास्ते भी मंज़िल तक पहुंचा देते हैं. केरल के तिरुवनंतपुरम जिले के नारुवामूडू गांव की रहने वाली श्रीजा जे एस (Sreeja JS) की कहानी इस बात का प्रमाण है कि बड़े सपने देखने के लिए परिस्थितियां नहीं, बल्कि हिम्मत चाहिए. लगभग दो साल पहले उन्होंने अपने तीन कमरों वाले छोटे से घर की दीवार पर एक सफेद कागज चिपकाया था, जिस पर लिखा था कि श्रीजा जे एस, IFS, AIR 15 UPSC 2025-26. यह सिर्फ एक वाक्य नहीं था, बल्कि उनका रोज़ का संकल्प था.
जब भी पढ़ाई के दौरान थकान या निराशा महसूस होती, वे उस कागज को देखकर खुद को फिर से प्रेरित करती थीं. आखिरकार इस सप्ताह उनका सपना सच हो गया, जब उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा में 57वीं रैंक हासिल की.
श्रीजा की सफलता केवल उनकी मेहनत का परिणाम नहीं है, बल्कि उनके माता-पिता के त्याग और संघर्ष की भी कहानी है. उनके पिता जयकुमार एक दिहाड़ी मजदूर हैं, जो काम की तलाश में कई बार 40 किलोमीटर तक साइकिल चलाते हैं. वहीं उनकी मां शीजा एक गृहिणी हैं, जिन्होंने हमेशा सपना देखा कि उनकी बेटी सिविल सर्वेंट बने.
परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी, लेकिन फिर भी उन्होंने बेटी की पढ़ाई में कभी कमी नहीं आने दी. जयकुमार ने बेटी की तैयारी के लिए लगभग 8 लाख रुपये का कर्ज लिया और घर का सोना तक गिरवी रख दिया, जिसमें उनकी पत्नी का मंगलसूत्र भी शामिल था.
श्रीजा बचपन से ही अपने लक्ष्यों को लिखकर उन्हें हासिल करने की आदत रखती थीं. उन्होंने बताया कि कक्षा 10वीं में उन्होंने दीवार पर “पूरा A+” लिखकर लगाया था और वह लक्ष्य हासिल भी कर लिया. कक्षा 12वीं में भी उन्होंने 1200 अंक पाने का लक्ष्य लिखा था. मई 2024 में UPSC की तैयारी शुरू करते समय उन्होंने फिर वही तरीका अपनाया और अपना लक्ष्य दीवार पर लिख दिया.
मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस में पोस्ट ग्रेजुएशन करने वाली श्रीजा पहले IAS अधिकारी बनना चाहती थीं. लेकिन कॉलेज में राजनीति, अंतरराष्ट्रीय संबंध और कूटनीति की पढ़ाई के बाद उनका झुकाव इंडियन फॉरेन सर्विस की ओर हो गया.
श्रीजा कहती हैं कि अपने माता-पिता के संघर्ष को देखकर ही उन्होंने यह रास्ता चुना. वे चाहती थीं कि उनके परिवार की मुश्किलें खत्म हों और वे समाज में बदलाव लाने वाली अधिकारी बनें. आज उनकी सफलता ने न केवल उनके परिवार की उम्मीदों को नया जीवन दिया है.
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