Anil Gurav Story: मुंबई का विव रिचर्ड्स कहे जाने वाले अनिल गुरव का 31 मार्च, 2026 को निधन हो गया. जिसकी बल्लेबाजी देखकर सचिन तेंदुलकर बैटिंग सीखते थे. भाई की वजह से पुलिस ने इतना पीटा कि क्रिकेट खेलने के लायक नहीं बचे.
अनिल गुरव की बल्लेबाजी देखकर सचिन तेंदुलकर बैटिंग सीखा करते थे.
Anil Gurav Story: जब भी क्रिकेट की दुनिया में बदकिस्मत खिलाड़ियों की बात होती है तो अमोल मजूमदार, राजिंदर गोयल और पद्माकर शिवालकर जैसे नाम अक्सर सामने आते हैं. हालांकि इन खिलाड़ियों को कम से कम घरेलू क्रिकेट में अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका तो मिला. लेकिन आज हम जिस खिलाड़ी की बात करने जा रहे हैं. जिसे कभी मुंबई का विव रिचर्ड्स कहा जाता था. जिसकी बल्लेबाजी देखने के लिए सचिन तेंदुलकर के कोच रमाकांत आचरेकर लगातार सचिन से आग्रह करते थे.
सचिन तेंदुलकर खुद इस खिलाड़ी को सर कहकर संबोधित करते थे. हम अनिल गुरव की बात कर रहे हैं. जिनका 31 मार्च, 2026 को निधन हो गया.
अनिल गुरव का किस्मत ने साथ नहीं दिया. जिसकी वजह से वो भारत के लिए क्रिकेट नहीं खेल पाए. बताया जा रहा है कि अनिल गुरव ने कोच रमाकांत आचरेकर के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लिया. सचिन और कांबली जैसे दिग्गज बल्लेबाज अक्सर उन्हें बल्लेबाजी करते हुए देखते थे. संयोग से अनिल और सचिन दोनों के बड़े भाइयों का नाम अजीत था. जहां एक तरफ सचिन के बड़े भाई अजीत ने भारत के लिए खेलने की उनकी उम्मीदों को संवारा. तो वहीं दूसरी तरफ अनिल गुरव के भाई की वजह से एक प्रतिभाशाली बल्लेबाज गुमनामी के अंधेरों में खो गया.
अनिल गुरव ने मुंबई अंडर-19 टीम के लिए क्रिकेट खेला और अपनी आक्रामक बल्लेबाजी शैली के लिए मशहूर थे. उस दौर में उन्हें व्यापक रूप से ‘मुंबई का विव रिचर्ड्स’ कहा जाता था. हर किसी को पूरी उम्मीद थी कि अपने समकालीनों में सबसे पहले भारतीय राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने वाले वही होंगे. लेकिन किस्मत का शायद कुछ और ही मंजूर था. 1990 के दशक की शुरुआत में जब अनिल क्रिकेट के मैदान पर अपना नाम कमा रहे थे, उसी समय उनके बड़े भाई ‘शार्प शूटर’ के तौर पर मुंबई पुलिस की नज़रों में आ रहे थे.
अनिल को सिर्फ अजीत का छोटा भाई होने की भारी कीमत चुकानी पड़ी. पुलिस, जो लगातार अजीत की तलाश में रहती थी, अक्सर अनिल और उनकी मां को पुलिस स्टेशन ले जाती थी, जहां वे उन्हें यातनाएं देते थे. जहां मैदान पर अनिल को कोई मुश्किल नहीं होती थी, वहीं मैदान से बाहर कदम रखते ही उन्हें लगातार डर सताने लगा; उन्हें कभी नहीं पता होता था कि पुलिस कब आ धमकती और उन्हें उठाकर ले जाती. अपने बड़े भाई के कारनामों की वजह से उनकी परछाई से बचने के लिए उन्होंने अपनी मां के साथ घर बदल लिया. लेकिन फिर भी पुलिस ने उनका पीछा नहीं छोड़ा.
बताया जा रहा है कि पुलिस ने असल में अजीत को कभी आमने-सामने देखा ही नहीं था; इसी गलतफहमी में उन्होंने अनिल को ही अजीत समझ लिया, उसे पकड़ लिया और हिरासत में ले लिया. उन्होंने अनिल को इतनी बुरी तरह पीटा कि अनिल फिर कभी क्रिकेट खेलने लायक नहीं रहा. इस तरह, खेल जगत ने एक होनहार खिलाड़ी खो दिया. आज, उसकी कॉलोनी के लोग अनिल को एक बेहतरीन बल्लेबाज़ के तौर पर नहीं, बल्कि एक शराबी के तौर पर जानते हैं.
The closing date of the four Dhams is 2026: गंगोत्री धाम के कपाट 10 नवंबर…
Gurugram News: गुरुग्राम में बिजली गुल होने से लोगों को काफी परेशानी हो रही है.…
Shabnam murder case: अमरोहा के बावनखेड़ी गांव में शबनम हत्याकांड के दोषी सलीम को अपनी…
Jharkhand News: झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में एक देवर ने अपनी भाभी को घर…
UP News: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में एक गाय के मरने के बाद हड़कंप मच…
Friday OTT Releases: 23 अक्टूबर 2026 को ओटीटी पर सस्पेंस थ्रिलर, क्राइम ड्रामा, तमिल फिल्म,…