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Lonavala Crime News: राइफल की गोली से मौत, पहले हादसा माना…फिर पोस्टमार्टम ने खोला राज, दादा गिरफ्तार

Lonavala Crime News: पुणे के लोनावला में 33 वर्षीय अभय माणिक मराठे की गोली लगने से हुई मौत को पहले हादसा माना गया था, लेकिन पोस्टमार्टम और पुलिस जांच के बाद मामला हत्या में बदल गया. पुलिस का आरोप है कि संपत्ति और लेन-देन को लेकर हुए विवाद के दौरान अभय के 83 वर्षीय दादा मोतीराम मराठे ने लाइसेंसी राइफल से उन पर गोली चलाई.

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Last Updated: October 6, 2026 18:19:40 IST

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Lonavala Crime News: पुणे के लोनावला में 5 अक्टूबर को 33 वर्षीय अभय माणिक मराठे की गोली लगने से हुई मौत को शुरुआत में राइफल से हुए हादसे का मामला माना गया था. लेकिन पोस्टमार्टम और घटनास्थल की जांच के बाद पुलिस को दुर्घटना की थ्योरी संदिग्ध लगी और मामला हत्या में बदल दिया गया. पुलिस का आरोप है कि संपत्ति और पैसों को लेकर विवाद के दौरान अभय के 83 वर्षीय दादा मोतीराम मराठे ने लाइसेंसी 12 बोर राइफल से उन पर गोली चलाई. इस मामले में मोतीराम को गिरफ्तार किया गया है और परिवार के पांच अन्य सदस्यों के खिलाफ भी कथित तौर पर सबूत मिटाने और आरोपी को बचाने की कोशिश के आरोप में केस दर्ज किया गया है. लोनावला के भुशी गांव स्थित होटल मोतीराम के परिसर में हुई गोलीबारी ने जांच की दिशा ही बदल दी. पहले पुलिस के सामने मामला राइफल साफ करते समय अचानक गोली चलने का था, लेकिन जांच आगे बढ़ने के साथ पुलिस को घटनास्थल और चोट के पैटर्न से कई सवाल मिले. अब पुलिस इस मौत को जानबूझकर की गई फायरिंग मानकर जांच कर रही है.

पहले हादसा माना, फिर पोस्टमार्टम से बढ़ा शक

5 अक्टूबर को अभय माणिक मराठे को गोली लगी थी. गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. शुरुआती जानकारी के आधार पर पुलिस ने इसे आकस्मिक फायरिंग का मामला मानते हुए जांच शुरू की थी. उस समय बताया गया था कि लाइसेंसी राइफल साफ करते हुए अचानक गोली चल गई थी. इसके बाद शव का पोस्टमार्टम कराया गया. पुलिस के मुताबिक, चोट की प्रकृति और गोली लगने की स्थिति ने दुर्घटना वाली कहानी पर सवाल खड़े किए. जांचकर्ताओं को लगा कि जिस तरह से गोली शरीर में लगी, वह महज राइफल साफ करते समय अचानक फायर होने की घटना से मेल नहीं खा रही थी. इसके बाद पुलिस ने हत्या की दिशा में जांच शुरू कर दी.

होटल के स्टाफ से पूछताछ, घटनास्थल को फिर खंगाला

पोस्टमार्टम के बाद पुणे ग्रामीण पुलिस की लोकल क्राइम ब्रांच और लोनावला सिटी पुलिस ने होटल परिसर में मौजूद लोगों से पूछताछ शुरू की. होटल के कर्मचारियों, वेटरों और वहां मौजूद दूसरे लोगों के बयान लिए गए. पुलिस ने घटनास्थल से मिले भौतिक साक्ष्यों और अलग अलग बयानों को जोड़कर उस समय की पूरी तस्वीर समझने की कोशिश की. जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को कथित तौर पर ऐसी जानकारियां मिलीं, जिनसे दुर्घटना वाली थ्योरी कमजोर पड़ती गई और मामला हत्या की ओर बढ़ा.

संपत्ति और पैसों के विवाद में गोली चलाने का आरोप

पुलिस के मुताबिक, अभय और उनके 83 वर्षीय दादा मोतीराम मराठे के बीच संपत्ति और आर्थिक मामलों को लेकर विवाद चल रहा था. जांचकर्ताओं का दावा है कि 5 अक्टूबर को दोनों के बीच इसी तरह के किसी लेन देन या संपत्ति से जुड़े मुद्दे पर बहस हुई थी. आरोप है कि विवाद बढ़ने के बाद मोतीराम ने अपनी लाइसेंसी राइफल उठाई और अभय पर गोली चला दी. गोली अभय के सीने में लगी और वह गंभीर रूप से घायल हो गए. बाद में अस्पताल में उनकी मौत हो गई. पुलिस ने इस घटनाक्रम के आधार पर मोतीराम मराठे को हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया है.

हादसे की कहानी पर भी उठे सवाल

पुलिस की जांच का एक अहम हिस्सा यह भी है कि शुरुआती तौर पर घटना को दुर्घटना के रूप में क्यों पेश किया गया. जांचकर्ताओं ने कथित तौर पर पाया कि घटनास्थल के कुछ पहलू उस कहानी से मेल नहीं खाते थे. पुलिस का आरोप है कि गोलीबारी के बाद घटनास्थल को इस तरह पेश करने की कोशिश की गई, जिससे मामला हादसा लगे. इसी वजह से अब यह भी जांच का विषय है कि घटना के बाद किसने क्या किया और पुलिस को शुरुआती जानकारी किस आधार पर दी गई थी.

परिवार के पांच अन्य सदस्यों पर भी केस

हत्या की जांच के साथ पुलिस ने परिवार के पांच अन्य सदस्यों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया है. आरोप है कि घटना के बाद इन लोगों ने मुख्य आरोपी को बचाने और कथित तौर पर सबूत मिटाने की कोशिश की. पुलिस के अनुसार, कुछ लोगों ने घटनास्थल पर मौजूद चीजों को हटाने, हथियार को दूसरी जगह ले जाने और सीसीटीवी से जुड़ी सामग्री को हटाने जैसी गतिविधियों में भूमिका निभाई हो सकती है. जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन आरोपों में किसकी वास्तविक भूमिका थी.

दो लाइसेंसी राइफलें रखता था मोतीराम

पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि मोतीराम मराठे के पास दो लाइसेंसी राइफलें थीं. इनमें एक 12 बोर राइफल थी. पुलिस के मुताबिक, उनके पास मौजूद हथियार कई दशक पुराने थे और उन्हें शिकार में भी रुचि थी. अब जांच एजेंसियां दोनों हथियारों की जांच कर रही हैं और यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि अभय की मौत में इस्तेमाल की गई राइफल कौन सी थी. हथियारों से जुड़े रिकॉर्ड और फॉरेंसिक साक्ष्यों को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है.

पूर्व नगर पार्षद के बेटे थे अभय

मृतक अभय माणिक मराठे लोनावला के पूर्व नगर पार्षद माणिक मराठे के बेटे थे. उनकी मौत के बाद शुरुआत में परिवार और पुलिस के सामने मामला एक हादसे के रूप में आया था, लेकिन कुछ ही समय में जांच की दिशा बदल गई. अब पुलिस घटना से पहले की बहस, गोली चलने का तरीका, हथियार, घटनास्थल के साक्ष्य और परिवार के दूसरे सदस्यों की भूमिका को जोड़कर पूरी टाइमलाइन तैयार कर रही है. पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि गोलीबारी की पूरी वजह क्या थी और कथित तौर पर घटना को छिपाने में किसकी क्या भूमिका रही.

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पहले हादसा माना, फिर पोस्टमार्टम से बढ़ा शक

5 अक्टूबर को अभय माणिक मराठे को गोली लगी थी. गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. शुरुआती जानकारी के आधार पर पुलिस ने इसे आकस्मिक फायरिंग का मामला मानते हुए जांच शुरू की थी. उस समय बताया गया था कि लाइसेंसी राइफल साफ करते हुए अचानक गोली चल गई थी. इसके बाद शव का पोस्टमार्टम कराया गया. पुलिस के मुताबिक, चोट की प्रकृति और गोली लगने की स्थिति ने दुर्घटना वाली कहानी पर सवाल खड़े किए. जांचकर्ताओं को लगा कि जिस तरह से गोली शरीर में लगी, वह महज राइफल साफ करते समय अचानक फायर होने की घटना से मेल नहीं खा रही थी. इसके बाद पुलिस ने हत्या की दिशा में जांच शुरू कर दी.

होटल के स्टाफ से पूछताछ, घटनास्थल को फिर खंगाला

पोस्टमार्टम के बाद पुणे ग्रामीण पुलिस की लोकल क्राइम ब्रांच और लोनावला सिटी पुलिस ने होटल परिसर में मौजूद लोगों से पूछताछ शुरू की. होटल के कर्मचारियों, वेटरों और वहां मौजूद दूसरे लोगों के बयान लिए गए. पुलिस ने घटनास्थल से मिले भौतिक साक्ष्यों और अलग अलग बयानों को जोड़कर उस समय की पूरी तस्वीर समझने की कोशिश की. जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को कथित तौर पर ऐसी जानकारियां मिलीं, जिनसे दुर्घटना वाली थ्योरी कमजोर पड़ती गई और मामला हत्या की ओर बढ़ा.

संपत्ति और पैसों के विवाद में गोली चलाने का आरोप

पुलिस के मुताबिक, अभय और उनके 83 वर्षीय दादा मोतीराम मराठे के बीच संपत्ति और आर्थिक मामलों को लेकर विवाद चल रहा था. जांचकर्ताओं का दावा है कि 5 अक्टूबर को दोनों के बीच इसी तरह के किसी लेन देन या संपत्ति से जुड़े मुद्दे पर बहस हुई थी. आरोप है कि विवाद बढ़ने के बाद मोतीराम ने अपनी लाइसेंसी राइफल उठाई और अभय पर गोली चला दी. गोली अभय के सीने में लगी और वह गंभीर रूप से घायल हो गए. बाद में अस्पताल में उनकी मौत हो गई. पुलिस ने इस घटनाक्रम के आधार पर मोतीराम मराठे को हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया है.

हादसे की कहानी पर भी उठे सवाल

पुलिस की जांच का एक अहम हिस्सा यह भी है कि शुरुआती तौर पर घटना को दुर्घटना के रूप में क्यों पेश किया गया. जांचकर्ताओं ने कथित तौर पर पाया कि घटनास्थल के कुछ पहलू उस कहानी से मेल नहीं खाते थे. पुलिस का आरोप है कि गोलीबारी के बाद घटनास्थल को इस तरह पेश करने की कोशिश की गई, जिससे मामला हादसा लगे. इसी वजह से अब यह भी जांच का विषय है कि घटना के बाद किसने क्या किया और पुलिस को शुरुआती जानकारी किस आधार पर दी गई थी.

परिवार के पांच अन्य सदस्यों पर भी केस

हत्या की जांच के साथ पुलिस ने परिवार के पांच अन्य सदस्यों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया है. आरोप है कि घटना के बाद इन लोगों ने मुख्य आरोपी को बचाने और कथित तौर पर सबूत मिटाने की कोशिश की. पुलिस के अनुसार, कुछ लोगों ने घटनास्थल पर मौजूद चीजों को हटाने, हथियार को दूसरी जगह ले जाने और सीसीटीवी से जुड़ी सामग्री को हटाने जैसी गतिविधियों में भूमिका निभाई हो सकती है. जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन आरोपों में किसकी वास्तविक भूमिका थी.

दो लाइसेंसी राइफलें रखता था मोतीराम

पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि मोतीराम मराठे के पास दो लाइसेंसी राइफलें थीं. इनमें एक 12 बोर राइफल थी. पुलिस के मुताबिक, उनके पास मौजूद हथियार कई दशक पुराने थे और उन्हें शिकार में भी रुचि थी. अब जांच एजेंसियां दोनों हथियारों की जांच कर रही हैं और यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि अभय की मौत में इस्तेमाल की गई राइफल कौन सी थी. हथियारों से जुड़े रिकॉर्ड और फॉरेंसिक साक्ष्यों को भी जांच का हिस्सा बनाया गया है.

पूर्व नगर पार्षद के बेटे थे अभय

मृतक अभय माणिक मराठे लोनावला के पूर्व नगर पार्षद माणिक मराठे के बेटे थे. उनकी मौत के बाद शुरुआत में परिवार और पुलिस के सामने मामला एक हादसे के रूप में आया था, लेकिन कुछ ही समय में जांच की दिशा बदल गई. अब पुलिस घटना से पहले की बहस, गोली चलने का तरीका, हथियार, घटनास्थल के साक्ष्य और परिवार के दूसरे सदस्यों की भूमिका को जोड़कर पूरी टाइमलाइन तैयार कर रही है. पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि गोलीबारी की पूरी वजह क्या थी और कथित तौर पर घटना को छिपाने में किसकी क्या भूमिका रही.

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