Holi ke Rivaj: ज्योतिष गणना के अनुसार, इस बार होलिका दहन 3 मार्च होगा. इसलिए होली 4 मार्च को होगी. खास बात यह है कि, शादी के बाद नई बहुओं के लिए पहली होली को लेकर देश के अलग-अलग क्षेत्रों कुछ अलग प्रथाएं प्रचलित हैं. कई जगह नवविवाहिताओं को पहली होली ससुराल में मनाने की मनाही होती है. असल में इसे मनाने के पीछे की वजहें और मान्यताएं क्या हैं? तो आइए जानते हैं आखिर क्या है इन रिवाजों मायने-
जानिए, नई दुल्हन पहली होली ससुराल में क्यों नहीं मनाती. (Canva)
Holi ke Rivaj: होली हिन्दू धर्म के सबसे बड़े त्योहारों में से एक है. यह त्योहार पूरी निष्ठा और परंपरा के साथ मनाया जाता है. माना जाता है कि, होलिका दहन के साथ सभी बुराइयों का नाश हो जाता है. इसीलिए फाल्गुन पूर्णिमा की रात लोग मिलकर होलिका जलाते हैं और भगवान से प्रार्थना करते हैं कि उनके जीवन से दुख, तनाव और बुरी ऊर्जा दूर हो जाए. ज्योतिष गणना के अनुसार, इस बार होलिका दहन 3 मार्च होगा. इसलिए होली 4 मार्च को होगी. खास बात यह है कि, शादी के बाद नई बहुओं के लिए पहली होली को लेकर देश के अलग-अलग क्षेत्रों कुछ अलग प्रथाएं प्रचलित हैं. कई जगह नवविवाहिताओं को पहली होली ससुराल में मनाने की मनाही होती है. वहीं, कई जगह सास और बहू एक साथ होलिका दहन नहीं देखती हैं. असल में इसे मनाने के पीछे की वजहें और मान्यताएं क्या हैं? तो आइए जानते हैं आखिर क्या है इन रिवाजों मायने-
ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि, शादी के बाद नई को बहू को होली के त्योहार पर मायके भेज देने को लेकर कई मान्यताएं और धारणाएं हैं. उत्तर भारत में यह प्रथा काफी चलन में है. यह माना जाता है कि शादी के बाद नवविवाहिता अगर पहली होली ससुराल में मनाती हैं, तो यह अशुभ हो सकता है.
शास्त्रों में कहा गया है कि होलिका, जो राजा हिरण्यकश्यप की बहन थी, प्रहलाद को मारने के लिए आग में बैठी थी. हालांकि उसे अग्नि से बचने का वरदान मिला था. लेकिन कुछ दिन पहले शादी हुई बहुओं के लिए होलिका दहन देखना अशुभ माना गया है. इसे होलिका की चिता भी कहा जाता है और नवविवाहिता के लिए इसे देखना अनिष्ट का प्रतीक माना जाता है.
धार्मिक मान्यता ये भी है कि अगर सास-बहू साथ में होलिका दहन देखती हैं, तो संबंधों में खटास आती है. इसलिए भी होली के पहले नई बहू को मायके भेजने की परंपरा चली आ रही है.
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शादी के पहले साल में ग्रहों की स्थिति कभी अनुकूल तो कभी तो कभी प्रतिकूल होती है. फाल्गुन महीने की पूर्णिमा को जब होलिका दहन होता है, तब अग्नि का प्रभाव बहुत ज्यादा होता है. ससुराल में नई बहू का प्रवेश एक नए भाग्य का उदय माना जाता है, और किसी भी अशुभ प्रभाव से बचाने के लिए उसे इस समय मायके में रहने की सलाह दी जाती है.
एक मान्यता है कि विवाह के बाद नई बहू के पहली होली पर ससुराल में रहने से घर में क्लेश बढ़ता है. आपसी संबंधों में भी मनमुटाव आता है. इस प्रथा के पीछे एक और वजह छिपी हुई है. दरअसल, शादी के बाद अक्सर बहू के लिए कई प्रतिबंध और मर्यादाएं होती हैं, जिनमें उसे रहना होता है. ऐसे में सबके सामने पति के साथ होली खेलना काफी असहज कर सकता है. इसलिए भी पहली होली बहू अपनी मायके में मनाती है.
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