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शिव मंदिरों में शिवलिंग के ठीक सामने ही क्यों बैठते हैं नंदी? जानिए इसके पीछे की धार्मिक मान्यता

Nandi worship: सोमवार का दिन भगवान शिव की पूजा के लिए विशेष माना जाता है और इस दिन भक्त शिवलिंग का अभिषेक करते हैं. लगभग हर शिव मंदिर में शिवलिंग के ठीक सामने नंदी की मूर्ति स्थापित होती है. आइए जानते हैं इसके पौराणिक कथा के बारे में.

Nandi Mythological Story: सोमवार के दिन भगवान शिव के भक्त शिवलिंग का जल, दूध और बेलपत्र से अभिषेक करते हैं और महादेव से सुख-समृद्धि की कामना करते हैं. आपने लगभग हर शिव मंदिर में देखा होगा कि शिवलिंग के ठीक सामने नंदी की मूर्ति स्थापित होती है. नंदी शांत भाव से शिवलिंग की ओर निहारते हुए बैठे रहते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि नंदी को हमेशा शिवलिंग के सामने ही क्यों स्थापित किया जाता है? इसके पीछे एक गहरी पौराणिक कथा और धार्मिक मान्यता छिपी हुई है.

 पौराणिक कथा के अनुसार ऋषि शिलाद की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पुत्र के रूप में नंदी का वरदान दिया. बाद में नंदी ने भी शिवजी की कठोर तपस्या की, जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अजर-अमर होने का आशीर्वाद दिया और अपना वाहन तथा परम भक्त बना लिया.इसी कारण शिव मंदिरों में नंदी को शिवलिंग के सामने स्थापित किया जाता है. धार्मिक मान्यता है कि नंदी भक्तों की प्रार्थना भगवान शिव तक पहुंचाते हैं, इसलिए उनकी पूजा के बिना शिव पूजा अधूरी मानी जाती है.

नंदी कैसे बने भगवान शिव के प्रिय वाहन?

पुराणों में बताया गया है कि प्राचीन समय में शिलाद नाम के एक महान ऋषि हुआ करते थे. वे भगवान शिव के परम भक्त थे और दिन-रात उनकी आराधना में लीन रहते थे. लेकिन उनके जीवन में एक कमी थी-उनकी कोई संतान नहीं थी. एक दिन उनके पितरों ने उन्हें बताया कि यदि उनकी संतान नहीं हुई तो उनका वंश आगे नहीं बढ़ पाएगा.

यह सुनकर ऋषि शिलाद चिंतित हो गए और उन्होंने भगवान शिव की कठोर तपस्या शुरू कर दी. उनकी भक्ति और समर्पण से प्रसन्न होकर महादेव प्रकट हुए और उन्हें एक दिव्य पुत्र का वरदान दिया. कुछ समय बाद जब ऋषि शिलाद खेत में हल चला रहे थे, तब उन्हें भूमि से एक बालक प्राप्त हुआ. उन्होंने उस बालक का नाम ‘नंदी’ रखा और उसका पालन-पोषण बड़े प्रेम से किया.

नंदी की तपस्या से प्रसन्न हुए भगवान शिव

एक बार शिलाद ऋषि के आश्रम में दो महात्मा आए. उन्होंने बताया कि नंदी की आयु बहुत कम है और वह केवल आठ वर्ष तक ही जीवित रहेंगे. यह सुनकर शिलाद ऋषि बहुत दुखी हो गए. जब नंदी को इस बात का पता चला तो उन्होंने अपने पिता को सांत्वना दी और कहा कि उन्हें भगवान शिव पर पूर्ण विश्वास है.इसके बाद नंदी ने स्वयं महादेव की कठोर तपस्या शुरू कर दी. उनकी अटूट भक्ति और समर्पण देखकर भगवान शिव प्रसन्न हुए और उनके सामने प्रकट हुए. शिवजी ने नंदी को आशीर्वाद देते हुए कहा कि वे उनके ही अंश हैं, इसलिए उन्हें मृत्यु का कोई भय नहीं होगा. महादेव ने नंदी को अजर-अमर होने का वरदान दिया और उन्हें अपना वाहन तथा परम भक्त घोषित किया.

शिवलिंग के सामने नंदी की मूर्ति क्यों होती है?

भगवान शिव से वरदान मिलने के बाद नंदी हमेशा उनके समीप रहने लगे. इसी कारण शिव मंदिरों में शिवलिंग के सामने नंदी की मूर्ति स्थापित की जाती है. धार्मिक मान्यता है कि नंदी अपने स्वामी महादेव की ओर लगातार ध्यान लगाकर बैठे रहते हैं और भक्तों की प्रार्थना भगवान शिव तक पहुंचाते हैं.इसी वजह से कई भक्त शिवलिंग के दर्शन करने से पहले नंदी के कान में अपनी मनोकामना भी कहते हैं. माना जाता है कि नंदी उस इच्छा को सीधे भगवान शिव तक पहुंचा देते हैं.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियों का हम यह दावा नहीं करते कि ये जानकारी पूर्णतया सत्य एवं सटीक है. पाठकों से अनुरोध है कि इस लेख को अंतिम सत्य अथवा दावा न मानें एवं अपने विवेक का उपयोग करें. India News इसकी सत्यता का दावा नहीं करता है.

Shivashakti narayan singh

मूल रूप से चन्दौली जनपद के निवासी शिवशक्ति नारायण सिंह ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है. वर्तमान में वे इंडिया न्यूज़ के साथ कार्यरत हैं. एस्ट्रो (ज्योतिष) और लाइफ़स्टाइल विषयों पर लेखन में उन्हें विशेष रुचि और अनुभव है. इसके अलावा हेल्थ और पॉलिटिकल कवरेज से जुड़े मुद्दों पर भी वे नियमित रूप से लेखन करते हैं.तथ्यपरक, सरल और पाठकों को जागरूक करने वाला कंटेंट तैयार करना उनकी लेखन शैली की प्रमुख विशेषता है.डिजिटल मीडिया में विश्वसनीय और प्रभावी पत्रकारिता को लेकर वे निरंतर अभ्यासरत हैं.

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