Amjad Khan Sholay: शोले में गब्बर का रोल तो अमजद खान को मिल गया लेकिन उन्हें कई तरह की परेशानियां हो रही थी. कैमरा फेस करते वक्त उनकी आवाज लड़खड़ाने लगी. जानें शोले के बारे में अनकही बातें.
Amjad Khan Sholay
Amjad Khan Sholay: बॉलीवुड की गोल्डन मूवी रही शोले के कई किस्से फेमस रहे. फिल्ममेकर रमेश सिप्पी ने बताया कि जब उन्होंने ब्लॉकबस्टर शोले में अमजद खान को गब्बर के रोल के लिए कास्ट किया था, तो कई लोगों को उनके इस फैसले पर शक था. उन्हें लगा कि अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र जैसे दूसरे बड़े स्टार्स के मुकाबले वह एक्टर एक “चूहे” जैसा था. हालांकि, अमजद की शानदार परफॉर्मेंस ने सबको गलत साबित कर दिया और उन्होंने अपने विलेन वाले रोल की वजह से एक आइकॉनिक सुपरस्टार का दर्जा हासिल किया. उन्होंने वो कर दिखाया जिसका किसी को कोई अंदाजा भी नहीं था.
गब्बर को लेकर कास्टिंग विवाद के बारे में सिप्पी ने इस बात का भी काफी बाद में खुलासा किया. अमजद को पसंद नहीं करने वालों ने कहा कि इतने बड़े-बड़े स्टार के सामने एक चूहा खड़ा कर दिया. सिप्पी जानते थे कि लोगों को नहीं पता था कि उन्हें जोरदार थप्पड़ पड़ने वाला है. पूरी फिल्म में गब्बर का रोल ने अपनी अलग ही छाप छोड़ी और वही चूहा सबसे बड़ा स्टार बन गया. शोले में धर्मेंद्र और अमिताभ बच्चन दो अपराधियों, वीरू और जय की कहानी है. उन्हें संजीव कुमार द्वारा निभाए गए एक रिटायर्ड पुलिस ऑफिसर ने बेरहम डाकू गब्बर सिंह को पकड़ने के लिए हायर किया था. यह फिल्म कर्नाटक के दक्षिणी राज्य में रामनगर के पथरीले इलाके में अक्टूबर 1973 से शुरू होकर ढाई साल में शूट की गई थी.
जब शोले पहली बार रिलीज़ हुई तो इसे नेगेटिव क्रिटिकल रिव्यू मिले और कमर्शियल रिस्पॉन्स भी ठंडा रहा. लेकिन, अच्छी वर्ड-ऑफ-माउथ पब्लिसिटी की वजह से यह बॉक्स ऑफिस पर सफल हो गई. शोले को अक्सर अब तक की सबसे महान और सबसे प्रभावशाली भारतीय फिल्मों में से एक माना जाता है. शोले उस समय तक की सबसे ज़्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्म थी और हम आपके हैं कौन..! तक भारत में सबसे ज़्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी. कई रिपोर्ट्स के अनुसार, महंगाई को एडजस्ट करने के बाद भी शोले अब तक की सबसे ज़्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्मों में से एक बनी हुई है.
सीता और गीता (1972) की ज़बरदस्त सफलता के बाद 27 साल के डायरेक्टर रमेश सिप्पी ने शोले को एक बड़े पैमाने पर बनाने का सोचा और उनके पिता जीपी सिप्पी ने उस समय के हिसाब से बहुत ज़्यादा 3 करोड़ रुपये के बजट के साथ उनका साथ देने के लिए हां कर दी. यह वही थे जिन्होंने तय किया कि यह फिल्म भारत की पहली 70 mm फिल्म होगी और इसमें स्टीरियोफोनिक साउंड होगा.
गब्बर सिंह का रोल ही रमेश सिप्पी को सबसे ज़्यादा परेशान कर रहा था. गब्बर सिंह अब एक आइकॉनिक विलेन बन गया है. उसके लिए डैनी डेन्जोंगपा को साइन किया गया था लेकिन जैसे ही शूटिंग की तारीखें तय हुईं. डैनी को एहसास हुआ कि शोले की शूटिंग की तारीखें फिरोज खान की धर्मात्मा के लिए पहले से तय शूटिंग की तारीखों से टकरा रही हैं. उन्होंने शोले छोड़ने का फैसला किया और अचानक रमेश सिप्पी के मन में घबराहट होने लगी. शूटिंग कुछ ही हफ़्ते दूर थी और गब्बर सिंह मुख्य किरदारों में से एक था.
एक्टर जयंत के बेटे अमजद खान फिल्मों में ब्रेक की तलाश में थे. उन्होंने थिएटर में कुछ अच्छे रोल किए थे. राइटर सलीम खान उन्हें बचपन से जानते थे. वह संयोग से अमजद खान से मिले और डैनी डेन्जोंगपा के शोले छोड़ने के बाद उन्हें गब्बर सिंह के रोल के लिए ऑडिशन देने के लिए प्रोत्साहित किया. उन्होंने उससे कहा, “आखिरी फैसला रमेश सिप्पी का होगा, लेकिन यह एक शानदार रोल है. तुम अपनी किस्मत आज़मा सकते हो.”
अमजद खान रमेश सिप्पी से मिले, जिन्हें उनका चेहरा “दिलचस्प” लगा और उन्होंने उनसे दाढ़ी बढ़ाने को कहा. पूरे जोश के साथ अमजद खान ने खुद को रोल की तैयारी में झोंक दिया. उन्होंने जया भादुड़ी (अब बच्चन) के पत्रकार पिता तरुण कुमार भादुड़ी द्वारा लिखी गई डाकुओं पर एक किताब अभिशप्त चंबल का अध्ययन किया और स्क्रीन टेस्ट से पहले खुद को गब्बर सिंह की दुनिया में डुबो दिया. घर पर अमजद खान की गर्भवती पत्नी शैला खान ने उन्हें रिहर्सल में मदद की. उन्होंने अपने बचपन के एक धोबी से भी प्रेरणा ली, जो अपनी पत्नी को एक खास अंदाज़ में आवाज देता था. “अरे ओ शांति”. उन्होंने उस अंदाज़ को अपनी आइकॉनिक लाइन, “अरे ओ साम्भा” के लिए पूरी तरह से अपना लिया.
महीनों की तैयारी के बावजूद अमजद खान को मुश्किल हो रही थी. पुरानी आर्मी की वर्दी पहने और दांत काले किए हुए, उन्होंने महीनों तक इस रोल को जिया था. लेकिन, कैमरे का सामना करते हुए अमजद खान को मुश्किल हो रही थी. सब कुछ बनावटी, अननेचुरल लग रहा था. उनके हाथ कांप रहे थे और उनकी आवाज़ लड़खड़ा रही थी जब वह तंबाकू पीसने की डरावनी आदत की नकल करने की कोशिश कर रहे थे. कई टेक के बाद रमेश सिप्पी और कैमरामैन ने उन्हें आराम करने के लिए कहा. कई तरह की बातों के बाद गब्बर के रोल से अमजद को निकालने की अफवाहें उड़ने लगीं लेकिन रमेश सिप्पी ने कहा कि गब्बर का रोल वही करेंगे.
15 अगस्त, 1975 को, जब भारत स्वतंत्रता दिवस मना रहा था. देश में पहले से ही 51 दिनों से इमरजेंसी लगी हुई थी. नागरिक स्वतंत्रताएं खत्म कर दी गई थीं, प्रेस पर कड़ा कंट्रोल था, और तनाव बहुत ज़्यादा था. उसी दिन, रमेश सिप्पी की मास्टरपीस शोले सिनेमाघरों में आई. शोले के पोस्टर पर एक कैप्शन था जिसमें लिखा था: “अब तक की सबसे महान स्टार कास्ट! अब तक की सबसे महान कहानी!”
TRAI New Recharge Rule: TRAI ने टेलीकॉम कंपनियों के लिए नए उपभोक्ता संरक्षण नियम नोटिफाई…
IND vs WI 2nd ODI live streaming: भारत और वेस्टइंडीज के बीच 2nd ODI मैच…
Social Media Ban for Minors: सोशल मीडिया इस्तेमाल करने वाले बच्चों की सुरक्षा को ध्यान…
सैमसंग इंडिया की आफ्टर-सेल्स सर्विस पर एक बार फिर बड़ा बवाल खड़ा हो गया है.…
308 Wheels Giant Truck: यूपी की सड़कों पर 308 पहियों वाला एक विशालकाय ट्रक चर्चा…
Red Light Area: 'रेड लाइट एरिया' नाम की उत्पत्ति को लेकर कई कहानियां हैं. लाल…