Live TV
Search
Home > मनोरंजन > Anurag Kashyap: सड़क पर सोकर गुजारी रातें, फिर भी नहीं मानी हार, गैंग्स ऑफ वासेपुर से मिली पहचान

Anurag Kashyap: सड़क पर सोकर गुजारी रातें, फिर भी नहीं मानी हार, गैंग्स ऑफ वासेपुर से मिली पहचान

Anurag Kashyap: बॉलीवुड के जाने-माने एक्टर, डायरेक्टर और प्रोड्यूसर अनुराग कश्यप 54 साल के हो गए हैं. उन्होंने बॉलीवुड में बड़ा नाम कमाया है लेकिन यहां तक पहुंचने का उनका सफर काफी मुश्किल रहा. आइए जानते हैं उनके बारे में...

Written By:
Last Updated: September 9, 2026 22:16:06 IST

Mobile Ads 1x1

Anurag Kashyap: अनुराग कश्यप का नाम बॉलीवुड के उन फिल्ममेकर्स में लिया जाता है, जिन्होंने फिल्मों को अलग अंदाज में पेश किया. उनकी कहानियों में आम जिंदगी, संघर्ष, अपराध और समाज की सच्चाई को दिखाती हैं.हालांकि यहां तक पहुंचने का उनका सफर बिल्कुल आसान नहीं था. एक वक्त ऐसा भी था, जब मुंबई में काम की तलाश करते हुए उन्हें सड़कों और फुटपाथ पर रात गुजारनी पड़ती थी. जेब में पैसे कम थे लेकिन आंखों में फिल्में बनाने का सपना बड़ा था.

10 सितंबर 1972 को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में जन्मे अनुराग कश्यप, पढ़ाई के लिए दिल्ली आए थे. उन्होंने हंसराज कॉलेज में दाखिला लिया. कॉलेज के दिनों में ही उनका झुकाव थिएटर और फिल्मों की तरफ बढ़ने लगा. नुक्कड़ नाटकों से जुड़ने के बाद उनके भीतर एक्टिंग और कहानी कहने का जुनून और गहरा हो गया.

सिर्फ 5 हजार रुपये लेकर पहुंचे मुंबई

फिल्मों में करियर बनाने का सपना लेकर अनुराग साल 1993 में मुंबई पहुंच गए. बताया जाता है कि उस वक्त उनके पास करीब 5 हजार रुपये थे. मायानगरी में कोई बड़ा सहारा नहीं था. काम की तलाश में वह दर-बदर की ठोकरें खाते रहे. हालात इतने मुश्किल थे कि कई बार उन्हें सड़क, फुटपाथ और यहां तक कि सिग्नल के आसपास रात बितानी पड़ी. इन सबके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी. धीरे-धीरे उन्हें फिल्मों में लिखने का मौका मिलने लगा. ‘सत्या’ की कहानी और ‘शूल’ के डायलॉग से बतौर लेखक उनकी पहचान बनने लगी. इसके बाद ‘कौन’ जैसी फिल्मों से भी उनका नाम जुड़ा.

रिलीज नहीं हुई पहली फिल्म

निर्देशक के तौर पर अनुराग की पहली फिल्म ‘पांच’ थी लेकिन यह रिलीज नहीं हो सकी. इसके बाद उन्होंने ‘ब्लैक फ्राइडे’, ‘देव डी’, ‘गुलाल’ और ‘द गर्ल इन येलो बूट्स’ जैसी फिल्में बनाईं. उनकी फिल्मों का अंदाज बाकी फिल्मों से काफी अलग था. फिर साल 2012 में आई ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ ने उनकी पहचान को एक नई ऊंचाई दे दी. फिल्म को दर्शकों ने खूब पसंद किया और अनुराग कश्यप बॉलीवुड के चर्चित निर्देशकों में शामिल हो गए. इसके बाद उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री को एक से बढ़कर एक फिल्में दीं. वहीं ‘मसान’, ‘द लंचबॉक्स’, ‘क्वीन’ और ‘उड़ता पंजाब’ जैसी फिल्मों से बतौर प्रोड्यूसर भी जुड़े.

ये भी पढ़ें: आसपास पड़ी लाशें, मां की कोख से चिपका बच्चा और भूख से बिलबिलाते लोग… रूह कंपा देगा ‘Ranabali’ का टीजर

MORE NEWS

Home > मनोरंजन > Anurag Kashyap: सड़क पर सोकर गुजारी रातें, फिर भी नहीं मानी हार, गैंग्स ऑफ वासेपुर से मिली पहचान

Written By:
Last Updated: September 9, 2026 22:16:06 IST

Mobile Ads 1x1

Anurag Kashyap: अनुराग कश्यप का नाम बॉलीवुड के उन फिल्ममेकर्स में लिया जाता है, जिन्होंने फिल्मों को अलग अंदाज में पेश किया. उनकी कहानियों में आम जिंदगी, संघर्ष, अपराध और समाज की सच्चाई को दिखाती हैं.हालांकि यहां तक पहुंचने का उनका सफर बिल्कुल आसान नहीं था. एक वक्त ऐसा भी था, जब मुंबई में काम की तलाश करते हुए उन्हें सड़कों और फुटपाथ पर रात गुजारनी पड़ती थी. जेब में पैसे कम थे लेकिन आंखों में फिल्में बनाने का सपना बड़ा था.

10 सितंबर 1972 को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में जन्मे अनुराग कश्यप, पढ़ाई के लिए दिल्ली आए थे. उन्होंने हंसराज कॉलेज में दाखिला लिया. कॉलेज के दिनों में ही उनका झुकाव थिएटर और फिल्मों की तरफ बढ़ने लगा. नुक्कड़ नाटकों से जुड़ने के बाद उनके भीतर एक्टिंग और कहानी कहने का जुनून और गहरा हो गया.

सिर्फ 5 हजार रुपये लेकर पहुंचे मुंबई

फिल्मों में करियर बनाने का सपना लेकर अनुराग साल 1993 में मुंबई पहुंच गए. बताया जाता है कि उस वक्त उनके पास करीब 5 हजार रुपये थे. मायानगरी में कोई बड़ा सहारा नहीं था. काम की तलाश में वह दर-बदर की ठोकरें खाते रहे. हालात इतने मुश्किल थे कि कई बार उन्हें सड़क, फुटपाथ और यहां तक कि सिग्नल के आसपास रात बितानी पड़ी. इन सबके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी. धीरे-धीरे उन्हें फिल्मों में लिखने का मौका मिलने लगा. ‘सत्या’ की कहानी और ‘शूल’ के डायलॉग से बतौर लेखक उनकी पहचान बनने लगी. इसके बाद ‘कौन’ जैसी फिल्मों से भी उनका नाम जुड़ा.

रिलीज नहीं हुई पहली फिल्म

निर्देशक के तौर पर अनुराग की पहली फिल्म ‘पांच’ थी लेकिन यह रिलीज नहीं हो सकी. इसके बाद उन्होंने ‘ब्लैक फ्राइडे’, ‘देव डी’, ‘गुलाल’ और ‘द गर्ल इन येलो बूट्स’ जैसी फिल्में बनाईं. उनकी फिल्मों का अंदाज बाकी फिल्मों से काफी अलग था. फिर साल 2012 में आई ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ ने उनकी पहचान को एक नई ऊंचाई दे दी. फिल्म को दर्शकों ने खूब पसंद किया और अनुराग कश्यप बॉलीवुड के चर्चित निर्देशकों में शामिल हो गए. इसके बाद उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री को एक से बढ़कर एक फिल्में दीं. वहीं ‘मसान’, ‘द लंचबॉक्स’, ‘क्वीन’ और ‘उड़ता पंजाब’ जैसी फिल्मों से बतौर प्रोड्यूसर भी जुड़े.

ये भी पढ़ें: आसपास पड़ी लाशें, मां की कोख से चिपका बच्चा और भूख से बिलबिलाते लोग… रूह कंपा देगा ‘Ranabali’ का टीजर

MORE NEWS