Asha Bhosle Last Song: 12 हजार गीतों को सुर देने वाली आशा ताई का आखिरी गाना 'जाने दो' अधूरा रह गया. महज 4 लाइनों की वजह से थमी रिकॉर्डिंग और जानिए क्या थी गाने की वो आखिरी हसरत.
Asha Bhosle News: भारतीय संगीत की वो आवाज जिसने सात दशकों तक हर धड़कन को शब्द दिए आज खामोश हो गई. ताज्जुब देखिए कि जिस गायिका ने 12 हजार से ज्यादा गीतों (Asha Bhosle Songs) को मुकम्मल किया, उनका अपना आखिरी सफर महज चार लाइनों की वजह से अधूरा रह गया. वो कहती थीं कि उन्हें हंसते-मुस्कुराते विदा किया जाए, क्योंकि वो जिंदगी से भरपूर थीं. लेकिन संगीत की दुनिया के लिए ये खबर किसी सदमे से कम नहीं कि प्रसून जोशी के लिखे जिस गाने को वो अपनी आवाज से सजा रही थीं, मौत ने उसकी रिकॉर्डिंग के बीच में ही सुरों की डोर काट दी. शमीर टंडन के स्टूडियो में वो चार लाइनें आज भी आशा ताई का इंतजार कर रही हैं. आइए जानते हैं आशा ताई के उस आखिरी अरमान और उनकी जिंदगी के अनछुए पहलुओं के बारे में.
दरअसल, यह गाना एक प्राइवेट एल्बम के लिए था, जिसे शमीर टंडन ने कंपोज़ किया था. शमीर ने Page 3, Traffic Signal, Bal Ganesh और Corporate जैसी फ़िल्मों के लिए संगीत दिया है. NDTV की रिपोर्ट के अनुसार आशा भोसले के निधन के बाद शमीर टंडन ने बताया कि वह पिछले कुछ दिनों से आशा भोसले के साथ इस खास गाने पर काम कर रहे थे. जिसके बोल प्रसून जोशी ने लिखे थे. उन्होंने बताया कि जब उनके निधन की दुखद ख़बर आई, तब गाने की सिर्फ़ चार लाइनें रिकॉर्ड होना बाकी थीं.
संगीतकार शमीर टंडन ने कहा, ‘इस गाने के बोल ‘जाने दो… जाने दो’ (इसे जाने दो… इसे जाने दो) से शुरू होते हैं. इसे प्रसून जोशी ने लिखा था. आशा भोसले ने कुछ ही दिन पहले इस गाने की रिहर्सल भी की थी; वह हमेशा बहुत ज़्यादा एक्टिव रहती थीं. मैं उन्हें 2003 से जानता हूं. गाने की सिर्फ़ चार लाइनें बाकी थीं, और वह उन्हें रिकॉर्ड करने के लिए किसी भी दिन स्टूडियो आने वाली थीं. लेकिन ऐसा हो न सका.’
आशा भोसले के जीवन के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया, ‘वह हमेशा दुनिया को चेहरे पर मुस्कान लिए अलविदा कहना चाहती थीं. वह ज़िंदगी से लबालब भरी हुई थीं. वह दिल से जवान थीं और उनकी रूह भी जवान थी. वह अक्सर कहती थीं कि वह अपना आखिरी गाना किसी युवा अभिनेत्री के लिए गाना पसंद करेंगी, शायद आलिया भट्ट जैसी किसी अभिनेत्री के लिए. वह बस इसी तरह की जीवंत ऊर्जा से भरी हुई थीं.’
शमीर टंडन, जिन्होंने फ़िल्म Page 3 का संगीत तैयार किया था उन्होंने उस दौर का एक किस्सा साझा किया, ‘उन्होंने Page 3 के लिए ‘हुज़ूर-ए-आला’ गाना गाया था. मैंने उनसे कहा कि मुझे यह ट्रैक जितनी जल्दी हो सके चाहिए. लेकिन उस समय वह सैन फ़्रांसिस्को में थीं. उन्होंने वहीं से दूर रहकर गाना रिकॉर्ड किया. उन दिनों ऐसी बात के बारे में सोचना भी नामुमकिन था.’ उन्होंने बताया, ‘उनके पति, आर.डी. बर्मन मुझसे कहा करते थे, ‘अगर तुम कलाकारों की नई पीढ़ी और उनकी टेक्नोलॉजी के साथ आगे नहीं बढ़ोगी, तो तुम पीछे रह जाओगी.’ इस लिहाज़ से, वह सचमुच एक दूरदर्शी महिला थीं.’
शमीर टंडन ने बताया कि जब भी वह उनके घर जाते थे, तो वह उनका स्वागत बड़े ही प्यार और मेहमाननवाज़ी के साथ करती थीं. वह याद करते हैं, ‘जब भी मैं उनके घर जाता था, तो मुझे उनके अपने हाथों से बनाया हुआ पोहा खाने को मिलता था और वह कॉफ़ी भी खुद ही बनाती थीं.’
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