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1992 में छेड़ी जंग, रोका 9 महीने की बच्ची का बाल विवाह, परिवार-समाज ने मोड़ा मुंह, फिर भी नहीं मानी हार

राजस्थान की 'साथिन' भंवरी देवी को भ्रूण हत्या और बाल विवाह रोकने के लिए की जाने वाली कोशिश के लिए जाना जाता है. इस कुरीति को रोकने के लिए उन्हें समाज से अलग कर दिया गया. इसके अलावा उन्हें सामूहिक बलात्कार तक झेलना पड़ा.

Bhanwari Devi: 1964 में जन्मी भंवरी देवी, एक ऐसी महिला जिसके साहस ने बाल विवाह जैसी  प्रथाओं को खत्म कराने के लिए एड़ी से चोटी तक का जोर लगा दिया. वो राजस्थान की एक निडर सामाजिक कार्यकर्ता थीं, जिन्हें साथिन कहा जाता था. वो आज भी जीवित हैं लेकिन गुमनामी की जिंदगी जी रही हैं. एक समय था जब वे पूरे राज्य में बहुत प्रसिद्ध थीं. आज भी उनका नाम बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है. वो राजस्थान के भाटेरी गांव में एक साथिन के रूप में काम करती थीं. उन्होंने बाल विवाह और कन्या भ्रूण हत्या जैसी कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाई और लोगों में जागरुकता फैलाई. 

9 महीने की बच्ची को बचाने की मिली सजा

भंवरी देवी ने अपनी जिंदगी में इन प्रथाओं से लड़ने के कारण काफी कुछ झेला. 1992 में नौ महीने की नवजात के बाल विवाह को रोकने की कोशिश के कारण उन्हें सामूहिक बलात्कार जैसी चीजें भी झेलनी पड़ीं. कहा जाता है कि आखा तीज त्योहार वाले दिन सैकड़ों कम उम्र की लड़कियों की शादी कराई जा रही थी. इसमें एक 9 महीने की बच्ची थी, जो एक रसूखदार परिवार से थी. लोगों ने उन्हें धमकाकर और मारपीट कर भगा दिया.शादी के पांच महीने बाद दुल्हन के रिश्तेदारों ने बदला लेने की ठानी. उन्होंने भंवरी देवी के साथ सामूहिक बलात्कार किया. उन्होंने इस बलात्कार के लिए सालों तक लड़ाई लड़ी. इस मुकदमे ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में सुर्खियां बटोरीं.

महिलाओं की सुरक्षा के लिए बना कानून

उनके इसी संघर्ष और न्याय की लंबी लड़ाई के कारण विशाखा गाइडलाइंस बना. बाद में इस कानून को साल 2013 में बदलकर कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न के खिलाफ कानून बनाया गया, जिसे पॉश एक्ट (POSH Act) के नाम से जाना जाता है. साल 1994 में उन्हें ‘नीरजा भनोट मेमोरियल अवार्ड’ से नवाजा गया.वे बीजिंग में संयुक्त राष्ट्र के चौथे विश्व महिला सम्मेलन में भी शामिल हुईं. वर्तमान समय में भंवरी देवी की उम्र लगभग 62 साल हो चुकी है. वे आज भी महिलाओं के हक की बात करती हैं. इसके अलावा वे लैंगिक समानता के लिए लड़ने वाली एक निडर आवाज भी बनीं.

भंवरी देवी पर बनीं फिल्म

भंवरी देवी की जिंदगी पर बवंडर फिल्म बनी, जो साल 2000 में रिलीज हुई. इस फिल्म में एक 9 महीने की बच्ची का बाल विवाह रोकने का प्रयास करने और उसका खामियाजा भुगतने के बारे में दिखाया गया है. उन्हें समाज की कुरीतियों को तोड़ने के लिए कोपभाजन और सामूहिक बलात्कार तक का शिकार होना पड़ा. इस फिल्म में एक्ट्रेस नंदिता दास ने भंवरी देवी का किरदार निभाया था.

Deepika Pandey

दीपिका पाण्डेय साल 2020 से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ी हुई हैं. उन्होंने 2020 में BJMC की डिग्री ली. इसके बाद ही उन्होंने खबर टुडे न्यूज, डीएनपी न्यूज, दैनिक खबर लाइव आदि चैनल्स में एंकर और कंटेंट राइटर के रूप में काम किया. इसके बाद उन्होंने हरिभूमि वेबसाइट पर काम किया. वर्तमान समय में दीपिका इंडिया न्यूज चैनल में बतौर सीनियर कॉपी राइटर कार्यरत हैं.

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