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टनल में फंसीं 65 जिंदगियों को बचाया, रिस्क लेकर 6 घंटे में किया रेस्क्यू, जानें कौन हैं कैप्सूल गिल?

कुछ समय पहले अक्षय कुमार की एक फिल्म रिलीज हुई, जिसे फैंस ने काफी प्यार दिया. ये फिल्म थी मिशन रानीगंज. क्या आप जानते हैं कि ये एक रियल स्टोरी है? आइए जानते हैं इस मिशन के असली हीरो जसवंत सिंह गिल के बारे में...

Jaswant Singh Gill: सुपरस्टार अक्षय कुमार की फिल्म ‘मिशन रानीगंज’ कुछ सालों पहले रिलीज हुई. इस फिल्म को खासा प्यार मिला. सर्वाइवल थ्रिलर बेस्ड ये फिल्म एक रियल लाइफ स्टोरी है. इस फिल्म को कई अवॉर्ड्स भी मिले हैं. ये फिल्म माइनिंग इंजीनियर जसवंत सिंह गिल के एक मिशन पर बनी है, जिसके तहत उन्होंने 65 लोगों की जान बचाई थी. आज वे भले ही दुनिया में नहीं हैं  लेकिन उनकी बहादुरी की कहानी आज भी जिंदा है. उनका नाम 65 लोगों  की जिंदगी बचाने के लिए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है. इसके अलावा उनका नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी दर्ज है.

कौन थे जसवंत सिंह गिल?

बता दें कि जसवंत सिंह गिल एक रियल लाइफ हीरो थे, जिन्होंने अपनी सूझबूझ से 65 मजदूरों की जान बचाई थी. उनके  इस मिशन के कारण उनका नाम कई रिकॉर्ड्स में दर्ज है. जानकारी के अनुसार, जसवंत सिंह गिल का जन्म 22 नवंबर 1939 को हुआ था. उनका जन्म पंजाब के अमृतसर के सथियाला गांव में हुआ था. उन्होंने धनबाद के इंडियन स्कूल ऑफ माइंस से ग्रेजुएशन की. वे कोल इंडिया में  खनन अधिकारी थे. उनकी नौकरी के दौरान साल 1989 में पश्चिम बंगाल के रानीगंज में स्थित कोयला खदान ढह गई थी. इसके कारण माइन में भारी मात्रा में पानी भर गया था. ये देखते हुए जसवंत सिंह गिल ने अपनी सूझबूझ से 65 लोगों की जान बचाई. 

क्यों दिया गया कैप्सूल गिल नाम?

इस ऑपरेशन के कारण जसवंत सिंह गिल को कैप्सूल गिल नाम मिला क्योंकि उन्होंने प्लान करके स्टील का एक कैप्सूल बनाने का आइडिया दिया. इसके अंदर एक बार में एक इंसान जा सकता था. वे इस कैप्सूल के जरिए खदान में गए थे. सबसे अंत में वे ही बाहर निकल कर आए थे.जसवंत सिंह गिल के इस रेस्क्यू ऑपरेशन के कारण उन्हें कई अवॉर्ड्स से सम्मानित किया गया.

मिले ये अवॉर्ड्स

जसवंत सिंह का नाम वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज है.  1991 में उन्हें सिविलियन गैलेन्ट्री अवार्ड सर्वोत्तम जीवन रक्षक पदक मिला. 2013 में लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड मिला.  ऑल इंडिया ह्यूमन राइट्स काउंसिल ने उन्हें लीजेंड ऑफ बंगाल पुरस्कार से नवाजा. 2023 के लिए  उन्हें ‘विवेकानंद कर्मवीर’ पुरस्कार से नवाजा गया. 26 नवंबर 2019 में उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली.

Deepika Pandey

दीपिका पाण्डेय साल 2020 से पत्रकारिता के क्षेत्र से जुड़ी हुई हैं. उन्होंने 2020 में BJMC की डिग्री ली. इसके बाद ही उन्होंने खबर टुडे न्यूज, डीएनपी न्यूज, दैनिक खबर लाइव आदि चैनल्स में एंकर और कंटेंट राइटर के रूप में काम किया. इसके बाद उन्होंने हरिभूमि वेबसाइट पर काम किया. वर्तमान समय में दीपिका इंडिया न्यूज चैनल में बतौर सीनियर कॉपी राइटर कार्यरत हैं.

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