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बेहद रहस्यमयी है धुरंधर 2 का ये गाना, ‘मैड मोंक’ से जुड़ा खेल, रूस की भयावह कहानी

धुरंधर द रिवेंज फिल्म के साथ ही इसके गाने भी काफी फेमस हुए लोगों ने इन पर जमकर रील्स और वीडियोज बनाए. लेकिन क्या आप जानते हैं कि फिल्म का एक गाना 1870 से जुड़ा हुआ है. इसका इतिहास काफी रहस्यमयी है, जो लोगों को हैरान कर देगा.

Rasputin Song Dhurandhar 2 Mystery: आदित्य धर की ‘धुरंधर-द रिवेंज’ बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा रही है. फिल्म के सारे गाने भी लोगों के बीच फेमस हैं. सोशल मीडिया पर गाने ट्रेंडिंग में हैं और उन पर जमकर वीडियोज भी बन रही हैं. इस फिल्म में 1970 के दशक का फेमस गाना रासपुतिन है, जिसके बजने पर थिएटर में बैठे दर्शक काफी झूमते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये गाना भले ही अब फेमस हो रहा है लेकिन 1970 के दशक में भी ये गाना काफी फेमस हो रहा था. ये गाना एक डांस नंबर है, लेकिन बहुत रहस्यमयी है. इसका इतिहास रूस से जुड़ा हुआ है और काफी विवादित है. ये गाना धुरंधर में रिलीज होने के बाद रातों-रात ग्लोबल हिट हो गया.  ये जबरदस्त बीट्स और अनोखे संगीत के कारण पार्टियों की जान बने हुए हैं. 

धुरंधर-2 में बजने वाला 1978 का गाना रासपुतिन जर्मन म्यूजिकल ग्रुप ‘बोनी एम.’ ने बनाया था. उन्होंने इसे अपने एल्बम ‘नाइटफ्लाइट टू वीनस’ में रिलीज किया था. इस गाने में रूस के इतिहास के सबसे रहस्यमयी इंसान ‘ग्रिगोरी रासपुतिन’ की जिंदगी के बारे में फिल्माया गया है. गाने के बोल उस शख्स की ताकत और प्रभाव की कहानी के बारे में बताते हैं. इस कहानी को समझना किसी पहेली से कम  नहीं था. 

किस पर फिल्माया गया रासपुतिन?

दरअसल रासपुतिन गाना ग्रिगोरी रासपुतिन बनाया गया था. उनका जन्म 1869 में साइबेरिया के एक छोटे गांव में हुआ था. उन्होंने शुरुआती जिंदगी में काफी परेशानियां झेलीं. वे कभी आध्यात्म की बातें करते थे, तो कभी लापरवाह से लगते थे. इस व्यवहार के कारण उन्हें साधु कहा जाता था, जिसके पास चमत्कारी शक्तियां थीं. कुछ लोग उनके व्यवहार को देखकर उन्हें ‘मैड मोंक’ यानी पागल साधु भी कहा जाता था. इसी रहस्यमयी छवि के कारण वे गांव की गलियों से निकले और रूस की सत्ता के केंद्र यानी सेंट पीटर्सबर्ग तक जा पहुंचे थे.

बचाई शाही परिवार के बच्चे की जान

कहा जाता है कि 1907 में उन्हें रूस के शाही परिवार में बुलाया गया था, जिसे उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा मोड़ माना जाता है. जार निकोलस द्वितीय और जारिना एलेक्जेंड्रा का बेटा एलेक्सी ‘हीमोफीलिया’ बीमारी से पीड़ित था. बड़े-बड़े डॉक्टर हार मान गए थे, तब रासपुतिन के स्पर्श और प्रार्थनाओं के कारण बच्चे की हालत में सुधार हुआ. इसके कारण जारिना रासपुतिन को भगवान से कम नहीं मानती थी. इसके कारण वे धीरे-धीरे शाही महल के खास सदस्य बन गए. वे प्रार्थनाओं के साथ ही राजकाज के फैसलों में भी दखल देने लगे. उन्होंने एक भविष्यवाणी की थी, जिसमें उन्होंने बताया था कि उनकी मौत के साथ ही रूसी साम्राज्य का भी अंत हो जाएगा.

कैसे हुई रासपुतिन की मौत?

रूस के लोगों और राजनेताओं को लगता था कि वो शाही परिवार के इशारों पर नाच रहे हैं. इतना ही नहीं, उन पर महिलाओं से अनैतिक संबंध बनाने के गंभीर आरोप भी लगे. उन्हें सबसे ज्यादा भ्रष्ट आदमी कहा जाने लगा. जब पहला विश्वयुद्ध होने वाला था और रूस बर्बादी की तरफ बढ़ रहा था, तो रूस के लोगों ने इसके लिए रासपुतिन को जिम्मेदार ठहराया. साल 1916 में रासपुतिन को धोखे से बुलाया गया और जहरीली केके, वाइन पिलाई गई लेकिन उसका रासपुतिन पर कोई असर नहीं हुआ. इसके बाद गोलियां चलीं और फिर भी वो मरे नहीं. अंत में उन्हें पानी में डुबाकर मारा गया. 

फ्रैंक फेरियन ने बनाया बैंड

वहीं इस कहानी पर गाना बनाने वाले बोनी एम बैंड को लेकर भी रहस्य बना हुआ है. कहा जाता है कि एम बैंड केवल एक बैंड नहीं बल्कि संगीत के इतिहास का सबसे बड़ा और कलात्मक भ्रम था. कहा जाता है कि इस बैंड को जिसने भी देखा और सुना, कोई भी उसे पूरी तरह समझ नहीं पाया है. कहा जाता है कि जो शख्स माइक थामकर गाना  गाता था, वो उस शख्स की आवाज थी ही नहीं. साल 1974 में जर्मन गायक और संगीत निर्माता फ्रैंक फेरियन ने ‘अल कैपोन’ गाने का एक डिस्को वर्जन तैयार किया.

क्या था बोनी एम बैंड?

बता दें कि फेरियन ने ही इसमें पुरुष और महिला की आवाज में गाना गाया था. उन्होंने इस गाने को बोनी एम का नाम दिया. जब ये गाना हिट हुआ, तो लोगों ने बैंड को देखने की इच्छा जाहिर की. लेकिन हकीकत तो ये थी कि ऐसा कोई बैंड था ही नहीं, जिसे लोग देखना या सुनना चाहते थे. मांग बढ़ने पर फ्रैंक फेरियन ने इस ‘काल्पनिक’ बैंड को एक चेहरा दिया. इसके लिए फ्रैंक फेरियन ने कैरेबियन मूल के लिज मिशेल, मार्सिया बैरेट, बॉबी फैरेल और मैजी विलियम्स नाम के कलाकारों को काम पर रखा और इन्हें ही बोनी एम बैंड का नाम दिया. 

दुनियाभर में इन गानों से बटोरीं सुर्खियां

ये बैंड फेरियन की पहले से रिकॉर्ड की गई टेप्स पर  लिप-सिंक किया करते थे. यानी दुनिया जिसे देख और सुन रही थी, वो केवल एक फरेब था. कहा जाता है कि उन्होंने इस बैंड की आड़ में ‘डैडी कूल’, ‘रिवर्स ऑफ बेबीलोन’, ‘मा बेकर’ और ‘रासपुतिन’ जैसे गाने गाकर दुनिया भर में सुर्खियां बटोरी थीं. 

Deepika Pandey

दीपिका पाण्डेय साल 2020 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्होंने 2020 में BJMC की डिग्री हासिल की. करियर की शुरुआत खबर टुडे न्यूज, DNP News और दैनिक खबर जैसे प्लेटफॉर्म्स से बतौर एंकर और कंटेंट राइटर की. उन्होंने क्राइम, एंटरटेनमेंट, पॉलिटिक्स, लाइफस्टाइल, ऑटो-टेक और करेंट अफेयर्स पर काम किया है. इसके बाद हरिभूमि वेबसाइट में दिल्ली-NCR और नेशनल बीट कवर की. वर्तमान में वह इंडिया न्यूज में सीनियर कॉपी राइटर हैं. उनकी विशेषज्ञता क्राइम और एंटरटेनमेंट, बॉलीवुड, हॉलीवुड और भोजपुरी के साथ पॉलिटिक्स, लाइफस्टाइल, वायरल न्यूज, ह्यूमन इंटरेस्ट और ट्रेंडिंग स्टोरीज में है.

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