<
Categories: मनोरंजन

जब श्रीदेवी की सुरक्षा में उतर गई थी अफगानिस्तान की आधी सेना, हवा में चक्कर काट रहे थे सुखोई जेट्स; प्रेसिडेंट ने खुद किया था स्वागत

Khuda Gawah Afghanistan Shooting Story: श्रीदेवी और अमिताभ बच्चन अपनी फिल्म खुदा गवाह की शूटिंग के लिए अफगानिस्तान पहुंचे थे. तब देश की आधी सेना इन स्टार के सुरक्षा में लगा दी गई थी. तो चलिए जानते हैं कि इसके पीछे की पूरी कहानी क्या है?

Khuda Gawah Afghanistan Shooting Story: आप भारतीय सिनेमा के कई किस्से सुने होंगे लेकिन लेकिन कम ही लोग जानते हैं बॉलीवुड में एक ऐसा सुपरस्टार भी है जिसके लिए अफगानिस्तान में वॉर रोक दी गई थी.ये वाकया है अमिताभ बच्चन और  श्रीदेवी की फिल्म खुदा गवाह का जो 8 मई 1992 को रिलीज हुई थी. लेकिन शूटिंग के दौरान उनके साथ वहां कुछ ऐसा हुआ जो इतिहास में दर्ज हो गया. 2013 में बिग बी ने इस पूरे एक्‍सपीरियंस को फेसबुक पोस्‍ट के जरिए शेयर किया था. उन्होंने बताया था कि उनकी और टीम की सुरक्षा में अफगानिस्तान की आधी मिलिट्री फोर्स तैनात थी. तो चलिए जानते हैं कि वहां पर क्या हुआ था?  

1991 का है किस्सा

बात 1991 की है, जब अफगानिस्तान में गृह युद्ध चल रहा था. सोवियत संघ ने अफगानिस्तान से अपनी सेना वापस बुलाकर सत्ता राष्ट्रपति मोहम्मद नजीबुल्लाह को सौंप दी थी. उस समय तालिबान का नहीं, बल्कि मुजाहिदीनों का खौफ था. मुजाहिदीन सोवियत संघ और अफगानिस्तान की सरकार के खिलाफ लड़ रहे थे. मुजाहिदीन हर रोज अपनी रॉकेट से राजधानी काबुल को दहला रहे थे. उसी समय श्रीदेवी और अमिताभ बच्चन अपनी फिल्म खुदा गवाह की शूटिंग के लिए अफगानिस्तान पहुंचे थे. तब राष्ट्रपति मोहम्मद नजीबुल्ला ने अपनी सेना के टैंक, गाड़ियां और देश की आधी एयरफोर्स बॉलीवुड क्रू की हिफाजत में तैनात कर दी.बताया जाता है कि अमिताभ बच्चन और  श्रीदेवी के लिए सुखोई जेट्स हवा में चक्कर काट रहे था. ताकि दुश्मन का कोई भी रॉकेट ना दागे. 

बिग बी ने 2013 में एक पोस्ट में बताया पूरा किस्सा

2013 में, बिग बी ने यह पूरा अनुभव एक फेसबुक पोस्ट में शेयर किया था. पुराने दिनों को याद करते हुए उन्होंने लिखा,“सोवियत सेना हाल ही में देश छोड़कर गई थी और सत्ता नजीबुल्लाह अहमदजई को सौंप दी गई थी, जो लोकप्रिय हिंदी सिनेमा के बहुत बड़े प्रशंसक थे. वह मुझसे मिलना चाहते थे और हमारा बेहद शाही अंदाज में स्वागत किया गया. मजारे-शरीफ में हमें VVIP राजकीय मेहमान का दर्जा दिया गया. हथियारबंद सुरक्षा दल के साथ विमानों में हमें इस बेहद खूबसूरत देश के अलग-अलग हिस्सों की सैर कराई गई.

हमें स्थानीय लोगों की पारंपरिक गर्मजोशी और मेहमाननवाजी देखने को मिली. वहां के लोग मेहमानों की खातिरदारी के लिए जाने जाते हैं. हमें होटल में ठहरने की इजाजत नहीं थी. एक परिवार ने हमारे लिए अपना घर खाली कर दिया और खुद एक छोटे से घर में रहने चला गया.”

उन्होंने  आगे लिखा “बेशक, सुरक्षा से जुड़ी समस्याएं थीं. सड़कों पर हर तरफ टैंक और हथियारबंद सैनिक नजर आते थे. फिर भी, यह मेरी जिंदगी की सबसे यादगार यात्राओं में से एक रही. हमें कुछ सरदारों (वॉरलॉर्ड्स) के एक समूह ने आमंत्रित किया था. डैनी, दानजोंगपा, बिल्लू, मुकुल और मैं एक गनशिप हेलीकॉप्टर में सवार हुए, जिसके साथ पांच और हेलीकॉप्टर चल रहे थे. यह सफर कभी न भूलने वाला था. आसमान से नीचे का नजारा बेहद खूबसूरत दिख रहा था. बैंगनी रंग के पहाड़ पोस्त के फूलों की वजह से गुलाबी और लाल नजर आ रहे थे. जिस घाटी में हमारा हेलीकॉप्टर उतरा, वहां ऐसा लग रहा था जैसे समय पूरी तरह थम गया हो.”

उन्होंने आगे कहा, “दूर से हमें मध्यकालीन किले जैसी एक इमारत दिखाई दी. वॉरलॉर्ड्स हमें अपने कंधों पर उठाकर वहां ले गए, क्योंकि वहां की परंपरा के मुताबिक मेहमानों के पैर जमीन को नहीं छूने चाहिए थे. किले से हम उस मैदान में गए, जहां हमारे लिए बुज़काशी टूर्नामेंट का आयोजन किया गया था. वहां रंग-बिरंगे तंबू लगाए गए थे. मुझे ऐसा लगा जैसे मैं किसी इवानहो की दुनिया में पहुंच गया हूं. वॉरलॉर्ड्स ने हम चारों से वहीं रात रुकने की जिद की. महल को खाली कर दिया गया और हम चारों वहां खाते-पीते रहे. पूरा माहौल ऐसा था, मानो हम किसी अविश्वसनीय परी-कथा की दुनिया में पहुंच गए हों.”

पोस्‍ट के आखिर में महानायक ने लिखा था, ‘हम गिफ्ट्स दिए गए. भारत आने से एक दिन पहले रात में काबुल में नजीबुल्‍लाह ने हमें प्रेजिडेंट आवास पर बुलाया और हमें ‘ऑर्डर ऑफ अफगानिस्‍तान’ से सजाया गया.उस शाम, उनके अंकल ने हमारे लिए भारतीय राग गाया.’

प्रेसिडेंट नजीबुल्लाह को फांसी

अफ़गानिस्तान के उस समय के प्रेसिडेंट नजीबुल्लाह ने साफ़-साफ़ कह दिया था कि अगर बॉलीवुड से किसी को चोट लगी तो अच्छा नहीं होगा. किसी तरह फ़िल्म की शूटिंग पूरी हुई. फ़िल्म रिलीज़ होने के कुछ समय बाद ही उन्हीं प्रेसिडेंट नजीबुल्लाह को हटाकर सबके सामने फांसी पर लटका दिया गया. यह घटना इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो गई.

Divyanshi Singh

दिव्यांशी सिंह उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले की रहने वाली हैं। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की पढ़ाई की है और पिछले 4 सालों से ज्यादा वक्त से पत्रकारिता के क्षेत्र में हैं। जियो-पॉलिटिक्स और स्पोर्टस में काम करने का लंबा अनुभव है।

Recent Posts

Rohit Sharma Record: सचिन, क्रिस और जयसूर्या सब छूटे पीछे, रोहित निकले सबसे आगे; 22 साल पुराना रिकॉर्ड हुआ स्वाहा!

Rohit Sharma Fastest ODI Run as Opener: रोहित शर्मा ने वेस्टइंडीज के खिलाफ मैदान पर…

Last Updated: October 3, 2026 17:25:30 IST

जय शाह ने टीम इंडिया को पहनाया GOLD मेडल, पाकिस्तान को SILVER देने कौन पहुंचा? जानें पूरी डिटेल

India Pakistan Final: एशियन गेम्स 2026 के पुरुष क्रिकेट फाइनल में भारत ने पाकिस्तान को…

Last Updated: October 3, 2026 17:15:31 IST

Padma Purana: किस कर्म से बदलती है आत्मा की अगली यात्रा…जानिये 84 लाख योनियों का रहस्य

Padma Purana: हिंदू धर्म में 84 लाख योनियों की अवधारणा का अक्सर यह अर्थ बताया…

Last Updated: October 3, 2026 16:47:38 IST

Rajasthan News: चोरी बन गई काल! तार चुराने की कोशिश में दो युवकों की बिजली का झटका लगने से मौत, जलकर कोयला बन गए शव

राजस्थान के बीकानेर में कथित तौर पर हाई-टेंशन बिजली की लाइन के संपर्क में आने…

Last Updated: October 3, 2026 16:39:19 IST

Ghaziabad News: वैशाली स्थित एक ऊंची इमारत की बालकनी गिरी, कई कारें हुईं क्षतिग्रस्त; बड़े हादसे से बाल-बाल बचे लोग

गाजियाबाद के वैशाली सेक्टर 4 स्थित देविका टावर में शुक्रवार को एक बालकनी का किनारा…

Last Updated: October 3, 2026 16:24:59 IST