Nana Patekar Death: मशहूर एक्टर नाना पाटेकर का 8 अक्टूबर को सुबह 5:20 बजे निधन हो गया. वे 75 साल के थे. वे गोवा के डोना पाउला में अपने घर पर थे, जब उन्हें ज़ोरदार कार्डियक अरेस्ट हुआ. उन्हें पास के मणिपाल हॉस्पिटल ले जाया गया. डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लगभग 45 मिनट तक लगातार CPR दिया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका. मणिपाल हॉस्पिटल के ऑन्कोलॉजी डिपार्टमेंट के हेड डॉ. शेखर साल्कर ने इसकी पुष्टि की. अभिनेता नाना पाटेकर की गोवा में मौत के मामले में पुलिस ने अप्राकृतिक मृत्यु (Unnatural Death) का मामला दर्ज किया है. पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 194 के तहत जांच शुरू कर दी है.
डॉक्टरों के मुताबिक, नाना पाटेकर को जब अस्पताल लाया गया, तब तक उनकी मौत हो चुकी थी. मेडिकल भाषा में इसे ‘ब्रॉट डेड’ (Brought Dead) कहा जाता है. ऐसे मामलों में अस्पताल प्रशासन पुलिस को सूचना देता है और नियमानुसार कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाती है. मौत की परिस्थितियों की जांच के लिए मामला दर्ज किया जा सकता है और आवश्यकतानुसार पोस्टमॉर्टम कराया जाता है.
Nana Patekar
निधन का शुरुआती कारण
डॉक्टरों के अनुसार, शुरुआती तौर पर मौत की वजह कार्डियक अरेस्ट होने की आशंका जताई जा रही है. बताया गया है कि नाना पाटेकर पहले से हृदय संबंधी बीमारी से पीड़ित थे और उनकी दवाइयां चल रही थीं. हालांकि, मौत के वास्तविक कारण की पुष्टि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी. इसके लिए गोवा मेडिकल कॉलेज (GMC) में पोस्टमॉर्टम कराया गया है.
क्या MLC का मतलब है कि मौत संदिग्ध है?
किसी केस को मेडिको-लीगल बताने का मतलब यह नहीं है कि मौत अप्राकृतिक या संदिग्ध थी. इसका सीधा सा मतलब है कि मौत से जुड़े मेडिकल फैक्ट्स को कानूनी प्रोसेस के हिस्से के तौर पर रिकॉर्ड और वेरिफाई किया जा रहा है. मेडिको-लीगल केस में पुलिस का काम मौत के हालात का रिकॉर्ड बनाना और अगर ज़रूरी हो तो जांच करना है. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारण के बारे में ज़्यादा पक्का मेडिकल नतीजा सामने आ सकता है.