Sarke Chunar Teri Sarke Controversy: नोरा फतेही को भारत से डिपोर्ट कर देना चाहिए! गजेंद्र चौहान के इस बयान के बाद केंद्र सरकार ने भी संजय दत्त के गाने पर कड़ा एक्शन लिया है. आखिर क्या है पूरी सच्चाई? पढ़ें...
'सरके चुनर तेरी' गाने को लेकर विवादों में फंसी नोरा फतेही
Sarke Chunar Teri Sarke Controversy: भारतीय संस्कृति और सिनेमा के बीच की लकीर एक बार फिर बहस का केंद्र बन गई है. फिल्म ‘केडी: द डेविल’ का गाना ‘सरके चुनर तेरी सरके’ को लेकर विवाद इतना बढ़ गया है कि अब इसमें सरकार और दिग्गज कलाकारों की एंट्री हो गई है.
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कड़ा रुख अपनाया है. सरकार ने इस गाने को ‘अश्लील’ करार देते हुए इस पर तुरंत प्रतिबंध लगा दिया है. मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि यह गाना भारतीय संस्कारों और संस्कृति के पूरी तरह खिलाफ है. अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि इस तरह का भड़काऊ और अश्लील कंटेंट बनाने वालों के खिलाफ तुरंत FIR दर्ज की जाए. संजय दत्त और नोरा फतेही पर फिल्माए गए इस गाने को सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.
महाभारत में ‘युधिष्ठिर’ के किरदार से घर-घर में पहचान बनाने वाले अभिनेता गजेंद्र चौहान ने इस गाने पर अपनी कड़ी नाराजगी जाहिर की है. उन्होंने केवल गाने का विरोध ही नहीं किया, बल्कि फिल्म की अभिनेत्री नोरा फतेही को भारत से डिपोर्ट करने तक की मांग कर दी है. गजेंद्र चौहान का कहना है, ‘यह सिर्फ एक गाना नहीं, बल्कि देश की युवा पीढ़ी और हमारी प्राचीन संस्कृति को बिगाड़ने की एक सोची-समझी साजिश है. ऐसे कंटेंट को बर्दाश्त करना अपनी जड़ों को खोने जैसा है.’
सरके चुनरिया गाने के अश्लील बोलों से जुड़ा मुद्दा संसद में भी समाजवादी पार्टी के नेता आनंद भदौरिया ने उठाया. इस पर जवाब देते हुए सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, ‘अध्यक्ष महोदय, जिस गाने का ज़िक्र माननीय सांसद ने किया है, उसे पहले ही बैन किया जा चुका है. आपके माध्यम से, मैं पूरे सदन को यह साफ़ तौर पर बताना चाहता हूँ कि हमें भारत के संविधान निर्माताओं द्वारा तय की गई अभिव्यक्ति की आज़ादी पर उचित पाबंदियों के दायरे में रहकर ही व्यवहार करना चाहिए.’
उन्होंने आगे कहा, ‘आज के दौर में डिजिटल माध्यमों से जिस तेज़ी से कंटेंट फैलता है, उसे देखते हुए सरकार समाज की सुरक्षा के लिए खास तौर पर बच्चों, महिलाओं और समाज के कमज़ोर तबकों की सुरक्षा के लिए जो भी ज़रूरी और सख़्त कदम उठाने होंगे, उन्हें उठाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है.’
यह ध्यान देने वाली बात है कि इस हिंदी गाने को पहले ही बैन किया जा चुका है. इसे यूट्यूब से भी हटा दिया गया है. फिर भी विवाद अभी भी जारी है. मंगलवार को एक शिकायत मिलने के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सेंसर बोर्ड इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, सूचना और प्रसारण मंत्रालय और गूगल इंडिया से जवाब मांगते हुए नोटिस जारी किए. इस बीच इस मामले पर सफ़ाई देते हुए गीतकार रकीब आलम ने दावा किया है कि यह विवादित गाना उन्होंने नहीं, बल्कि फ़िल्म के निर्देशक ने लिखा था.
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