Who Was Parveen Babi: 80 के दशक की वो एक्ट्रेस जो अपने ग्लैमरस अंदाज के लिए काफी फेमस थी. फिर अचानक कुछ ऐसा हुआ की सब कुछ बदल गया. साल 2005 में उनका निधन हो गया. आइए जानते हैं कि वो कौन हैं और उनके बारे में सब कुछ-
Who Was Parveen Babi: 70 और 80 के दशक की बॉलीवुड की वो सबसे ग्लैमरस और मॉडर्न एक्ट्रेस जो अपनी एक्टिंग से काफी फेमस हुई थी. उन्होंनेदीवार, अमर अकबर एंथोनी, शान और नमक हलाल जैसी बड़ी फिल्मों में काम किया. उनका स्टाइल, कॉन्फिडेंस और अलग सोच उन्हें बाकी एक्ट्रेसेज से बिल्कुल अलग बनाता था. क्या आप पहचान पाए कि हम किसकी बात कर रहे. आपको बता दें कि हम परवीन बाबी की बात कर रहे हैं.
उस समय जब ज्यादातर हीरोइनें पारंपरिक और शर्मीली छवि में नजर आती थीं, परवीन बाबी ने इस सोच को बदल दिया. वे जीन्स, स्कर्ट और वेस्टर्न ड्रेस पहनती थीं, आत्मनिर्भर महिलाओं का किरदार निभाती थीं और अपनी निजी जिंदगी में भी खुलकर जीती थीं. उन्होंने ये दिखाया कि एक हीरोइन भी मॉडर्न और अपनी शर्तों पर जीने वाली हो सकती है.
परवीन बाबी 80 के दशक की एक मॉडर्न एक्ट्रेस थी. डायरेक्टर्स उन्हें कैमरे के सामने बेखौफ मानते थे. मैगजीन उन्हें ‘सेक्स सिंबल’ कहती थीं, लेकिन परवीन खुद को एक आजाद और खुद के दम पर खड़ी महिला मानती थीं. उनकी यही सोच उन्हें उस दौर की सबसे अलग और एक्ट्रेस बनाती है.
1979–80 के दौरान, जब वे शान की शूटिंग कर रही थीं, तब उनके व्यवहार में बदलाव दिखने लगा. वे शूटिंग मिस करने लगीं और उन्हें लेकर तरह-तरह की बातें होने लगीं. उन्हें लगने लगा कि कोई उनका पीछा कर रहा है, फोन टैप हो रहा है और लोग उनके खिलाफ साजिश कर रहे हैं.
फिल्ममेकर महेश भट्ट उस समय उनके साथ रिश्ते में थे. उन्होंने बताया कि परवीन को अचानक डर लगने लगता था. कभी उन्हें लगता कि कार में बम है और वे घबराकर बाहर कूद जाती थीं. डॉक्टर्स का मानना था कि वे पैरानॉइड स्किजोफ्रेनिया जैसी गंभीर मानसिक बीमारी से जूझ रही थीं, लेकिन परवीन अक्सर इसे मानने से इनकार करती थीं.
1983 में, अपने करियर के चरम पर, परवीन बाबी अचानक फिल्म इंडस्ट्री छोड़कर चली गईं. वे अमेरिका और यूरोप में रहीं और दार्शनिक यू.जी. कृष्णमूर्ति के साथ समय बिताया. ये फैसला सबके लिए चौंकाने वाला था.
भारत लौटने के बाद उनकी मानसिक स्थिति और नाज़ुक हो गई. 2002 में उन्होंने Amitabh Bachchan और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Bill Clinton सहित कई लोगों पर उन्हें मारने की साजिश का आरोप लगाया. इन आरोपों ने सभी को हैरान कर दिया.
उन्होंने 1993 के बॉम्बे ब्लास्ट केस में भी एक हलफनामा दायर किया, लेकिन बाद में कोर्ट में पेश नहीं हुईं. उन्हें हमेशा डर रहता था कि कोई उन्हें नुकसान पहुंचा सकता है. वे हर जगह टेप रिकॉर्डर लेकर जाती थीं, अकेले रहती थीं और धीरे-धीरे सब से दूर हो गईं.
2000 के दशक की शुरुआत में परवीन बाबी मुंबई के अपने फ्लैट में अकेली रह रही थीं. 22 जनवरी 2005 को पड़ोसियों ने देखा कि उनके दरवाजे के बाहर दूध और अखबार जमा हो रहे हैं. पुलिस ने दरवाजा तोड़ा तो अंदर उनकी लाश मिली. माना गया कि उनकी मौत को दो दिन हो चुके थे. उस समय उनकी उम्र लगभग 50 साल थी.
शुरुआत में कोई भी उनके शव को लेने नहीं आया, 3 दिन तक लाश सड़ती रही. बाद में महेश भट्ट और फिल्म इंडस्ट्री के कुछ लोगों ने मिलकर उनका अंतिम संस्कार कराया.
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