मशहूर निर्माता-निर्देशक प्रकाश मेहरा आज भले ही एक पॉपुलर फेस हैं लेकिन एक समय था जब उन्हें इस मुकाम तक पहुंचने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी. वे 13 रुपये लेकर मुंबई आए थे और काफी संघर्ष के बाद इस मुकाम पर पहुंचे.
डायरेक्टर प्रकाश मेहरा
Prakash Mehra Story: हिंदी सिनेमा में बहुत से ऐसे नाम हैं, जिन्होंने अपनी पहचान बनाने के लिए जिंदगी में काफी संघर्ष किया. कोई बड़ी मुश्किलों का सामना करते हुए एक्टर बनता है, तो कोई डायरेक्टर बनता है. ऐसा ही एक नाम है मशहूर निर्माता-निर्देशक प्रकाश मेहरा. आज उन्हें बॉलीवुड के मशहूर निर्माता के रूप में माना जाता है. हालांकि जब उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की थी, तो काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा था.
कहा जाता है कि वे केवल 13 रुपये लेकर मुंबई आए थे. मुंबई में अपनी पहचान बनाने के लिए उन्होंने छोटे-मोटे काम किए. उन्होंने नाई की दुकान पर काम किया. इसके अलावा भी उन्होंने कई परेशानियों का सामना करना पड़ा. हालांकि उनमें कुछ कर जाने का जुनून था, जिसने उन्हें हिंदी सिनेमा का बड़ा नाम बना दिया.
उत्तर प्रदेश के बिजनौर में जन्मे प्रकाश मेहरा का शुरुआती जीवन आसान नहीं रहा. बचपन में उनकी मां का निधन हो गया था. उनके पिता ने सन्यास ले लिया और गृहस्थ जीवन से दूरी बना ली. रिश्तेदारों के बीत उनका पालन-पोषण हुआ. छोटी उम्र में ही उन्होंने मुंबई आने की ठान ली थी. जब वे किशोर अवस्था में पहुंचे, तो वो घर से निकले और 13 रुपये लेकर मुंबई पहुंच गए.
कहा जाता है कि उस समय मुंबई आना और यहां पहचान बनाना काफी मुश्किल था. शुरुआती दिनों में उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा. वे काम की तलाश में भटकते रहे. गुजारे के लिए उन्होंने नाई की दुकान पर काम किया. साथ ही कई छोटे-मोटे काम करके गुजारा किया. हालांकि फिल्म बनाने का उनका सपना कभी नहीं टूटा. संघर्ष के दिनों में उनकी मुलाकात फिल्म इंडस्ट्री के लोगों से होने लगी और धीरे-धीरे उन्हें फिल्मों में काम करने का मौका मिलने लगा. इसके बाद उन्होंने असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में काम करना शुरू किया.
1968 में उन्होंने अपनी पहली फिल्म बनाई, जिसका नाम ‘हसीना मान जाएगी’ था. उनकी पहली ही फिल्म को सफलता मिली और फिर उन्होंने ‘मेला’ और ‘समाधि’ जैसी तमाम फिल्में बनाईं.उनके करियर की सबसे बड़ फिल्म थी जंजीर, जो 1973 में रिलीज हुई.
उस दौर में अमिताभ बच्चन की फिल्में फ्लॉप हो रही थीं, जिसके कारण उन्हें फ्लॉप एक्टर कहा जाने लगा था लेकिन प्रकाश ने अमिताभ पर भरोसा किया और जंजीर में काम करने का मौका दिया. इस फिल्म की सफलता के बाद अमिताभ रातों-रात स्टार बन गए. यहीं से उन्हें एंग्री यंग मैन कहा जाने लगा.
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