सलीम खान और सलमान खान की मां, सलमा खान की प्रेम कहानी साल 1958 में शुरू हुई थी. उस वक्त सलीम खान नए-नए मुंबई (तब बॉम्बे) आए थे. सलमा खान का असली नाम सुशीला चरक था और वे एक डोगरा राजपूत परिवार से ताल्लुक रखती थी. उनके पिता एक जाने-माने डेंटिस्ट थे. अलग-अलग धर्म और पृष्ठभूमि होने के बावजूद, सलीम और सुशीला एक-दूसरे को दिल दे बैठे और लगभग पांच साल तक एक-दूसरे को डेट किया.
एक सख्त पिता और सलीम खान की चुनौती
जब शादी की बात आई, तो सुशीला के पिता इस रिश्ते के सख्त खिलाफ थे. उस दौर में हिंदू-मुस्लिम शादी एक बहुत बड़ी बात मानी जाती थी. जब सलीम खान सुशीला के पिता (डॉ. चरक) से मिलने पहुंचे, तो उन्होंने साफ कह दिया कि यह रिश्ता मुमकिन नहीं है. उन्होंने कहा, हर माता-पिता अपने बच्चों के लिए अच्छा जीवनसाथी चाहते है. आप पढ़े-लिखे है और आपका भविष्य भी अच्छा है, लेकिन आप मुसलमान है और यह अंतर कभी खत्म नहीं हो सकता.
वो एक वादा जिसने दिल जीत लिया
सलीम खान, जो आगे चलकर भारत के सबसे महान पटकथा लेखक (Screenwriter) बने, अपनी बातों के पक्के थे. उन्होंने सुशीला के पिता को एक ऐसी बात कही जिसने उन्हें सोचने पर मजबूर कर दिया. सलीम खान ने बहुत ही शालीनता से कहा, मेरे और आपकी बेटी के बीच अनगिनत अंतर हो सकते है, लेकिन हमारा धर्म हमारे बीच कभी नहीं आएगा. सलीम खान ने भरोसा दिलाया कि सुशीला को कभी भी अपना धर्म बदलने या अपनी पहचान खोने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा.
शादी और 10 साल की लंबी दूरी
आखिरकार, साल 1964 में दोनों ने शादी कर ली और सुशीला ने अपना नाम बदलकर सलमा खान रख लिया. हालांकि, सुशीला का परिवार इस शादी से इतना नाराज था कि अगले 10 सालों तक चरक परिवार और खान परिवार के बीच कोई बातचीत नहीं हुई. यह दूरी तब खत्म हुई जब सलीम और सलमा के सबसे छोटे बेटे, सोहेल खान का जन्म हुआ. तब जाकर परिवार फिर से एक हुआ.
सलमान खान का जन्म
इस ऐतिहासिक जोड़ी के सबसे बड़े बेटे और आज के सुपरस्टार सलमान खान का जन्म 27 दिसंबर, 1965 को इंदौर के कल्याणमल नर्सिंग होम में हुआ था. सलीम खान ने बाद में कई इंटरव्यू में बताया कि उनके जीवन के शुरुआती संघर्षों और माता-पिता को खोने के दुख ने ही उन्हें एक मजबूत इंसान बनाया, जिसकी झलक उनके परिवार और उनके काम में आज भी दिखती है.